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ओमिक्रॉन की दिल्ली में भी दस्तक, तंज़ानिया से लौटा था व्यक्ति
दिल्ली में कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन का पहला मामला सामने आया है.
दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन के मुताबिक़ तंज़ानिया से दिल्ली लौटे 37 वर्षीय शख़्स में ये संक्रमण पाया गया है. इस व्यक्ति का इलाज एलएनजेपी अस्पताल में किया जा रहा है.
भारत में यह ओमिक्रॉन वेरिएंट का पाँचवाँ मामला है. इससे पहले बेंगलुरु में दो, मुंबई में एक और गुजरात में ओमिक्रॉन वेरिएंट का एक मामला सामने आ चुका है.
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 'अभी तक 17 लोग कोविड टेस्ट में पॉज़िटिव पाए गए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया है.'
बीते सप्ताह दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ओमिक्रॉन पर चिंता ज़ाहिर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की थी कि वो इस नए वेरिएंट से प्रभावित देशों पर यात्रा प्रतिबंध लगाएं.
उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा था, "कई देशों ने ओमिक्रॉन प्रभावित देशों से आने वाली उड़ानें बंद कर दी हैं. हम देरी क्यों कर रहे हैं? पहली वेव में भी हमने विदेशी उड़ानें रोकने में देरी कर दी थी. अधिकतर विदेशी उड़ानें दिल्ली में आती हैं, दिल्ली सबसे ज़्यादा प्रभावित होती है. पीएम साहिब कृपया उड़ानें तुरंत बंद करें."
उन्होंने ये ट्वीट चंडीगढ़ में दक्षिण अफ़्रीका से लौटे शख़्स के कोरोना पॉज़िटिव पाए जाने की खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए किया है.
अब तक दुनिया के 23 देशों में ओमिक्रॉन के मामले सामने आ चुके हैं.
नए वेरिएंट के कारण ब्रिटेन, यूरोपीय यूनियन, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों ने दक्षिण अफ़्रीका सहित कुछ अफ़्रीकी देशों से आने वाली उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया है.
26 नवंबर को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे 'ओमिक्रॉन' नाम दिया और इस नए स्ट्रेन को 'चिंता का विषय' बताया. साथ ही चेतावनी दी है कि ओमिक्रॉन के कारण दुनिया भर में संक्रमण बढ़ने का काफ़ी ज़्यादा ख़तरा पैदा हो गया है और दुनिया के कुछ क्षेत्रों पर इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं.
ब्रिटेन के एक शीर्ष स्वास्थ्य अधिकारी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस नए वेरिएंट के ख़िलाफ़ वैक्सीन के प्रभावी होने की संभावना क़रीब-क़रीब कम है.
किस टेस्ट से पता चलेगा ओमिक्रॉन का संक्रमण?
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा था कि ओमिक्रॉन के साथ अच्छी बात यह है कि इसका पता कुछ आरटी-पीसीआर टेस्ट से चल सकता है. इससे इसका पता लगाने में और फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है. कई दूसरे वेरिएंट का पता लगाने के लिए जीनोम सिक्वेंस का सहारा लेना पड़ता है.
लेकिन कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि यह इतना सीधा मामला नहीं है. ज़्यादातर आरटी-पीसीआर टेस्ट ओमिक्रॉन और दूसरे वेरिएंट में फ़र्क़ करने में सक्षम नहीं हैं.
वैज्ञानिकों का कहना है कि आरटी-पीसीआर टेस्ट से सिर्फ़ ये पता चलता है कि कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित है या नहीं, न कि वेरिएंट के बारे में पता चलता है. ऐसे में जीनोम सिक्वेंसिंग स्टडी ज़रूरी हो जाती है. लेकिन सभी संक्रमित सैंपल को जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए नहीं भेजा जा सकता है. यह प्रक्रिया धीमी, जटिल और महंगी होती है. आरटी-पीसीआर टेस्ट से शरीर में वायरस की मौजूदगी का पता चलता है.
टेस्टिंग का विज्ञान समझने वालों की राय इस सवाल पर बँटी हुई है. सार्वजनिक और निजी लैब में किए जाने वाले ज़्यादातर टेस्ट में सार्स सीओवी-2 संक्रमण का पता लगाया जा सकता है.
लेकिन ये पता नहीं लगाया जा सकता है कि संक्रमित व्यक्ति वायरस के किस वेरिएंट से संक्रमित है. क्योंकि ये टेस्ट वायरस के उस हिस्से को तलाशते हैं, जिनमें ज़्यादा बदलाव नहीं होता है. वेरिएंट को म्युटेशन में अंतर के आधार पर तय किया जाता है.
ओमिक्रॉन के मामले में, ये अंतर स्पाइक प्रोटीन के म्युटेशन से जुड़ा है, जो कि वायरस का एक ऐसा हिस्सा होता है जो कि बार-बार बदलता है ताकि वह ख़ुद को दवाइयों और रोग-प्रतिरोध कोशिकाओं से बचा सके.
इसी वजह से इसकी जाँच करना मुश्किल है. ऐसे में ज़्यादातर टेस्ट ये बताएंगे कि फलां व्यक्ति को कोरोना संक्रमण हुआ है लेकिन वह ये नहीं बताएंगे कि व्यक्ति ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित है.
इसके लिए डॉक्टर को आपके सैंपल को एक लैब में भेजना होगा जो कि जेनेटिक सीक्वेंसिंग की मदद से ओमिक्रॉन जैसे जेनेटिक सिग्नेचर की तलाश कर सकते हैं.
ओमिक्रॉन का संक्रमण कितना ख़तरनाक है?
ओमिक्रॉन के स्पाइक प्रोटीन में हुए 32 म्यूटेशन बहुत अहम बताए जा रहे हैं क्योंकि इनका संबंध शरीर की कोशिकाओं को संक्रमित करने और प्रतिरक्षा तंत्र से बचने में होता है.
इस तरह के म्यूटेशन कोरोना वायरस के अब तक आ चुके वेरिएंट्स में भी पाए गए हैं. इन वेरिएंट को 'वेरिएंट ऑफ़ कंर्सन' और 'वेरिएंट ऑफ़ इंटरस्ट' की श्रेणी में रखा गया था. जैसे एन501वाई म्यूटेशन जो एल्फ़ा, बीटा और गामा वेरिएंट में हुआ है. टी951, टी478के और जी142डी म्यूटेशंस डेल्टा वेरिएंट में हुए हैं.
इन म्यूटेशंस के शरीर में मौजूद एसीई2 सेल रिसेप्टर (एस477एन, क्यू498आर) के संपर्क में आने की भूमिका का पता चला है, ये कुछ एंटीबॉडीज़ (जी339डी, एस371एल, एस373पी, एस375एफ़) के क्षेत्रों में पाए गए हैं.
हालांकि, इन म्यूटेशन के एक साथ पाए जाने पर इनका क्या प्रभाव होगा ये अभी पता लगाया जाना बाकी है.
दो म्यूटेशन का एक साथ प्रभाव हमेशा जुड़कर आए ये ज़रूरी नहीं है. इनका प्रभाव ज़्यादा भी हो सकता है और घट भी सकता है यानी ये वायरस को और ख़तरनाक या कमज़ोर दोनों बना सकते हैं.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वेरिएंट ऑफ़ कंसर्न इसलिए कहा है क्योंकि इसमें संक्रमण का ख़तरा ज़्यादा हो सकता है. हालांकि, अभी इस बात की पुष्टि के लिए कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है.
हाल ही में दिल्ली के एम्स अस्पताल के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा था है कि अभी ओमिक्रॉन नाम के नए वेरिएंट को लेकर जो भी जानकारियाँ उपलब्ध हैं, उनसे कई तरह की संभावनाओं का संकेत मिलता है, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर पहुँचने के लिए उन्हें वैज्ञानिक आधार पर जाँचने की आवश्यकता है.
'बहुत मामूली लक्षण'
वायरस का ये नया वेरिएंट इस महीने सबसे पहले दक्षिण अफ़्रीका में पाया गया था जिसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन को इसकी जानकारी दी गई. संगठन ने 24 नवंबर को इस नए वेरिएंट की पुष्टि की और बयान जारी किया.
कोरोना के इस नए वेरिएंट को सबसे पहले दक्षिण अफ़्रीका की डॉक्टर एंजेलिक़ कोएत्ज़ी ने पकड़ा. उन्होंने बीबीसी को बताया कि अभी तक तक वहाँ जिन लोगों में ये वेरिएंट मिला है उनमें कोविड के "बहुत मामूली लक्षण" नज़र आए हैं.
उन्होंने कहा, "ज़्यादातर मरीज़ बदन में दर्द और बहुत ज़्यादा थकावट की शिकायत कर रहे हैं. और मैं ये बात युवाओं के बारे में कर रही हूँ. मैं उन लोगों की बात नहीं कर रही जो अस्पताल जाकर भर्ती हो गए."
हालाँकि, डॉक्टर कोएत्ज़ी ने साथ ही कहा कि ऐसे लोग जिन्हें ख़तरा ज़्यादा होता है, उनपर इस वेरिएंट के असर की गंभीरता का अनुमान लगाने में अभी समय लगेगा.
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