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अमेज़न पर भारत में 200 करोड़ रुपए का जुर्माना क्यों लगा?
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने शुक्रवार को ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़न के फ़्यूचर समूह के साथ साल 2019 में हुए एक सौदे को दी गई अपनी मंज़ूरी को निलंबित कर दिया है.
इसके साथ ही आयोग ने अमेज़न पर 200 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. अमेरिका की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़न के लिए यह एक बड़ा झटका है.
CCI ने फ़ैसले में कहा है कि अमेरिकी कंपनी ने दो साल पहले भारतीय रिटेलर फ़्यूचर समूह में निवेश करने से पहले नियामक मंज़ूरी लेने के दौरान 'जानकारियों को दबाया था.'
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के इस फ़ैसले से अमेज़न की फ़्यूचर ग्रुप के साथ चल रही क़ानूनी लड़ाई पर भी दूरगामी असर पड़ सकते हैं.
क्या है मामला
साल 2019 में अमेज़न ने फ़्यूचर ग्रुप की प्रमोटर इकाई फ़्यूचर कूपन्स में 20 करोड़ डॉलर का निवेश किया था और फ़्यूचर कूपन्स प्राइवेट लिमिटेड की 49 फ़ीसदी हिस्सेदारी ख़रीदी थी.
फ़्यूचर कूपन्स का कन्वर्टिबल वॉरंट के ज़रिए फ़्यूचर रिटेल में 9.82 फ़ीसदी हिस्सा है. कथित रूप से अमेज़न इस सौदे के ज़रिए फ़्यूचर रिटेल में 4.81 फ़ीसदी की अप्रत्यक्ष हिस्सेदारी रखता है.
फ़्यूचर ग्रुप ने बीते साल अगस्त में रिलायंस से 3.4 अरब डॉलर की क़ीमत की रिटेल संपत्ति बेचने का सौदा किया था.
इस पर अमेज़न ने आपत्ति जताई थी और उसका कहना था कि उसके क़रार के मुताबिक़ फ़्यूचर ग्रुप कुछ चुनिंदा भारतीय कंपनियों के साथ सौदा नहीं कर सकता है. इसमें रिलांयस भी शामिल है.
आयोग ने क्या दिया है फ़ैसला
57 पन्नों के अपने आदेश में आयोग ने कहा है कि 'सौदे की नए सिरे से जांच ज़रूरी है.' साथ ही आयोग ने 2019 में सौदे को दी गई अपनी मंज़ूरी को तब तक के लिए 'निरस्त कर दिया है.'
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, CCI ने अपने आदेश में कहा है कि अमेज़न ने सौदे के लिए 'वास्तविक कार्यक्षेत्र को दबाया' और अनुमतियां पाने के लिए 'झूठे और ग़लत विवरण' दिए.
भारतीय लॉ फ़र्म एसडी पार्टनर्स की सहयोगी श्वेता दुबे रॉयटर्स से कहती हैं, "अनुमति को निलंबित कर दिया गया है. यह बहुत ही अभूतपूर्व है. आदेश को देखकर लगता है कि CCI को अनुमति निलंबित रखने के लिए नई शक्ति मिल गई है."
इस फ़ैसले से फ़्यूचर समूह के अमेज़न के साथ सौदे पर रोक लगी है जिसकी वजह से अमेज़न की क़ानूनी लड़ाई को चोट पहुंच सकती है. वहीं, रिलायंस के लिए यह राह को आसान कर सकता है.
CCI ने अपने फ़ैसले में 200 करोड़ का जुर्माना लगाने के साथ-साथ दोबारा अनुमति लेने के लिए अमेज़न को जानकारी देने का समय दिया है.
इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया है कि CCI के इस फ़ैसले के बाद अगर अमेज़न सौदे की अनुमति के लिए दोबारा आवेदन करता है तो फ़्यूचर समूह के सहयोग करने की संभावना नहीं है.
सूत्र ने आगे बताया कि CCI के फ़ैसले को फ़्यूचर कंपनी विभिन्न क़ानून मंचों पर पेश करेगी और इसके आधार पर कहेगी कि अमेज़न के पास उसकी संपत्ति को चुनौती देने का कोई क़ानूनी आधार नहीं है.
रॉयटर्स के मुताबिक़, फ़्यूचर और रिलायंस ने इस मुद्दे पर अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है. वहीं अमेज़न ने कहा है कि वो आदेश की समीक्षा कर रही है और 'आने वाले समय में अपने अगले क़दम के बारे में फ़ैसला करेगी.'
रिटेल की जंग
अमेज़न, फ़्यूचर और रिलायंस के बीच जारी यह 'जंग' केवल तीन कंपनियों तक सीमित नहीं है बल्कि इसके ज़रिए भारत जैसे बड़े रिटेल (खुदरा) बाज़ार पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश है.
फ़्यूचर रिटेल के 1500 से अधिक सुपरमार्केट और अन्य आउटलेट हैं जो अमेज़न के मालिक जेफ़ बेज़ोस और भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी की रिलायंस के बीच क़ानूनी जंग की अहम वजह हैं. दोनों में से अगर कोई भी यह क़ानूनी लड़ाई जीतता है तो रिटेल उपभोक्ताओं तक उसकी पहुँच पहले होगी.
फ़्यूचर समूह ने पिछले साल रिलांयस को अपनी 3.4 अरब डॉलर की संपत्ति बेचने का फ़ैसला किया था लेकिन अमेज़न ने क़ानूनी चुनौतियों के ज़रिए इसमें सफलतापूर्वक रुकावट पैदा कर दी थी.
अमेज़न ने फ़्यूचर ग्रुप पर समझौतों का तोड़ने का आरोप लगाया. उसका कहना था कि सौदे के तहत फ़्यूचर ग्रुप अपने फ़्यूचर रिटेल लिमिटेड के व्यवसाय को कुछ प्रतिद्वंद्वियों को नहीं बेच सकता है जिनमें रिलायंस भी शामिल है.
फ़्यूचर समूह की शिकायत के बाद CCI इस सौदे की समीक्षा कर रहा है. फ़्यूचर का कहना था कि अमेज़न 2019 के सौदे के बाद विभिन्न क़ानूनी मंचों पर विरोधाभासी बयान दे रहा है. साथ ही फ़्यूचर समूह ने शिकायत की थी कि अमेज़न ने सौदे के अहम तथ्यों को छिपाया था.
जून में CCI ने अमेज़न से अनुमति लेने के लिए तथ्यों को छिपाने और फ़्यूचर रिटेल में उसके रणनीतिक हितों को लेकर सफ़ाई मांगी थी.
नवंबर 2019 में CCI ने इस सौदे को अनुमति देते हुए यह साफ़ किया था कि अगर किसी भी समय मुहैया की गई जानकारी अगर ग़लत पाई जाती है तो तुरंत आदेश को वापस ले लिया जाएगा.
शुक्रवार को अपने आदेश में CCI ने कहा कि सौदे के 'वास्तविक दायरे और उद्देश्य को दबाने के लिए अमेज़न की ओर से जानबूझकर एक योजना बनाई गई थी.'
रॉयटर्स के मुताबिक इस सप्ताह अमेज़न ने CCI को अपने जवाब में कहा था कि उसने कभी भी किसी जानकारी को छिपाया नहीं था. उसने निगरानी आयोग CCI को चेताते हुए कहा था कि सौदे पर पड़ने वाले किसी भी प्रभाव का विदेशी निवेशकों पर एक नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
सिंगापुर और भारतीय कोर्ट के अंतरिम आदेशों के बाद अमेज़न को फ़्यूचर-रिलायंस समूह के सौदे पर रोक लगाने में मदद मिली थी. हालांकि, फ़्यूचर समूह ने किसी भी ग़लत काम से इनकार किया है.
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