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चरणजीत सिंह चन्नी होंगे पंजाब के मुख्यमंत्री, दलित-सिख चेहरा कांग्रेस का 'मास्टरस्ट्रोक'?
चरणजीत सिंह चन्नी पंजाब के नए मुख्यमंत्री होंगे. कांग्रेस के पंजाब प्रभारी हरीश रावत ने चरणजीत सिंह चन्नी के नाम का एलान किया है. सोमवार की सुबह 11 बजे उनका शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा.
उन्होंने बताया कि चन्नी को आम सहमति से विधायक दल का नेता चुन लिया गया है.
भारी उलटफेर और तीन नामों के सामने आने के बाद चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर मुहर लगी. वे पंजाब के पहले दलित मुख्यमंत्री होंगे.
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनके नाम की घोषणा के बाद उन्हें नई ज़िम्मेदारी के लिए बधाई देते हुए ट्वीट किया, "निश्चित तौर पर हमें पंजाब के लोगों से किए वादे पूरा करना जारी रखना चाहिए. उनका भरोसा हमारे लिए सबसे अहम है."
बीते कुछ समय से पंजाब में दलित नेताओं के शीर्ष भूमिका में आने की बात हो रही थी.
बीबीसी पंजाबी सेवा के संवाददाता अरविंद छाबड़ा के मुताबिक़ चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया जाना एक 'मास्टरस्ट्रोक' के तौर पर देखा जा रहा है.
हरीश रावत ने ट्वीट किया कि मुझे यह घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है कि चरणजीत सिंह चन्नी को सर्वसम्मति से पंजाब कांग्रेस विधायक दल का नेता चुना गया है.
इसके बाद चरणजीत सिंह चन्नी ने पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित से मुलाक़ात की और अपना समर्थन पत्र सौंपा.
इस दौरान राजभवन के बाहर उनके समर्थक झूमते हुए दिखे.
राज्यपाल से मुलाक़ात के बाद ख़ुद चरणजीत सिंह चन्नी ने पत्रकारों को बताया कि सोमवार की सुबह 11 बजे शपथ ग्रहण होगा.
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दी चन्नी को बधाई
अमरिंदर सरकार में चन्नी रोज़गार मंत्री थे. चन्नी रूपनगर ज़िले के चनकौर साहिब विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक हैं. चन्नी 2015-16 में विपक्ष के नेता रह चुके हैं.
चन्नी कैप्टन अमरिंदर सिंह के धुर विरोधी माने जाते हैं और वे उन लोगों में से थे जिन्होंने नवजोत सिंह सिद्धू को अध्यक्ष बनाया.
उनके नाम के एलान के बाद कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें अपनी शुभकामनाएं दी हैं. उन्होंने कहा, "चरणजीत सिंह चन्नी को मेरी शुभकामनाएं. मुझे उम्मीद है कि वह पंजाब को सुरक्षित रखने और सीमा पार से बढ़ते सुरक्षा ख़तरे से हमारे लोगों की रक्षा करने में सक्षम होंगे."
इससे पहले शनिवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. लंबे समय से पंजाब में कांग्रेस के भीतर गुटबाजी के बीच शनिवार को उनका इस्तीफ़ा आया.
उन्होंने अपने इस्तीफ़े का एलान करते वक़्त कहा कि पार्टी उनके नेतृत्व पर बार-बार संदेह कर रही है और वो ख़ुद को अपमानित महसूस कर रहे हैं.
इसके बाद कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि वे नवजोत सिंह सिद्धू को सीएम नहीं बनने देंगे क्योंकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल बाजवा से दोस्ताना सम्बन्ध हैं.
अमरिंदर सिंह ने यह भी कहा था कि अगर सिद्धू को पंजाब का मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो वो देशहित में इसका विरोध करेंगे.
पंजाब में अगले साल फ़रवरी महीने में विधानसभा के चुनाव होने हैं.
24 घंटे से चल रही थी माथापच्ची
कांग्रेस पार्टी में पंजाब के मुख्यमंत्री पद को लेकर कुछ नामों पर बीते 24 घंटों से माथापच्ची चल रही थी. कुछ नाम उभर कर भी आए. उनमें से एक सुखजिंदर रंधावा का रहा. उन्होंने चरणजीत चन्नी के नाम की घोषणा के बाद मीडिया से कहा, "मैं नए मुख्यमंत्री का स्वागत करता हूं."
उन्होंने कहा, "यह आलाकमान का फ़ैसला है. मैं सुप्रीम कमान के फ़ैसले को स्वीकार करता हूं. मैं बिल्कुल भी निराश नहीं हूं."
इस बीच अंबिका सोनी जब राहुल गांधी के घर पहुंची तो उनके नाम की चर्चा होने लगी. बताया गया कि उन्हें मुख्यमंत्री के पद की पेशकश की गई थी. लेकिन उन्होंने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से कहा कि, "मैंने इनकार कर दिया है. मेरा मानना है कि पंजाब में एक सिख ही मुख्यमंत्री होना चाहिए. क्योंकि पंजाब पूरे देश में एकमात्र सिख बहुल राज्य है."
सूत्रों के मुताबिक इससे पहले मुख्यमंत्री के नाम पर फ़ैसले को लेकर जहां गांधी परिवार और कैप्टन के समर्थक सुनील जाखड़ के पक्ष में नज़र आए, वहीं कांग्रेस आलाकमान को चिंता थी कि अकाली दल 1984 की घटनाओं का हवाला देकर कांग्रेस के ख़िलाफ़ अभियान शुरू कर सकता है.
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