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नसीरुद्दीन शाह का तालिबान और मुसलमानों पर बयान क्यों बना विवाद का कारण?
अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के तालिबान पर दिए बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया. सोशल माडिया कई लोग उनके बयान का समर्थन कर रहे हैं तो कई उनकी आलोचना.
एक वीडियो में शाह "उन मुसलमानों" की निंदा कर कर हैं जो तालिबान की जीत का जश्न मना रहे हैं. उन्होंने कहा कि ये एक ग़लत मिसाल पेश कर रहा है.
उन्होंने "भारतीय इस्लाम" की तुलना दुनिया के दूसरे हिस्सों में इस्लामी परंपराओं से की. उनके इस बयान से कई मुसलमान नाराज़ हैं और और शाह पर गलत तरीके से तुलना करने का आरोप लगा रहे हैं.
वहीं सत्तारूढ़ बीजेपी के कई समर्थकों ने शाह की तारीफ़ की है.
'मॉर्डन इस्लाम चाहिए या दशकों पुराना'
उर्दू में बोलते हुए, 71 साल के शाह ने कहा कि जो लोग तालिबान की कामयाबी का जश्न मना रहे हैं, उन्हें अपने आप से पूछना चाहिए कि, "उन्हें बदलाव चाहिए, मॉडर्न इस्लाम चाहिए या वो बीते दशकों की बर्बरता के साथ रहना चाहते है."
तालिबान ने 1996 और 2001 के बीच अफ़ग़ानिस्तान को नियंत्रित करते हुए इस्लामी कानूनों को सख़्ती से लागू किया. उस दौर में लोगों को सार्वजनिक फांसियां दी गईं और महिलाओं के स्कूलों और काम पर जाने पर प्रतिबंध लगाया गया.
शाह ने कहा कि "हिंदुस्तानी" या भारतीय इस्लाम हमेशा दुनिया भर के इस्लाम से अलग रहा है, और उन्हें उम्मीद है कि "ख़ुदा वो वक्त न लाए कि वो इतना बदल जाए कि हम इसे पहचान भी न सकें"
उन्होंने कहा, "मैं एक भारतीय मुसलमान हूं... और जैसा कि मिर्ज़ा ग़ालिब एक अरसा पहले फ़रमा गए हैं - मेरा रिश्ता अल्लाह मियां बेहद बेतक्कलुफ़ है. मुझे सियासी मज़हब की कोई ज़रूरत नहीं है."
सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?
पत्रकार सबा नकवी ने शाह की टिप्पणियों को "एक फंसाने वाला जाल" बताया जो अनावश्यक रूप से भारतीय मुसलमानों पर तालिबान को अस्वीकार करने का बोझ डालता है.
"इतने सारे भारतीय मुसलमानों को निंदा करने के लिए क्यों कहा जा रहा है? क्या उन्होंने तालिबान को चुना या आमंत्रित किया है?"
पत्रकार और टिप्पणीकार आदित्य मेनन ने कहा कि "शाह का बयान अनावश्यक" और "दुर्भावनापूर्ण" है.
उन्होंने कहा, "ऐसे समय में जब भारतीय मुसलमान आर्थिक बहिष्कार, भीड़ की हिंसा, पुलिस अत्याचारों का सामना कर रहे हैं, आखिरी चीज़ जो वो चाहते हैं, वो ये है कि एक प्रमुख आवाज़ उन्हें कहे तालिबान मानसिकता समुदाय को अपने कब्जे में ले सकती है. ऐसा कोई खतरा नहीं है"
आलोचकों ने भारत के 20 करोड़ मुसलमानों की हालत को लेकर बार बार चिंता जताई है. आलोचक ये आरोप लगाते रहे हैं कि साल 2014 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के तहत मुसलमानों की स्थिति ख़राब हुई है.
हालांकि, बीजेपी सरकार के समर्थक, फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री ने "अमानवीय और बर्बर तालिबान" के ख़िलाफ़ बोलने के लिए शाह की तारीफ़ की.
उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि अधिक से अधिक शिक्षित और क्रिएटिव मुसलमान, ख़ासतौर पर बॉलीवुड से ताल्लुक रखने वाले, इन दुश्मनों के ख़िलाफ़ बोलेंगे"
2001 में अमेरिकी सेना ने तालिबान को अफ़ग़ानिस्तान से निकाला था, लेकिन इस साल हुए एक समझौते के बाद अमेरिका और दूसरी विदेशी सेनाओं ने अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने का फ़ैसला किया.
इसके बाद 15 अगस्त को तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान को फिर से अपने नियंत्रण में ले लिया.
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