लखीमपुर खीरी मामला: आशीष मिश्रा की गिरफ़्तारी न हुई तो पूरे देश में होंगे प्रदर्शन- संयुक्त किसान मोर्चा

संयुक्त किसान मोर्चा ने शनिवार को लखीमपुर खीरी हिंसा के विरोध में 18 अक्तूबर को रेल रोको का आह्वान किया है. किसान मोर्चा ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा और उनके बेटे आशीष मिश्रा की गिरफ़्तारी की मांग भी की है.

संयुक्त किसान मोर्चा के नेता योगेंद्र यादव ने केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा पर साजिश रचने का आरोप लगाया और कहा, "उन्हें पद से हटाया जाना चाहिए और उनकी गिरफ़्तारी होनी चाहिए क्योंकि उन्होंने ही साज़िश रची."

शनिवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में पत्रकारों को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि वो 15 अक्तूबर को दशहरे के मौक़े पर देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के पुतलों को आग के हवाले करेंगे.

प्रेस वार्ता में योगेंद्र यादव ने कहा कि "लखीमपुर खीरी में हुई घटना किसानों के लिए जलियांवाला बाग़ की घटना के समान है."

एक और किसान नेता ने कहा कि "लखीमपुर खीरी की घटना को अलग कर के नहीं देखा जा सकता. इससे पहले करनाल में किसानों पर लाठियां चलाई गई थीं. उसके बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने लठैत तैयार करने की बात की थी. सरकार पूरी तरह किसान आंदोलन को ख़त्म करने की विफल रही है और अब उसने किसानों को कुचलना शुरू कर दिया है."

12 अक्टूबर से तिकुनिया में किसानों का विरोध प्रदर्शन

स्वराज इंडिया के संजोयक योगेंद्र यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आगामी रणनीति के बारे में जानकारी दी. उन्होंने कहा, पहला कार्यक्रम 12 अक्टूबर को अंतिम अरदास पर, शोक समारोह का आयोजन किया गया है. यह समारोह ठीक उसी जगह होगा जहां लखीमपुर खीरी हिंसा की घटना हुई.

संयुक्त किसान मोर्चा ने देशभर के किसानों को 12 बजे तिकुनिया पहुंचने का अनुरोध किया गया है. योगेंद्र यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जो किसान तिकुनिया नहीं पहुंच सकते वे गुरुद्वारे जाएं और शाम को मोमबत्ती जलाएं.

उन्होंने कहा कि यह शोकसभा चार किसानों और एक किसान पत्रकार की मौत पर शोक ज़ाहिर करने के लिए आयोजित की जा रही है.

इसके बाद तिकुनिया के उसी जगह से 12 बजे किसानों की अस्थियां लेकर कलश यात्रा शुरू होगी. ये यात्राएं 24 अक्टूबर तक चलेंगी. ये कलश उत्तर प्रदेश के हर ज़िले में ले जाए जाएंगे और देश के हर राज्य में भी. उसके बाद इन्हें पवित्र जगह विसर्जित किया जाएगा.

इसके बाद तीसरा आयोजन दशहरे के दिन किया जाएगा. जिस दिन अहंकार के नाश के प्रतीक स्वरूप पीएम मोदी का पुतला जलाया जाएगा. चौथा कार्यक्रम 18 अक्टूबर को रेल रोको अभियान चलाया जाएगा. जिसमें सुबह दस से चार बजे तक देश में हर जगह रेल रोकी जाएगी. वहीं 26 अक्टूबर को लखनऊ में महापंचायत का आयोजन किया जाएगा.

योगेंद्र यादव ने कहा कि पहले कार्यक्रम को छोड़कर बाकी कार्यक्रम कैसे संचलित होंगे यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करेगा कि 11 तारीख़ तक हमारी मांगे मानी जाती हैं या नहीं.

आशीष मिश्रा की गिरफ़्तारी पर किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि "उन्हें गिरफ़्तार नहीं किया गया है उन्हें तो निमंत्रण देकर बुलाया गया है."

लखीमपुर खीरी में क्या चल रहा है?

लखीमपुर खीरी में मौजूद बीबीसी के सहयोगी पत्रकार अनंत झणाणे के मुताबिक़ आज सुबह 11 बजे की पुलिस की दी गई मोहलत से पहले मंत्री के बेटे और तिकुनिया घटना के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा पुलिस लाइन्स में स्थित क्राइम ब्रांच के दफ़्तर पहुँचे.

मीडिया के जमावड़े के बावजूद एक दूसरे रास्ते मास्क पहने हुए आशीष मिश्रा को क्राइम ब्रांच के दफ़्तर लाया गया. इससे पहले कि मीडिया आशीष मिश्रा से सवाल कर सके पुलिस ने झट से उन्हें क्राइम ब्रांच के दफ़्तर के अंदर कर दिया.

केंद्रीय ग्रह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी कल रात ही दिल्ली से लखीमपुर पहुंच गए थे और सुबह से ही अपने समर्थकों के बीच अपने संसदीय कार्यालय में मौजूद थे.

वहां पर समर्थक उनके समर्थन में नारेबाज़ी कर रहे थे. लेकिन आशीष मिश्रा से पूछताछ शुरू होने के बाद भाजपा और मंत्री अजय मिश्र टेनी के समर्थक पुलिस लाइन्स से दूर ही रहे.

सप्रीम कोर्ट के कड़े रुख़ के बाद ना तो भाजपा या मंत्री टेनी के समर्थकों ने किसी प्रकार का वर्चस्व दिखाया औ ना ही शक्ति प्रदर्शन किया. आशीष मिश्रा को गिरफ़्तार किया जाएगा या नहीं ये अभी पुलिस ने स्पष्ट नहीं किया है.

शनिवार को क्राइम ब्रांच के छोटे से दफ़्तर के बाहर मीडिया का बड़ा हुजूम है. दफ़्तर पुलिस लाइन्स में होने के कारण यहां आशीष मिश्रा के समर्थक नहीं जुट पाए हैं. यहां भारी संख्या में पुलिस और सशस्त्र बल के जवानों को तैनात किया गया है.

शनिवार की छुट्टी के कारण कचहरी बंद है और अटकलें लगाई जा रही हैं जी अगर आशीष मिश्रा की गिरफ़्तारी होती है तो उन्हें रिमांड मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जा सकता है. पुसिस की तरफ़ से सुबह से कोई बयान जारी नहीं हुआ है.

इससे पहले पुलिस इस घटना में शामिल दो अभियुक्तों को गिरफ़्तार कर चुकी है. दोनों ही केंद्रीय मंत्री के समर्थक हैं.

आशीष मिश्रा के पुलिस के सामने पेश होने के बाद पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धु ने अपना धरना समाप्त कर दिया है. सिद्धू बीती शाम हिंसा में मारे गए पत्रकार रमन कश्यप के घर धरने पर बैठ गए थे. उन्होंने आशीष मिश्रा की गिरफ़्तारी की मांग की थी.

क्या है मामला?

तीन अक्तूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर ज़िले के तिकुनिया क़स्बे में उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का विरोध कर रहे किसानों पर बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा से जुड़े लोगों ने गाड़ियां चढ़ा दी थीं.

इस घटना में चार किसानों की कारों से कुचलने से मौत हुई थी. एक पत्रकार की भी कार से कुचलने से मौत हुई थी जबकि मौक़े पर मौजूद भीड़ ने कारों में सवार तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी. कुल आठ लोग इस हिंसा में मारे गए थे.

किसान नेता राकेश टिकैत घटना के बाद लखीमपुर खीरी पहुंचे थे और अगले दिन चार अक्तूबर को यूपी सरकार और किसानों के बीच समझौता हुआ था जिसके तहत सरकार मारे गए किसानों के परिवारों को 45 लाख रुपए का मुआवज़ा देने के लिए भी राज़ी हुई थी. इस समझौते के बाद लखीमपुर में किसानों का प्रदर्शन समाप्त हो गया था.

'समझौता पैसों का नहीं, गरिफ़्तारी का है'

दिल्ली में हुई प्रेस वार्ता के बाद बीबीसी संवाददाता सलमान रावी से बात करते हुए किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा, "हमने सरकार को एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई करने का समय दिया था. समझौता पैसों का नहीं है, समझौता मंत्री की गिरफ़्तारी का है."

बीबीसी से बातचीत में टिकैत ने कहा, "जो मंत्री हैं, वो अपना इस्तीफ़ा दें, मंत्री पर साज़िश का मुक़दमा दर्ज है. जब तक गृह राज्य मंत्री अपने पद पर है, कोई पुलिस अधिकारी उनसे पूछताछ करने की हिम्मत नहीं जुटा पाएगा. जब वो पद से हट जाएंगे, पुलिस उन्हें गिरफ़्तार करेगी और रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी तो सच सामने आएगा."

लखीमपुर खीरी की घटना के बाद विपक्ष के नेताओं ने वहां पहुंचने की कोशिश की थी लेकिन यूपी सरकार ने सभी को रोक दिया था. कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी को सीतापुर गेस्ट हाउस में रखा गया था. लेकिन राकेश टिकैत को बिना रोकटोक के लखीमपुर जाने दिया गया था.

जब उनसे पूछा गया कि सरकार ने सिर्फ़ उन्हें ही क्यों जाने दिया तो उन्होंने कहा, "यदि मेरी इतनी बात चलती तो मैं किसानों के साथ समझौता ही ना करवा देता."

जब उनसे पूछा गया कि अभी एक सप्ताह का समय पूरा नहीं हुआ है ऐसे में किसान मोर्चा ने नए प्रदर्शनों का एलान क्यों किया तो इस सवाल पर टिकैत ने कहा, "12 अक्तूबर को मृतकों की रस्म पगड़ी का कार्यक्रम होना है, इस दौरान सभी किसान नेता इकट्ठा होंगे. हम सरकार को बता रहे हैं कि यदि हमारी मांगे नहीं मानी गईं तो हम आगे क्या-क्या कर सकते हैं."

किसान आंदोलन का भविष्य

किसान बीते दस महीनों से तीन कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे हैं. किसानों ने दिल्ली की सरहदों पर डेरा डाला हुआ है और सड़कें जाम कर रखी हैं.

सरकार से आंदोलन को लेकर समझौता क्यों नहीं हो पा रहा है इस सवाल पर टिकैत ने कहा, "सरकार ज़िद पर अड़ी है, किसान ज़िद पर नहीं अड़े हैं. सरकार कहती है कि क़ानून वापस नहीं होंगे, कोई सुझाव हों तो आप आकर बात करो, इसका मतलब है कि स्क्रिप्ट लिख ली है सिर्फ उन्हें उस पर किसानों के हस्ताक्षर चाहिए. हम इस पर बातचीत करने नहीं जाएंगे. यदि सरकार को कई पक्ष रखना है तो पक्ष रखे, अपना फैसला हमें ना सुनाए, हम उस फ़ैसले पर हस्ताक्षर करने नहीं जाएंगे."

लंबे वक्त से चल रहे किसानों के आंदोलन को लेकर राकेश टिकैत ने कहा, "हम संघर्ष से समस्या के समाधान की तरफ जा रहे हैं लेकिन सरकार इसे उलझा रही है. सरकार किसानों से बात करने के लिए जिसे भेजें अगर उसे पावर दे कर भेजें तो मुद्दों पर फ़ैसला हो सकेगा."

किसान आंदोलन का भविष्य क्या हो सकता है? इस सवाल पर टिकैत ने कहा, "किसान इंतेज़ार करेगा. किसान अपने खेत में बीज डालता है, बारिश का इंतज़ार करता है. बारिश नहीं होती वो फिर भी इंतज़ार करता है. किसान तो बारह साल तक इंतज़ार कर लेता है. किसान को समझना चाहिए कि किसान था, है और रहेगा, लेकिन सरकारें बदल जाती हैं."

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