सावरकर और गांधी पर राजनाथ सिंह का ऐसा दावा, जिस पर छिड़ गई है बहस

राजनाथ सिंह

इमेज स्रोत, Rajnath singh Twitter

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि विनयाक दामोदर सावरकर के 'दया याचिका' दायर करने को एक ख़ास वर्ग ने ग़लत तरीक़े से फैलाया. उन्होंने दावा किया कि सावरकर ने जेल में सज़ा काटते हुए अंग्रेज़ों के सामने दया याचिका महात्मा गांधी के कहने पर दाखिल की थी.

राजनाथ सिंह के इस बयान पर सोशल मीडिया में बहस छिड़ गई है. कई नेता, इतिहासकार और पत्रकार इस पर टिप्पणी कर रहे हैं.

दिल्ली में सावरकर पर उदय माहूरकर और चिरायु पंडित की किताब 'वीर सावरकर हु कुड हैव प्रीवेंटेड पार्टिशन' के विमोचन कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने ये बात कही. इस कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत भी मौजूद थे.

छोड़िए YouTube पोस्ट, 1
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 1

राजनाथ सिंह ने कहा, ''सावरकर के ख़िलाफ़ झूठ फैलाया गया, कहा गया कि उन्होंने अंग्रेज़ों के सामने बार-बार माफ़ीनामा दिया, लेकिन सच्चाई ये है कि क्षमा याचिका उन्होंने ख़ुद को माफ़ किए जाने के लिए नहीं दी थी, उनसे महात्मा गांधी ने कहा था कि दया याचिका दायर कीजिए. महात्मा गांधी के कहने पर उन्होंने याचिका दी थी."

"महात्मा गांधी ने अपनी ओर से ये अपील की थी कि सावरकर जी को रिहा किया जाना चाहिए. जैसे हम आज़ादी हासिल करने के लिए आंदोलन चला रहे हैं, वैसे ही सावरकर भी आंदोलन चलाएंगे. लेकिन उन्हें बदनाम करने के लिए कहा जाता है कि उन्होंने माफ़ी मांगी थी, अपने रिहाई की बात की थी जो बिलकुल बेबुनियाद है.''

सावरकर-गांधी

इमेज स्रोत, AFP/BBC

''वीर सावरकर महानायक थे, हैं और भविष्य में भी रहेंगे. देश को आज़ाद कराने की उनकी इच्छाशक्ति कितनी मज़बूत थी, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अंग्रेज़ों ने उन्हें दो बार आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई, कुछ विशेष विचारधारा से प्रभावित लोग ऐसे राष्ट्रवादी पर सवालिया निशान लगाने का प्रयास करते हैं."

"कुछ लोग उन पर (सावरकर) नाज़ीवादी, फ़ासीवादी होने का आरोप लगाते हैं लेकिन सच्चाई यह है कि ऐसा आरोप लगाने वाले लोग लेनिनवादी, मार्क्सवादी विचारधारा से प्रभावित थे और अभी भी हैं.''

इस कार्यक्रम में मौजूद संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, ''स्वतंत्रता के बाद से ही वीर सावरकर को बदनाम करने की मुहिम चली. अब इसके बाद स्वामी विवेकानंद, स्वामी दयानंद सरस्वती और योगी अरविंद को बदनाम करने का नंबर लगेगा, क्योंकि सावरकर इन तीनों के विचारों से प्रभावित थे.''

''सावरकर जी का हिन्दुत्व, विवेकानंद का हिन्दुत्व ऐसा बोलने का फ़ैशन हो गया, हिन्दुत्व एक ही है, वो पहले से है और आख़िर तक वही रहेगा.''

पढ़िए..

'बीजेपी सावरकर को राष्ट्रपिता का दर्जा नहीं देगी?'

राजनाथ सिंह के दावे पर ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है, ''ये लोग इतिहास को तोड़कर पेश कर रहे हैं. एक दिन ये लोग महात्मा गांधी को राष्ट्रपिता के दर्जे से हटाकर सावरकर को ये दर्जा दे देंगे. न्यायाधीश जीवन लाल कपूर की जांच में गांधी की हत्या में सावरकर की मिलीभगत पाई गई थी.''

छोड़िए YouTube पोस्ट, 2
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त, 2

इसके बाद ओवैसी ने सावरकर को लिखा गया महात्मा गांधी के ख़त का ब्यौरा ट्विटर पर पेश किया. ओवैसी ने लिखा कि 'सर राजनाथ सिंह यहां सावरकर को लिखा गया गांधी का पत्र है और इसमें कहीं भी अंग्रेज़ों से माफ़ी मांगने का ज़िक्र नहीं है.'

छोड़िए X पोस्ट, 1
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 1

सोशल मीडिया पर राजनाथ सिंह के बयान को लेकर खूब प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

आधुनिक राजनीतिक इतिहास के जानकार सैयद इरफ़ान हबीब ने ट्वीट किया, "जी हां, एकरंगी इतिहास लेखन वास्तव में बदल रहा है जिसका नेतृत्व मंत्री कर रहे हैं और जिनका दावा है कि गांधी ने सावरकर को माफ़ीनामा लिखने को कहा था. कम से कम अब यह स्वीकार किया गया कि उन्होंने लिखा था. जब मंत्री दावा करते हैं तो किसी दस्तावेज़ी साक्ष्य की ज़रूरत नहीं होती है. नए भारत के लिए नया इतिहास."

छोड़िए X पोस्ट, 2
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 2

महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता असलम शेख़ ट्विटर पर लिखते हैं, ''इतिहास, इतिहास ही रहेगा. बीजेपी के महानायक सावरकर ने एक-दो नहीं बल्कि छह क्षमा याचिकाएं (1911, 1913, 1914, 1915, 1918 और 1920) अंग्रेज़ों को लिखी थीं, जिसमें वो माफ़ी की भीख मांग रहे थे. ''

छोड़िए X पोस्ट, 3
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 3

पत्रकार सागरिका घोष लिखती हैं, ''सावरकर की बुरी छवि का जवाब उनकी छवि को साफ़ करने की कोशिशों से नहीं हो सकती, आरएसएस का इतिहास, इतिहास का सच नहीं है.''

छोड़िए X पोस्ट, 4
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त, 4

9 सालों में 6 माफ़ीनामे

कभी भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भारतीय जनसंघ के सदस्य नहीं रहे विनायक दामोदर सावरकर का नाम संघ परिवार में बहुत इज़्ज़त और सम्मान के साथ लिया जाता है.

साल 2000 में वाजपेयी सरकार ने तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन के पास सावरकर को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' देने का प्रस्ताव भेजा था, लेकिन उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया था.

अपने राजनीतिक विचारों के लिए सावरकर को पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया था. साल 1910 में उन्हें नासिक के कलेक्टर की हत्या में संलिप्त होने के आरोप में लंदन में गिरफ़्तार कर लिया गया था.

सावरकर पर ख़ासा शोध करने वाले निरंजन तकले बताते हैं, "1910 में नासिक के ज़िला कलेक्टर जैकसन की हत्या के आरोप में पहले सावरकर के भाई को गिरफ़्तार किया गया था."

"सावरकर पर आरोप था कि उन्होंने लंदन से अपने भाई को एक पिस्टल भेजी थी, जिसका हत्या में इस्तेमाल किया गया था. 'एसएस मौर्य' नाम के पानी के जहाज़ से उन्हें भारत लाया जा रहा था. जब वो जहाज़ फ़्रांस के मार्से बंदरगाह पर 'एंकर' हुआ तो सावरकर जहाज़ के शौचालय के 'पोर्ट होल' से बीच समुद्र में कूद गए."

अगले 25 सालों तक वो किसी न किसी रूप में अंग्रेज़ों के क़ैदी रहे.

निरंजन तकले बताते हैं, "मैं सावरकर की ज़िंदगी को कई भागों में देखता हूँ. उनकी ज़िदगी का पहला हिस्सा रोमांटिक क्रांतिकारी का था, जिसमें उन्होंने 1857 की लड़ाई पर किताब लिखी थी. इसमें उन्होंने बहुत अच्छे शब्दों में धर्मनिरपेक्षता की वकालत की थी."

"गिरफ़्तार होने के बाद असलियत से उनका सामना हुआ. 11 जुलाई 1911 को सावरकर अंडमान पहुंचे और 29 अगस्त को उन्होंने अपना पहला माफ़ीनामा लिखा, वहाँ पहुंचने के डेढ़ महीने के अंदर. इसके बाद 9 सालों में उन्होंने 6 बार अंग्रेज़ों को माफ़ी पत्र दिए."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)