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जाति जनगणना: 'मंडल राजनीति के तीसरे अवतार' की दस्तक या बीजेपी के लिए चक्रव्यूह?- प्रेस रिव्यू
संसद का मॉनसून सत्र लगभग हंगामे के नाम रहा. लोकसभा तो दो दिन पहले ही स्थगित कर दी गई जबकि 13 जुलाई को मॉनसून सत्र ख़त्म होना था. लेकिन मॉनसून सत्र के अवसान से पहले 127वें संविधान संशोधन बिल, 2021 पर हुई बहस देश की राजनीति में आने वाले नए बदलाव का संकेत देती है.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिन्दू ने इसे लेकर ही एक न्यूज़ विश्लेषण छापा है. संसद के दोनों सदनों में 127वाँ संविधान संशोधन बिल, 2021 सर्वसम्मति से पास हो गया. इस बिल का किसी भी पार्टी ने विरोध नहीं किया.
राजनीतिक पार्टियों के भीतर से जाति आधारित जनगणना कराने की मांग ज़ोर पकड़ रही है. यहाँ तक कि सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के सहयोगी दल भी इसकी मांग कर रहे हैं. द हिन्दू ने अपने विश्लेषण में लिखा है, ''इससे पता चलता है कि अन्य पिछड़ी जातियों की आबादी का दायरा बड़ा है और आरक्षण की 50 फ़ीसदी की सीमा टूट सकती है.
जाति आधारित जनगणना और आरक्षण की 50 फ़ीसदी सीमा तोड़ने की मांग को 'द हिन्दू' ने मंडल राजनीति का तीसरा अवतार बताया है. कहा जा रहा है कि मंडल राजनीति का यह तीसरा अवतार दस्तक देने वाला है.
1990 के दशक में मंडल कमीशन लागू होने के बाद जिन क्षेत्रीय पार्टियों का उदय हुआ वे इन माँगों को मज़बूती से उठा रही हैं.
'द हिन्दू' ने अपने विश्लेषण में लिखा है, ''पिछले कुछ चुनावों में, ख़ासकर उत्तर प्रदेश और बिहार में, इन क्षेत्रीय पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी के सफल चुनावी अभियानों को देखा है. ओबीसी में प्रभुत्व वाली जातियों के बदले जिनका प्रभुत्व नहीं रहा है, उन्हें तवज्जो देना, ऊंची जातियों और ओबीसी-एससी में ग़ैर-प्रभुत्व वाली जातियों का एक शक्तिशाली गठबंधन बनाना, बीजेपी की अहम चुनावी रणनीति रही है.''
''टिकट बाँटने, मंत्री बनाने और कुछ विधायी हस्तक्षेप को देखें तो लगता है कि बीजेपी ने मंडल राजनीति के नए वर्जन को मैनेज किया है. बीजेपी ने इस प्रबंधन में हिन्दुत्व की राजनीति को भी साथ रखा है.''
''2011 की जनगणना में जाति आधारित सामाजिक आर्थिक स्थिति के ब्यौरे को मोदी सरकार ने जारी नहीं किया था. इसके अलावा ओबीसी के भीतर नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण को लेकर कम प्रभुत्व वाली जातियों की स्थिति देखने के लिए बनाई गई जी रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट भी नहीं आई है जबकि 2017 में इस कमीशन को बनाने के बाद से 11 बार एक्सटेंशन दिया जा चुका है.
क्षेत्रीय पार्टियों में समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की मांग है कि बीजेपी ओबीसी की सही तादाद बताए और उसके बाद आरक्षण की 50 फ़ीसदी की सीमा को बढ़ाए. अगर बीजेपी इसे नहीं मानती है तो इनके लिए यह कहने में आसानी होगी कि बीजेपी अन्य पिछड़ी जातियों के साथ धोखा कर रही है जबकि उनके ही वोट से सत्ता में पहुँची है.
इसके अलावा मंडलवादी पार्टियाँ सामान्य जातियों में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए जो 10 फ़ीसदी आरक्षण दिया गया है, उसमें उप-वर्गीकरण की ओर इशारा कर रही हैं. क्षेत्रीय पार्टियों ने स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि बीजेपी ने ओबीसी को लेकर जो क़दम उठाए हैं, उसे ऊंची जातियों को अपने पक्ष में रखने के लिए संतुलित किया है. बीजेपी में बड़ी संख्या में ओबीसी सांसद हैं, लेकिन ऊंची जातियों की भावना की उपेक्षा नहीं की गई है, ख़ास कर उत्तर प्रदेश में जहाँ इनका वोट क़रीब 18 से 20 फ़ीसदी है.
बीजेपी के लिए मुश्किल स्थिति
द हिन्दू ने लिखा है कि बीजेपी के लिए यह जटिल स्थिति है. पार्टी के सांसदों का कहना है कि नौकरियों में आरक्षण को लेकर उप-वर्गीकरण से सुधार किया जा सकता है. अख़बार से एक पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान सांसद ने कहा कि यह अपरिहार्य स्थिति है. यह अच्छा होगा कि पार्टी कुछ क़दम उठाए. ऐसी अटकलें हैं कि 2021 की जनगणना जाति आधारित हो सकती है. बीजेपी इस जटिल मांग से निपटने के लिए थोड़ा वक़्त ले सकती है ताकि सोशल इंजीनियरिंग को अपनी तरफ़ मोड़ा जा सके.
तालिबान 90 दिनों के भीतर काबुल पर नियंत्रण कर सकता है: अमेरिकी इंटेलीजेंस
तालिबान अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल को 30 दिनों के भीतर अलग-थलग कर सकता है और 90 दिनों में अपने कब्ज़े में ले लेगा. ये बात अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कही है. रॉयटर्स की ये ख़बर आज भारत के लगभग सभी अख़बारों में छपी है.
तालिबान ने पिछले कुछ दिनों में नौ प्रांतीय राजधानियों को अपने नियंत्रण में लिया है. तालिबान की इस तेज़ गति से अमेरिकी अधिकारी हैरान हैं. ईयू के एक सीनियर अधिकारी ने मंगलवार को कहा कि तालिबान के नियंत्रण में 65 फ़ीसदी अफ़ग़ानिस्तान है और 11 प्रांतीय राजधानियों को अपने नियंत्रण में ले चुका है या ये राजधानियाँ नियंत्रण में आने वाली हैं. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि तालिबान अफ़ग़ानिस्तान में तेज़ी से सत्ता पर नियंत्रण की ओर बढ़ रहा है.
31 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान में अमेरिका का सैन्य मिशन 20 सालों बाद पूरी तरह से ख़त्म हो जाएगा. बुधवार को तालिबान ने उत्तर-पूर्वी प्रांत बदख़्शां प्रांत की राजधानी फ़ैज़ाबाद को अपने कब्ज़े में लिया. एक हफ़्ते से भी कम वक़्त में तालिबान के नियंत्रण में आठ प्रांतीय राजधानियाँ आ गई हैं.
'तेज प्रताप के बयान से नाराज़ हैं बिहार आरजेडी प्रमुख'
दैनिक जागरण की एक ख़बर के अनुसार राष्ट्रीय जनता दल के बिहार प्रमुख जगदानंद सिंह पार्टी से नाराज़ चल रहे हैं. अख़बार ने लिखा है कि सामान्य दिनों में भी पार्टी दफ़्तर आकर बैठने वाले जगदानंद सिंह ने पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बना ली है.
अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि जगदानंद सिंह लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप के बयान से नाराज़ हैं. अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार जगदानंद सिंह ने बयान से नाराज़ होकर इस्तीफ़े की पेशकश की थी, लेकिन बाद में उन्हें मना लिया गया था.
अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार तेज प्रताप ने छात्र राजद के कार्यक्रम में जगदानंद सिंह की तुलना हिटलर से की थी. अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि जगदानंद सिंह लालू और तेजस्वी के विश्वस्त हैं, लेकिन तेजप्रताप के निशाने पर रहते हैं. जगदानंद सिंह आरजेडी और लालू प्रसाद यादव के वफ़ादार तब भी रहे जब पार्टी काफ़ी मुश्किलों में रही.
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