महाराष्ट्र: अमरावती में बंद के दौरान हिंसा, दुकानों में तोड़फोड़, शहर में लगा कर्फ़्यू

महाराष्ट्र के अमरावती शहर में शुक्रवार को हुई तोड़फोड़ के विरोध में भाजपा और हिंदू संगठनों ने शनिवार को बंद का आह्वान किया था. इस दौरान शहर में तनाव का माहौल रहा.

शनिवार सुबह अमरावती में कुछ लोगों ने कथित रूप से बीजेपी द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान पत्थरबाज़ी करते हुए दुकानों को नुकसान पहुंचाया है. प्रदर्शनकारियों ने कुछ दुकानों में तोड़फोड़ की और बंद हिंसक हो गया. कुछ जगहों पर पत्थरबाज़ी की घटना भी हुई है.

इस बीच, भाजपा और हिंदू समर्थक संगठनों ने पाकिस्तान विरोधी नारे लगाए. ज़िला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर अगले आदेश तक अमरावती शहर में कर्फ़्यू लगाने का फ़ैसला किया है.

शनिवार सुबह भाजपा कार्यकर्ता शहर के राजकमल चौक पर एकत्रित हुए और उन्होंने मार्च किया. बंद को देखते हुए अमरावती शहर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है.

इससे पहले मुस्लिम संगठनों ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के कई ज़िलों में त्रिपुरा की सांप्रदायिक हिंसा के विरोध में रैलियां निकाली थीं. इस दौरान पत्थरबाज़ी की घटनाएं भी सामने आई थीं. शनिवार को इसी पत्थरबाज़ी के विरोध में बंद का आह्वान किया गया था.

अमरावती पुलिस से जुड़े एक अधिकारी ने बताया है कि अमरावती के राजकमल चौक पर सैकड़ों लोग हाथ में भगवा झंडे पकड़कर हुए नारे लगाते नज़र आए हैं.

इनमें से कुछ लोगों ने दुकानों पर पत्थर बरसाकर उन्हें नुकसान पहुंचाया जिसकी वजह से पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. पुलिस ने अब तक शुक्रवार को हुई हिंसा के मामले में 20 लोगों को गिरफ़्तार किया है.

गृह मंत्री की अपील

इस बीच गृह मंत्री ने संयम बरतने की अपील करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्थिति पर पैनी नज़र रखे हुए है. उन्होंने कहा कि नागरिकों को किसी भी अफवाह पर विश्वास नहीं करना चाहिए. इस मामले में दोषी पाए जाने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी.

उन्होंने लोगों से आग्रह किया, ऐसी स्थिति में हम सभी को सामाजिक एकता बनाए रखने की ज़रूरत है और इस दृष्टि से सभी को सहयोग करना चाहिए.

"पुलिस को स्थिति को संयम से संभालने और राज्य में शांति बनाए रखने की दिशा में काम करने के निर्देश दिए गए हैं. इसे देखते हुए हर जगह पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है."

संजय राउत ने क्या कहा

इस हिंसा के मुद्दे पर पत्रकारों से बात करते हुए राउत ने कहा कि राज्य सरकार मजबूत स्थिति में है और इस हिंसा के लिए ज़िम्मेदार चेहरों को जल्द सामने लाया जाएगा.

संजय राउत ने कहा है, "महाराष्ट्र में जो हिंसा हो रही है उसका उद्देश्य महाविकास अगाड़ी सरकार को अस्थिर करना है. हिंसक घटनाओं की बात करते हुए वे (विपक्ष) राज्यपाल से मिलेंगे और केंद्रीय गृह मंत्रालय को पत्र लिखकर दावा करेंगे कि महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था बिगड़ रही है. भविष्य में ये सब भी होगा. लेकिन राज्य सरकार बिल्कुल स्थिर है."

उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र गृह मंत्रालय की जांच में इस हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों को सामने लाया जाएगा. महाराष्ट्र में शिवसेना, कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने मिलकर सरकार बनाई है जिसे महाविकास अगाड़ी सरकार कहा जाता है.

अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएं

एनसीपी नेता और राज्य सरकार के मंत्री नवाब मलिक ने कहा, "कल जो हुआ वह सही नहीं है. नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. आंदोलन करना आपका अधिकार है, लेकिन हिंसक आंदोलन करना नहीं है. लोगों को सावधान रहना चाहिए कि अब और हिंसा नहीं होगी. कुछ लोग शांति भंग करने की कोशिश कर रहे हैं."

उधर, एआईएमआईएम सांसद इम्तियाज़ ज़लील ने अमरावती हिंसा की निंदा करते हुए कहा है, "मैं त्रिपुरा और महाराष्ट्र दोनों जगह हुई हिंसा की निंदा करता हूं. मैं मुसलमानों के वोटों की मदद से सत्ता में आने वाले नेताओं से सवाल करना चाहता हूं कि उन्होंने त्रिपुरा में हुई हिंसा की निंदा क्यों नहीं की. अगर महाराष्ट्र में किसी पार्टी ने इस हिंसा को बदले की कार्रवाई के रूप में इस्तेमाल किया है तो मैं कहूंगा कि ये ग़ैर ज़िम्मेदारी का परिचय है."

इसी बीच अमरावती की सांसद नवनीत राणा ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है.

त्रिपुरा में हुई हिंसा का 'असर'

त्रिपुरा में मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ कथित अत्याचार के विरोध में शुक्रवार को निकाली गई रैलियां राज्य के कुछ हिस्सों में हिंसक हो गई थीं. इनमें मालेगांव, नांदेड़ और अमरावती में तनाव अधिक था.

त्रिपुरा में हुई हिंसा के ख़िलाफ़ मालेगांव में बंद का आह्वान किया गया था. इस बंद के दौरान हिंसा की घटनाएं हुईं जिसके बाद पुलिस को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा.

वहीं, नांदेड़ में कुछ लोगों के पथराव करने से शहर में तनाव पैदा हो गया. पथराव में पुलिस अधिकारी भी घायल हो गए.

इसके अलावा इस घटना का असर अमरावती में भी देखने को मिला है. पुलिस ने कहा कि कुछ स्थानों पर तोड़फोड़ की सूचना मिली है. पता चला है कि शहर के अलग-अलग हिस्सों में 20 से 22 दुकानों में तोड़फोड़ की गई. प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर पथराव भी किया.

पुलिस क्या कर रही है?

हिंसा में कई निजी और सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है. पुलिस यूएपीए एक्ट के तहत कार्रवाई कर रही है तो इसे लेकर आक्रोश भी है.

पुलिस का कहना है कि उन्होंने फर्जी फोटो, वीडियो या आपत्तिजनक जानकारी फैलाकर धार्मिक तनाव फैलाने की कोशिश करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है. हालांकि कुछ लोगों का कहना है कि पुलिस यूएपीए क़ानून का इस्तेमाल कर कुछ समूहों को निशाना बना रही है.

मालेगांव में, रज़ा अकादमी सहित अन्य मुस्लिम संगठनों द्वारा बंद का आह्वान किया गया था. त्रिपुरा में सांप्रदायिक हिंसा के दोषियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग को लेकर आहूत बंद दोपहर तक शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहा.

अमरावती शहर में ज़िला कलेक्टर कार्यालय के पास मार्च निकाला गया. विरोध प्रदर्शन में हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारियों ने हिस्सा लिया. हालांकि, जैसे ही विरोध हिंसक हुआ, शहर में तनाव बढ़ गया.

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