पंजाब: बीजेपी में जाएंगे या नई पार्टी बनाएंगे? अब क्या करेंगे कैप्टन अमरिंदर सिंह?

    • Author, अनंत प्रकाश
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

कांग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बीते शनिवार पंजाब के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देने के बाद कांग्रेस पार्टी से लेकर नवजोत सिंह सिद्धू पर ज़ोरदार हमला बोला है.

अमरिंदर सिंह ने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को इस्तीफ़ा देने के बाद अपने इरादे स्पष्ट कर दिए हैं.

सिद्धू पर बात करते हुए अमरिंदर सिंह ने कहा, "ये कांग्रेस पार्टी का फ़ैसला है अगर वे उसे (नवजोत सिंह सिद्धू) पंजाब मुख्यमंत्री का चेहरा बनाते हैं तो मैं इसका विरोध करूंगा क्योंकि ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है. मैं जानता हूं पाकिस्तान के साथ इसके (नवजोत सिंह सिद्धू) कैसे संबंध हैं."

उन्होंने कहा कि "सिद्धू तो बाजवा के साथ है, इमरान ख़ान के साथ है. रोज़ कश्मीर में हमारजवान मारे जा रहे हैं. आपको लगता है मैं सिद्धू (नवजोत सिंह सिद्धू) के नाम को स्वीकार करूंगा?"

कैप्टन अमरिंदर ने दावा किया कि नवजोत सिंह सिद्धू का लक्ष्य निश्चित रूप से मुख्यमंत्री बनना ही है.

उन्होंने एक मंत्री रूप में किए गए सिद्धू के काम पर भी सवाल उठाया.

अमरिंदर सिंह ने कहा, "वो (नवजोत सिंह सिद्धू) मेरा मंत्री था और उसे निकालना पड़ा. सात महीने तक अपनी फाइलें क्लियर नहीं की. क्या इस तरह का व्यक्ति जो एक विभाग नहीं संभाल सकता वो एक राज्य संभाल सकता है?"

यह बयान देकर जहां एक ओर कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सिद्धू के ख़िलाफ़ खुलकर मोर्चा खोल दिया है. वहीं, उन्होंने कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के फ़ैसले पर उंगली उठाई है क्योंकि सोनिया गांधी ने ही सिद्धू को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया था.

कैप्टन अमरिंदर सिंह का ये रुख सामने आने के बाद राजनीतिक हल्कों में उनके अगले कदम को लेकर तमाम कयास लगाए जा रहे हैं.

इनमें कांग्रेस पार्टी छोड़ने से लेकर बीजेपी में शामिल होने और नयी पार्टी बनाने जैसे विकल्प शामिल हैं.

क्या कांग्रेस छोड़ेंगे अमरिंदर सिंह?

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस्तीफ़ा देने के बाद कहा है कि उनका अपमान हुआ है. हालांकि, पार्टी छोड़ने को लेकर उन्होंने अब तक स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा है.

उन्होंने कहा है कि "मैं कांग्रेस पार्टी में हूं और अपने साथियों से बात करूंगा. उसके बाद हम आगे की राजनीति के बारे में निर्णय लेंगे. ये उनकी मर्ज़ी है. जिसको मर्ज़ी हो मुख्यमंत्री बनाएं."

इसके साथ ही उन्होंने कहा, "फ्यूचर पॉलिटिक्स हमेशा एक विकल्प होती है और जब मुझे मौका मिलेगा मैं उसका इस्तेमाल करूंगा."

इस मसले पर पहला सवाल ये उठता है कि क्या वह कांग्रेस पार्टी छोड़ सकते हैं?

बीबीसी पंजाबी सेवा के संपादक अतुल संगर मानते हैं कि फिलहाल अमरिंदर सिंह वेट एंड वॉच यानी आराम से सोच समझकर फैसला लेने की रणनीति अपना सकते हैं.

अतुल संगर कहते हैं, "फिलहाल ये लगता है कि वह उस मौके का इंतज़ार करेंगे जो उनके लिए मुफ़ीद हो. इस समय उनके लिए पार्टी में बने रहना कोई मजबूरी नहीं है. क्योंकि पार्टी ने उनसे वो ओहदा छीन लिया जो उनके पास था तो अमरिंदर सिंह की क्या मजबूरी है? अब ये पार्टी की मजबूरी है कि वह किसी तरह सिंह को पार्टी में बनाए रखे."

अमरिंदर सिंह द्वारा नवजोत सिंह सिद्धू के ख़िलाफ़ आक्रामक बयानबाजी की वजह को समझाते हुए संगर कहते हैं, "बीते डेढ़ सालों में जिस तरह सिद्धू ने सार्वजनिक रूप से अमरिंदर सिंह को ज़लील किया है, उनके ख़िलाफ़ जिस भाषा का इस्तेमाल किया है, तो अब कैप्टन अमरिंदर सिंह को जहां-जहां मौका मिलेगा, वह उसका इस्तेमाल करेंगे.

ऐसे में अगर अमरिंदर सिंह को लगता है कि 'राष्ट्रवाद का कार्ड मेरे पास है, मैं एक पूर्व फौजी हूं, मैं पाकिस्तान के ख़िलाफ़ बोलता रहा हूं. मैंने अपने राज्य को पाकिस्तानी तत्वों और आईएसआई के हमलों से सुरक्षित किया है' तो वह ये कार्ड खेलेंगे."

लेकिन सवाल यह भी उठता है कि क्या अमरिंदर सिंह इस मुद्दे पर पंजाब में नवजोत सिंह सिद्धू को घेर पाएंगे?

पंजाब की राजनीति को समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार जगतार सिंह मानते हैं कि पंजाब की राजनीति में राष्ट्रवाद का कार्ड उस तरह काम नहीं करता है, जिस तरह उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश या बिहार में करता है.

उन्होंने कहा, ''पंजाब में लोग पाकिस्तान के साथ शांति चाहते हैं. जबकि सारी जंगे यहीं हुईं लेकिन फिर भी यहां अमृतसर और वहां लाहौर के लोग दोनों मुल्कों के बीच शांति चाहते हैं.''

''पंजाब में सिखों के बीच करतारपुर साहिब कॉरिडोर की वजह से नवजोत सिंह सिद्धू की लोकप्रियता बढ़ी है. ऐसे में ये लगता नहीं कि राष्ट्रवाद कार्ड से कैप्टन अमरिंदर सिंह ज़्यादा नुकसान पहुंचा पाएंगे."

बीजेपी का दामन थाम सकते हैं?

अब बात करते हैं कि क्या कैप्टन अमरिंदर सिंह बीजेपी का दामन थाम सकते हैं?

अमरिंदर सिंह के बयानों के आधार पर ये कयास लगाए जा रहे हैं कि वह बीजेपी में शामिल हो सकते हैं.

पिछले कुछ सालों से बीजेपी मुख्य रूप से राष्ट्रवाद के कार्ड को भुनाती चली आई है.

ऐसे में इस बात की उम्मीद जताई जा रही है कि वह संभवत: बीजेपी में जा सकते हैं क्योंकि उनके आरएसएस और मोदी से सीधे संबंध हैं. लेकिन संगर मानते हैं कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के बीजेपी में शामिल होने की बात सोचना काफ़ी दूर की कौड़ी है.

वह कहते हैं, "ये काफ़ी मुश्किल है और इसकी कई वजहें हैं. एक वजह तो यही है कि बीजेपी ने अब तक कोई पेशकश नहीं की है. बीजेपी इसके लिए मजबूर भी नहीं है. उसे ये पता है कि उसने अब तक पंजाब में अपने दम पर सरकार नहीं बनाई है और उसकी ऐसी मंशा भी नहीं है.

ऐसे में देखना ये होगा कि क्या बीजेपी इस मोड में आती है. क्योंकि ऐसा करने के लिए उसे पंजाब में काफ़ी रियायतें देनी होंगी. अमरिंदर अपने लोगों को जगह दिलवाएंगे. सेटअप अमरिंदर का रहेगा."

कैप्टन अमरिंदर सिंह को भारतीय राजनीति के उन चुनिंदा नेताओं में गिना जाता है जो खुलकर अपनी बात रखने के लिए जाने जाते हैं और उनकी ये पहचान बीजेपी के साथ उनके संभावित गठजोड़ को नुकसान पहुंचा सकती है.

संगर कहते हैं, "वह दूसरे राज्यों से लेकर राष्ट्रीय मुद्दों पर बयानबाजी भी करेंगे. ऐसे में ये आसान नहीं है. कहने को कहा जा सकता है कि वह जा सकते हैं लेकिन इतना आसान नहीं है.''

''क्या बीजेपी ये हजम कर पाएगी कि वह पंजाब से बैठकर आलोचनात्मक टिप्पणियां करें? क्या अमरिंदर सिंह खुद हजम कर पाएंगे? ऐसे में इस संभावना पर कई प्रश्नचिह्न लगे हुए हैं."

वहीं, जगतार सिंह पंजाब में बीजेपी की स्थिति की ओर ध्यान दिलाते हुए कहते हैं, "पंजाब की मौजूदा स्थिति देखी जाए तो यहां किसान आंदोलन एक बहुत बड़ा मुद्दा है. और अगले चुनाव के नतीजों पर इस मुद्दे का स्पष्ट असर दिखेगा.''

''ऐसे में अगर अमरिंदर सिंह बीजेपी में जाना चाहें तो उसका कोई फ़ायदा नहीं होगा क्योंकि बीजेपी तो पहले ही पंजाब में वर्चुअली ख़त्म हो चुकी है. किसान बीजेपी नेताओं को धरने - प्रदर्शन के लिए अपने घरों से होकर गुजरने भी नहीं देते. ऐसे में ये विकल्प तो एक तरह से ख़त्म ही है."

क्या नयी पार्टी बना सकते हैं अमरिंदर सिंह?

अमरिंदर सिंह को लेकर एक कयास यह भी लगाया जा रहा है कि वह एक काफ़ी लोकप्रिय नेता हैं और इस घटनाक्रम के बाद वह अपनी पार्टी खड़ी कर सकते हैं.

पंजाब में एक लंबे समय से राजनीतिक खालीपन की स्थिति है जिसमें एक नयी पार्टी पनप सकती है.

आम आदमी पार्टी पिछले कुछ समय से इसी जगह में खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रही है लेकिन उसके पास ऐसा चेहरा नहीं है जिसे लोग पूरे पंजाब में जानते हैं.

ऐसे में इस बात की संभावना जताई जा रही है कि अलग -अलग दलों के बाग़ी साथ आकर एक नया दल गठित कर सकते हैं.

मगर जगतार सिंह मानते हैं कि इस संभावना में बल नहीं है.

वह कहते हैं, "अमरिंदर सिंह के राजनीतिक भविष्य से जुड़ी संभावनाओं पर बात करते हुए ये याद रखा जाना चाहिए कि वह एक 79 वर्षीय राजनेता हैं. पिछले चार सालों से वह एक नॉन-फंक्शनल चीफ़ मिनिस्टर की भूमिका में थे.

''कुल जमा विकल्पों को देखें तो बीजेपी में जाने से उन्हें कोई फायदा नहीं होगा, अकाली में जाएंगे नहीं, आम आदमी पार्टी को उनसे कोई फायदा नहीं है और नयी पार्टी बनाने की स्थिति में वह दिखाई नहीं पड़ते. ''

''ऐसे में उनकी उम्र को ध्यान में रखकर कहा जा सकता है कि अमरिंदर सिंह ने अपने राजनीतिक सफर में ढलान की ओर कदम बढ़ा दिए हैं. अगर वह 79 साल के ना होते तो ये बात नहीं कही जा सकती है. लेकिन एक मूल समस्या ये है कि क्या वह इस उम्र में एक नयी पार्टी खड़ी कर पाएंगे."

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)