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मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जाति जनगणना से पल्ला झाड़ा- प्रेस रिव्यू
भारत की क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टियां केंद्र की मोदी सरकार पर जाति जगगणना का दबाव डाल रही हैं लेकिन गुरुवार को सरकार इससे पल्ला झाड़ती दिखी.
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने कहा है कि पिछड़े वर्गों की जाति गणना प्रशासनिक रूप से बहुत कठिन और जटिल है. अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के इस जवाब को पहले पन्ने पर जगह दी है.
महाराष्ट्र राज्य की याचिका का जवाब देते हुए केंद्र ने ये बात कही है. जाति जनगणना की बढ़ती मांग को लेकर सत्ताधारी बीजेपी अब तक चुप थी. केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में अपने जवाब में कहा है कि आज़ादी से पहले भी जब जातियों की गिनती हुई तो डेटा की संपूर्णता और सत्यता को लेकर सवाल उठते रहे.
केंद्र ने कहा कि 2011 में सामाजिक-आर्थिक और जातीय जनगणना के डेटा में तमाम तरह की तकनीकी खामियां हैं और ये किसी भी तरह से इस्तेमाल के लिए अनुपयोगी हैं.
2011 की जनगणना में जाति आधारित सामाजिक आर्थिक स्थिति के ब्यौरे को मोदी सरकार ने जारी नहीं किया था. इसके अलावा ओबीसी के भीतर नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण को लेकर कम प्रभुत्व वाली जातियों की स्थिति देखने के लिए बनाई गई जी रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट भी नहीं आई है जबकि 2017 में इस कमीशन को बनाने के बाद से 11 बार एक्सटेंशन दिया जा चुका है.
क्षेत्रीय पार्टियों में समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की मांग है कि बीजेपी ओबीसी की सही तादाद बताए और उसके बाद आरक्षण की 50 फ़ीसदी की सीमा को बढ़ाए. बीजेपी इसे नहीं मानेगी तो इनके लिए यह कहने में आसानी होगी कि बीजेपी अन्य पिछड़ी जातियों के साथ धोखा कर रही है जबकि उनके ही वोट से सत्ता में पहुँची है.
सामाजिक न्याय और सशक्तीकरण मंत्रालय ने अदालत में अपने हलफनामे में कहा है, ''पहले भी इस मुद्दे को देखा गया था. उस दौरान भी यही लगा कि पिछड़े वर्गों की जातीय गिनती प्रशासनिक रूप से बहुत जटिल और कठिन है. इसके डेटा की संपूर्णता और सत्यता में काफ़ी दिक़्क़तें हैं. 2011 के सोशियो-इकनॉमिक कास्ट सेंसस (एसईसीसी) की नाकामी इसका सबूत है. अपनी खामियों के कारण यह हमारे लिए अनुपयोगी है और हम किसी भी काम में इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते.''
केंद्र ने कहा कि जातिवार जनगणना की नीति 1951 में छोड़ दी गई थी. तब कहा गया था कि आधिकारिक नीति जातियों को प्रोत्साहित करना नहीं है. 2021 की जनगणना में जातियों के डेटा संग्रह जुटाने पर केंद्र ने कहा कि इसके लिए जनगणना कोई आदर्श ज़रिया नहीं है. जातियों की गिनती से जनगणना की बुनियादी समग्रता भी गंभीर ख़तरे में पड़ सकती है. इससे आबादी की मौलिक गिनती भी प्रभावित होगी.
केंद्र ने कहा कि 2021 की जनगणना में जातियों की गिनती शामिल करने की मांग मुश्किल है क्योंकि अब बहुत देरी हो चुकी है. जनगणना की तैयारी चार साल पहले ही शुरू हो जाती है. 2021 की जनगणना के चरण निर्धारित किए जा चुके हैं. इसकी तैयारी पहले ही की जा चुकी है. जनगणना के सवाल अगस्त-सितंबर 2019 में ही फाइनल किए जा चुके थे.
कैप्टन अमरिंदर को लेकर बीजेपी का उमड़ता प्यार
पंजाब में लंबे समय तक कांग्रेस में चली कलह के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह को इस्तीफ़ा देना पड़ा. इस इस्तीफ़े के बाद से कैप्टन को लेकर बीजेपी में बढ़ी हुई सहानुभूति देखने को मिल रही है.
पंजाब की कमान जब कैप्टन के पास थी तो बीजेपी लगातार हमलावर रही लेकिन अब कह रही है कि कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह की राजनीतिक हत्या की है. बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस को राष्ट्रवादी नेता अमरिंदर सिंह बर्दाश्त नहीं हुए.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस ने बीजेपी की नई सहानुभूति को प्रमुखता से जगह दी है. अख़बार ने लिखा है कि पंजाब में केंद्र के तीन कृषि बिलों के कारण बीजेपी हाशिए पर है लेकिन कैप्टन के इस्तीफ़े से वो प्रदेश में राजनीतिक प्रासंगिकता हासिल करने की कोशिश कर रही है.
पंजाब में अगले साल चुनाव है. अमरिंदर सिंह की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर पूछे जाने वाले सवाल बीजेपी को अच्छे लग रहे हैं. अमरिंदर सिंह ने सिद्धू की पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और सेना प्रमुख क़मर जावेद बाजवा से कथित दोस्ती को लेकर सवाल उठाए हैं.
इस्तीफ़े के बाद कैप्टन ने कहा है कि सिद्धू को पंजाब का मुख्यमंत्री नहीं बनने देना चाहिए क्योंकि वे राष्ट्रविरोधी और ख़तरनाक हैं. कैप्टन ने कहा था, ''हम सबने देखा है कि सिद्धू इमरान ख़ान और जनरल बाजवा को गले लगा रहे थे और उनकी तारीफ़ कर रहे थे. दूसरी तरफ़ हमारे सैनिक सरहद की रक्षा में शहादत दे रहे थे.''
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ''हरियाणा के गृह मंत्री अनिल विज, बीजेपी महासचिव तरुण चुघ, पंजाब बीजेपी प्रमुख अश्विनी शर्मा से लेकर उत्तराखंड से बीजेपी सांसद अनिल बलुनी तक ने कहा है कि कैप्टन का सिद्धू पर सवाल जायज़ है.
ये भी दिलचस्प है कि अमरिंदर सिंह ने बीजेपी के ख़िलाफ़ इस्तीफ़े के बाद कुछ भी नहीं बोला है. राजनीति हलकों में यह चर्चा गर्म है कि क्या कैप्टन बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. गुरुवार को अनिल विज ने अमरिंदर सिंह को राष्ट्रवादी कहा था. उन्होंने कहा था कि राष्ट्रवादी अमरिंदर सिंह कांग्रेस के गेमप्लान में बाधा थे, इसलिए उनके साथ साज़िश की गई.''
बिहार में पंचायत चुनाव के लिए आज पहले चरण का मतदान
बिहार में आज पंचायत चुनाव के लिए पहले चरण का मतदान शुरू हो गया है. कड़ी सुरक्षा के बीच 10 से ज़्यादा ज़िलों में 4,647 पदों के लिए मतदान हो रहा है.
अंग्रेज़ी अख़बार हिन्दुस्तान टाइम्स ने इस ख़बर को प्रमुखता से जगह दी है. अख़बार के अनुसार, 14,000 लोगों को कैमूर, रोहतास, गया, नवादा, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, मूंगेर, जमुई और बांका के 2,119 मतदान केंद्रों पर तैनात किया गया है.
मतदान में बैलेट पेपर और ईवीएम दोनों का इस्तेमाल किया जा रहा है.
बिहार के चुनाव आयुक्त दीपक प्रसाद ने कहा था कि मतदान 11 चरणों में संपन्न होगा और आख़िरी मतदान 12 दिसंबर को है. उन्होंने कहा था कि मतगणना मतदान के अगले ही दिन होगी और ये हर चरण के मतदान में ऐसा ही होगा. 6.39 करोड़ मतदाता मतदान में हिस्सा ले सकते हैं.
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