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भबानीपुर उप-चुनावः बीजेपी की प्रियंका टिबरीवाल, ममता बनर्जी को कितनी टक्कर दे पाएंगी
- Author, टीम बीबीसी हिन्दी
- पदनाम, नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल की भबानीपुर विधानसभा सीट पर 30 सितंबर को मतदान होगा और 3 अक्तूबर को यहां वोटों की गिनती की जाएगी.
2021 विधानसभा चुनावों में भबानीपुर को छोड़कर नंदीग्राम में शुभेंदु अधिकारी के सामने लड़कर हारने वाली ममता बनर्जी के लिए उनकी इस पारंपरिक सीट को खाली किया गया है.
दक्षिण कोलकाता की इस विधानसभा सीट पर ममता के सामने कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं उतारने का फ़ैसला किया है. वामदलों ने भी यहां कमज़ोर उम्मीदवार ही उतारा है.
वहीं बीजेपी की तरफ़ से पश्चिम बंगाल में बीजेपी की प्रवक्ता और महिला मोर्चा की नेता प्रियंका टिबरीवाल ममता बनर्जी को टक्कर दे रही हैं
प्रियंका टिबरीवाल पश्चिम बंगाल में बीजेपी का जाना-पहचान चेहरा तो हैं, लेकिन इससे पहले कोई चुनाव नहीं जीता है.
क्यों हो रहा है भबानीपुर में चुनाव?
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को बड़ी जीत दिलाने वाली ममता बनर्जी खुद नंद्रीग्राम विधानसभा सीट से बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी से चुनाव हार गईं थीं.
ममता ने 05 मई को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के पद की शपथ ली थी. इस पद पर बने रहने के लिए उनके लिए छह महीने के भीतर विधानसभा चुनाव जीतना जरूरी है.
मई में ही भबानीपुर सीट से चुने गए टीएमसी नेता शोभन देव चट्टोपाध्याय ने अपनी सीट से इस्तीफ़ा दे दिया था ताकि ममता एक बार फिर यहां से चुनाव जीत सकें.
ममता बनर्जी भबानीपुर से दो बार विधानसभा चुनाव जीत चुकी हैं. उन्होंने यहां 2011 में उप-चुनाव जीता था और इसके बाद 2016 में भी चुनाव जीता था.
शुभेंदु अधिकारी को चुनौती देने के लिए वो अपनी सीट छोड़कर नंदीग्राम चली गईं थीं जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
कौन हैं प्रियंका टिबरीवाल?
बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में अपनी प्रवक्ता और महिला मोर्चा की नेता प्रियंका टिबरीवाल को ममता बनर्जी के ख़िलाफ़ मैदान में उतारा है.
टिबरीवाल पेशे से अधिवक्ता हैं और पश्चिम बंगाल में बीजेपी का जाना पहचाना चेहरा हैं. वो दो बार चुनाव लड़ चुकी हैं और दोनों ही बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
उन्होंने पहला चुनाव 2015 में कोलकाता नगर निगम के लिए लड़ा था जो वो हार गईं थीं. इसी साल अप्रैल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में वो एंटाली सीट से लड़ीं थीं और टीएमसी के स्वर्ण कमल साहा से 58,257 वोटों से हार गईं थीं.
मूल रूप से मारवाड़ी समुदाय से आने वाली प्रियंका टिबरीवाल हिंदी भाषी हैं लेकिन वो बंगाली भी अच्छी बोल लेती हैं. विश्लेषक मानते हैं कि वो कुछ हद तक ममता बनर्जी को टक्कर ज़रूर दे पाएंगी.
पश्चिम बंगाल में दैनिक जागरण के स्टेट ब्यूरो प्रमुख जयकिशन वाजपेई कहते हैं, "मुझे लगता है कि ममता को वॉकओवर नहीं मिल रहा है. सीपीएम ने अज्ञात चेहरा उतार कर और कांग्रेस ने उम्मीदवार नहीं उतार कर उन्हें ज़रूर वॉकओवर दिया है. लेकिन बीजेपी ने जुझारू उम्मीदवार को उतारा है."
वाजपेई कहते हैं, "बीजेपी ने उपचुनाव के लिए समिति बनाई है, हर वॉर्ड की ज़िम्मेदारी नेताओं को दी है. इससे ज़ाहिर है कि बीजेपी पूरी ताक़त से ये चुनाव लड़ने जा रही है."
प्रियंका टिबरीवाल पश्चिम बंगाल में चुनावों के दौरान हुई हिंसा के मामलों में भी क़ानूनी रूप से सक्रिय रही हैं. उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है और सुप्रीम कोर्ट में भी कैविएट दायर किया है.
वाजपेई कहते हैं, "चुनावी हिंसा के मामलों को लेकर वो हाई कोर्ट तक गई हैं. एक अधिवक्ता के तौर पर वो खासी सक्रिय हैं. उन्होंने एंटाली छोड़कर गए बीजेपी कार्यकर्ताओं की अदालत के आदेश के ज़रिए यहां फिर से वापसी कराई है."
वहीं वरिष्ठ पत्रकार जयंतो घोषाल की राय जयकिशन वाजपेई से अलग है. वो कहते हैं कि प्रियंका भले ही मज़बूती से लड़ेंगी लेकिन ममता को कोई ख़ास टक्कर नहीं दे पाएंगी.
घोषाल कहते हैं, "प्रियंका टिबरीवाल के जीतने की संभावना तो बिलकुल ही कम है. लेकिन इस चुनाव में जीतना ही एकमात्र मकसद नहीं है. इस सीट पर 2016 विधानसभा चुनाव के दौरान बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ा था. जब ममता नंदीग्राम में चली गईं थीं तब बीजेपी ने यही तर्क दिया था कि ममता डरकर नंदीग्राम गई हैं क्योंकि भबानीपुर ममता के लिए एक सुरक्षित सीट नहीं रह गई है. बीजेपी चाहेगी कि इस सीट पर अपने वोट प्रतिशत को बरकरार रखे या बढ़ाए."
घोषाल कहते हैं, "ममता भले ही चुनाव जीत लें लेकिन यदि उन्हें पहले से कम वोट मिलते हैं तो बीजेपी के लिए ये बात करने का विषय बन जाएगा."
प्रियंका टिबरीवाल पश्चिम बंगाल बीजेपी के किसी गुट में भी शामिल नहीं हैं. घोषाल कहते हैं, "पश्चिम बंगाल बीजेपी की अपनी अंदरूनी राजनीति है. यहां नेताओं के गुट हैं लेकिन प्रियंका टिबरीवाल इस गुटबाज़ी से बाहर हैं."
क्या कहता है भबानीपुर सीट का गणित?
दक्षिण कोलकाता की इस सीट पर गैर बांग्लाभाषी अच्छी तादाद में हैं. वरिष्ठ पत्रकार जयकिशन वाजपेई कहते हैं, "यहां ग़ैर बंगाली मतदाता 40-45 फ़ीसदी होंगे. इनमें पंजाबी और मारवाड़ी मूल के लोग बड़ी तादाद में है. यहां मुसलमान वोट भी बीस प्रतिशत के आसपास हैं."
बीजेपी ने पिछले लोकसभा चुनाव में भी यहां बढ़त हासिल की थी. जयकिशन वाजपेई कहते हैं, "भबानीपुर विधानसभा सीट कोलकाता दक्षिण लोकसभा सीट में आती है. 2019 लोकसभा चुनाव में यहां नज़दीकी मुक़ाबला हुआ था. ममता बनर्जी जिस वॉर्ड में रहती हैं उसमें साल 2019 लोकसभा चुनावों में बीजेपी आगे थी."
प्रियंका टिबरीवाल मारवाड़ी मूल की हैं. लेकिन वो भबानीपुर सीट के लिए बाहरी हैं क्योंकि उनका घर एंटाली सीट में हैं. जबकि ममता बनर्जी का निवास भबानीपुर में ही हैं.
विश्लेषक मानते हैं कि ममता इन उप-चुनाव में प्रिंयका टिबरीवाल के बाहरी होने का मुद्दा नहीं बनाएंगी.
जयंतो घोषाल कहते हैं, "प्रियंका भले ही भबानीपुर से बाहर की हो लेकिन ममता बनर्जी के लिए मुद्दा नहीं होगा क्योंकि अब बाहरी या गैर-बंगाली भाषी होना ममता के लिए मुद्दा नहीं है क्योंकि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद ममता भी 2024 से पहले पूरे भारत की नेता के तौर पर उभरना चाहेंगी."
घोषाल कहते हैं, "ममता इस बार सिख, मारवाड़ी और दूसरे वोटरों के पास भी जाएंगी. मुझे नहीं लगता कि ममता बनर्जी प्रियंका के बाहरी होने को मुद्दा बनाएंगी."
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