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नगालैंड हिंसा: सुरक्षाबलों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर, हत्या की धाराएं लगाई गईं
नगालैंड में शनिवार रात सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कई आम लोगों के मारे जाने के मामले में मोन ज़िले के तिज़ित पुलिस थाने में स्वत: संज्ञान लेते हुए 21वीं पैरा मिलिट्री फ़ोर्स के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की गई है. एफ़आईआर में कहा गया है कि ''चार दिसंबर को कोयले की खदानों में काम करने वाले मज़दूर एक गाड़ी में तिरु से अपने गांव ओटिंग लौट रहे थे. तिरु और ओटिंग गांव के बीच में लॉन्गखाओ में पहुंचने पर सुरक्षा बलों ने बिना किसी उकसावे के गाड़ी पर गोलियां चला दीं जिससे ओटिंग गांव के कई लोग मारे गए और कई गंभीर रूप से घायल हो गए.''एफ़आईआर में ये भी कहा है कि "घटना के दौरान कोई पुलिस गाइड नहीं था और ना ही सुरक्षा बलों के इस अभियान में पुलिस गाइड देने के लिए पुलिस थाने से मांग की गई थी. इससे ये साफ़ है कि सुरक्षा बलों का इरादा आम लोगों को मारना और घायल करना था."
नगालैंड के मोन ज़िले के तिरु इलाक़े में शनिवार रात सुरक्षाबलों की कार्रवाई में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई है. ये इलाक़ा म्यांमार की सीमा के नज़दीक है.
आधिकारिक रूप से अभी तक ये नहीं बताया गया है कि कितने लोगों की मौत हुई है लेकिन समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, कम से कम 11 आम लोगों की मौत हुई है.
वहीं, नगा पीपल्स फ्रंट पार्टी के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री टी.आर. ज़ेलियांग के अनुसार, 13 लोगों की मौत हुई है.
राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति बनाई है और जांच के लिए एक महीने का समय दिया गया है.
क्या है मामला?
शनिवार रात गश्त लगा रही सेना की एक टुकड़ी ने काम ख़त्म कर घर लौट रहे लोगों पर गोलियां चलाईं. इस घटना में छह लोगों की मौत हो गई.
इसके बाद इस घटना से नाराज़ स्थानीय लोगों की सेना के साथ झड़प हुई जिसमें सात और आम नागरिकों और सेना के एक जवान की मौत हो गई.
नगालैंड में सेना बीते कई सालों से उग्रवाद की समस्या से जूझ रही है. यहां लोग सेना पर अपने अभियानों में स्थानीय लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाते रहे हैं.
जांच के लिए बनाई गयी समिति
बीबीसी हिंदी के सहयोगी पत्रकार पिनाकी दास के मुताबिक़, इस मामले की जांच के लिए एक पांच सदस्यीय विशेष जांच समिति बनाई है.
नगालैंड के चीफ़ सेक्रेटरी ने बताया है कि यह समिति एक एडीजीपी संदीप तामगाडगे की देखरेख में इस मामले की जांच करेगी और एक महीने के अंदर अपनी जांच पूरी करेगी.
इस समिति में आईपीएस एल जमीर, आईपीएस रूपा एम., आईपीएस मनोज कुमार, एनपीएस किलांग वालिंग और एनपीएस रेलो आए शामिल हैं.
कई जगहों पर शांति मार्च
नगालैंड के मोन जिले में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में 11 आम नागरिकों की मौत के बाद रविवार रात कई जगह मोमबत्तियां जलाकर शांति मार्च निकाले गए हैं.
स्थानीय पत्रकार एचए होंगनाओ कोनयाक के मुताबिक़ घटना के बाद से लोगों में गुस्सा है और राजधानी कोहिमा समेत कई जगह मोमबत्तियां जलाकर शांति मार्च निकाले गए हैं. राजधानी कोहिमा में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है.
उन्होंने बताया है कि हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं और मोन ज़िले में प्रशासन ने धारा 144 लगा दी है और चार लोगों से अधिक के इकट्ठा होने पर रोक है. यहां सुरक्षा व्यवस्था के सख़्त इंतेज़ाम किए गए हैं. शवों को अभी भी मोन के ज़िला अस्पताल में रखा गया है.
कोनयाक का कहना है कि प्रदेश के दूसरे हिस्सों से मोन की तरफ अतिरिक्त पुलिसबल भेजे गए हैं. वहीं राज्य के मुख्यमंत्री समेत बड़े अधिकारी सोमवार को घटनास्थल पर पहुंच रहे हैं.
मामले पर डिफेंस विंग कोहिमा का बयान
इससे पहले रविवार को इस पूरे मामले पर डिफेंस विंग कोहिमा की तरफ़ से एक प्रेस रिलीज़ जारी की गई थी.
इस प्रेस रिलीज में बताया गया था, ''उग्रवादियों की संभावित गतिविधि के बारे में विश्वस्त ख़ुफ़िया सूचना मिली थी. इसी के आधार पर नगालैंड के मोन ज़िले के तिरु इलाक़े में एक ऑपरेशन की योजना बनाई गई थी. जो घटना हुई है, उसे लेकर गहरा खेद है. आम लोगों की दुर्भाग्यपूर्ण मौत की वजह की उच्च स्तरीय जाँच की जा रही है. क़ानून के हिसाब से इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी.''
वहीं, राज्य के होम कमिश्नर अभिजीत सिन्हा ने शनिवार रात को ही मोन ज़िले में मोबाइल इंटरनेट, डेटा सर्विस और बल्क एसएमएस पर पाबंदी लगा दी थी.
गृह विभाग द्वारा जारी प्रेस रिलीज़ में बताया गया है कि अफ़वाहों के कारण क़ानून-व्यवस्था न बिगड़े, यह सुनिश्चित करने के लिए ऐसा किया जा रहा है.
इस घटना पर देश के गृह मंत्री और राज्य के मुख्यमंत्री ट्वीट करके दुख जता चुके हैं और एक उच्च स्तरीय जांच कमिटी के गठन की बात कही गई है.
राज्य के मुख्यमंत्री नेफ़ियू रियो ने ट्वीट करके बताया था कि मोन ज़िले के 'ओटिंग में आम लोगों का मारा जाना बेहद दुखद है और वो इसकी निंदा करते हैं.'
मोन क्षेत्र को नगा समूह एनएससीएन(के) और उल्फा का गढ़ माना जाता है.
ये घटना राज्य में मनाए जाने वाले लोकप्रिय पर्व "हॉर्नबिल फ़ेस्टिवल" से ठीक पहले हुई है. इस पर्व में हिस्सा लेने के लिए कई राजनयिक पहले से ही राज्य में मौजूद हैं.
नगा पीपल्स फ्रंट पार्टी के नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री टी.आर. ज़ेलियांग ने ट्वीट कर इस घटना की निंदा की है और मामले की जांच के लिए आयोग के गठन की मांग की है.
उन्होंने लिखा, "मैं ओटिंग, मोन में हुई बेगुनाहों की हत्याओं की कड़ी निंदा करता हूँ. इस नरसंहार के लिए किसी तरह का कोई बहाना नहीं हो सकता. रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक जाँच आयोग तुरंत गठित किया जाए और इसमें शामिल सुरक्षाकर्मियों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए."
अपने दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा है, "एक सभ्य समाज, जहाँ हम सभी शांति और अमन से रहना चाहते हैं, वहां सुरक्षाबलों की ओर से हुई ये क्रूरता दुर्भाग्यपूर्ण है. इस घटना में मारे गए 13 लोगों के शोकाकुल परिवार के प्रति मैं सहानूभूति व्यक़्त करता हूँ और मेरी प्रार्थना है कि घायलों के स्वास्थ्य में जल्द से जल्द सुधार हो."
ईस्टर्न नगालैंड पीपल्स ऑर्गेनाइज़ेशन के अध्यक्ष केकोंगचिम यिमयुंगर ने बीबीसी से बात करते हुए कहा, "अभी हमें इस घटना में 14 लोगों के मारे जाने की जानकारी मिली है और कई लोग घायल हैं. कई लोग लापता बताए जा रहे हैं. हम सही सूचना का इंतज़ार कर रहे हैं."
केकोंगचिम के मुताबिक घटनास्थल के पास संपर्क नहीं हो पा रहा है. वहाँ इंटरनेट और एसएमएस सेवा बंद कर दी गई है. ईएनपीओ ने इस घटना की आलोचना की है. बीबीसी से बात करते हुए केकोंगचिम ने कहा कि पूरी जानकारी मिलने के बाद ही हम तय करेंगे की आगे क्या करना है.
समाचार एजेंसी एएनआई ने असम राइफ़ल्स के एक अधिकारी के हवाले से बताया है कि इस घटना में एक सुरक्षाबल की भी मौत हुई है और कई जवान घायल हुए हैं.
इधर घटना के बाद गुस्साई भीड़ ने मोन में मौजूद असम राइफ़ल्स के पोस्ट पर हमला किया.
बीबीसी के सहयोगी पत्रकार सुचित्र मोहन्ती के अनुसार असम राइफ़ल्स के प्रवक्ता ने बयान जारी कर मृतकों के प्रति संवेदना जताई और कहा है कि इस दुर्भाग्यजनक घटना के बाद जो हिंसा हुई उससे वो चिंतित हैं.
बयान में कहा गया है कि घटना के बाद क़रीब 300 लोगों की भीड़ ने मोन में असम राइफ़ल्स की पोस्ट पर हमला किया. असम राइफ़ल्स के जवानों ने संयम बरतते हुए भीड़ को तितरबितर करने के लिए हवा में गोलियां चलाईं.
बयान में कहा गया है, "हमले में असम राइफ़स्ल के कुछ जवान घायल हुए हैं और संपत्ति को नुक़सान पहुंचा है."
असम राइफ़ल्स ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि हालात और न बिगड़ें इसके लिए लोगों को धैर्य बनाए रखना होगा.
राहुल गांधी ने उठाया सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को नगालैंड के मोन ज़िले में उग्रवादियों के ख़िलाफ़ चलाए गए अभियान में आम लोगों की मौत होने पर केंद्र सरकार को घेरा है.
राहुल गांधी ने ट्वीट करके सवाल उठाया है कि "ये हृदय विदारक घटना है. सरकार को सही मायनों में इस सवाल का जवाब देना चाहिए कि जब अपनी ही ज़मीन पर आम लोगों के साथ - साथ सुरक्षाकर्मी भी सुरक्षित नहीं हैं तो गृह मंत्रालय क्या कर रहा है."
कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए गृह मंत्री अमित शाह की आलोचना की है.
इसके साथ ही टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए ट्वीट किया है.
उन्होंने लिखा है, "नगालैंड से चिंताजनक ख़बर आ रही है. शोक संतप्त परिवारों के प्रति हार्दिक संवेदना. मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करती हूं. हमें घटना की गहन जांच सुनिश्चित करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सभी पीड़ितों को न्याय मिले!"
एआईएमआईएम नेता असदउद्दीन ओवैसी ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना जताई है और कहा है कि गृह मंत्री को बर्ख़ास्त किया जाना चाहिए.
एक ट्वीट कर उन्होंने कहा है, "अमित शाह को बर्ख़ास्त किया जाना चाहिए. उग्रवादियों के साथ उन्होंने समझौता करने की बात धोख़ा थी. नवंबर में मणिपुर में सात अफ़सरों को उग्रवादियों ने मार दिया था. उत्तरपूर्व में शांति नहीं है, केवल हिंसा है. "
नगालैंड के मुख्यमंत्री और अमित शाह ने क्या कहा
मुख्यमंत्री रियो ने कहा है कि वो मारे गए लोगों के शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट करते हैं और घायलों के जल्दी ठीक होने की प्रार्थना करते हैं. जाँच के लिए उच्च स्तरीय एसआईटी का गठन कर दिया गया है और क़ानून के अनुसार, न्याय किया जाएगा, सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील है.
वहीं, इस घटना पर देश के गृह मंत्री अमित शाह ने भी ट्वीट करके दुख जताया है.
उन्होंने कहा है कि इस मामले की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय एसआईटी टीम का गठन कर दिया गया है जो शोकाकुल परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करेगी.
समाचार एजेंसी एएनआई ने असम राइफ़ल्स के अधिकारियों के हवाले से बताया है कि 'मोन ज़िले के तिरु में उग्रवादियों की उन्हें पुख़्ता ख़ुफ़िया जानकारी मिली थी जिसके बाद अभियान शुरू किया गया. जानों के नुक़सान के कारण की जाँच कोर्ट ऑफ़ इन्क्वायरी करेगी और उचित कार्रवाई की जाएगी.'
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