छत्तीसगढ़ में भूपेश बघेल पर क्या प्रियंका और राहुल गांधी बँट गए हैं?- प्रेस रिव्यू

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छत्तीसगढ़ में नेतृत्व को लेकर कांग्रेस में अनिश्चितता बनी हुई है.
शुक्रवार को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के साथ चार घंटे तक चली मुलाक़ात के बाद भी कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की जा सकी.
अंग्रेज़ी अख़बार द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक़ बघेल खेमा फ़िलहाल आश्वस्त लग रहा है.
कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल और पार्टी मामलों के छत्तीगढ़ प्रभारी पीएल पुनिया भी इस मीटिंग में मौजूद थे. मुलाक़ात के बाद भूपेश बघेल ने संवाददाताओं को बताया कि राहुल गांधी ने उनके निमंत्रण पर राज्य सरकार की विभिन्न मोर्चों पर उपलब्धियों को देखने के लिए छत्तीसगढ़ आने की सहमति दी है.
हालांकि भूपेश बघेल से जब पत्रकारों ने ये पूछा कि क्या राहुल गांधी ने उनकी सरकार के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंह देव को ये आश्वासन दिया है कि मुख्यमंत्री पद का कार्यकाल दोनों नेता शेयर करेंगे तो वे उस सवाल को टाल गए.
भूपेश बघेल ने ये दावा किया कि ये मु्द्दा तीन दिन पहले ही मंगलवार को पीएल पुनिया और राहुल गांधी की मुलाक़ात के बाद सुलझ गया था. उन्होंने कहा, "हमारे राज्य प्रभारी पीएल पुनिया ने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण दिया है. जब वे इस पर बोल चुके हैं तो अब मैं क्या कहूं."

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पीएल पुनिया ने कहा था कि राज्य में नेतृत्व में बदलाव पर कोई चर्चा नहीं हुई है. भूपेश बघेल ने कहा कि उस मीटिंग के दौरान राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा हुई थी.
बघेल ने कहा, "मीटिंग के आख़िर में मैंने राहुल गांधी को राज्य की यात्रा पर आने का निमंत्रण दिया है ताकि वे हमारा कामकाज़ देख सकें और उन्होंने इसे सहर्ष स्वीकार किया है. वे अगले हफ़्ते छत्तीसगढ़ आ रहे हैं."
इस सवाल पर कि क्या वे मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे, भूपेश बघेल ने कहा, "मैंने राहुल गांधी को छत्तीसगढ़ आने का निमंत्रण राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में दिया है."
हिंदू अख़बार के मुताबिक़ सूत्रों का कहना है कि राजनीतिक परिस्थितियां फ़िलहाल भूपेश बघेल के पक्ष में दिख रही हैं. वे राहुल और प्रियंका को ये समझाने में कामयाब रहे हैं कि राज्य में पार्टी की भलाई उनके साथ बने रहने में है.
सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी मंगलवार की मीटिंग में दिल्ली में न होने की वजह से शामिल नहीं हो पाई थीं, इसलिए बघेल को उनके मौजूद रहने पर एक बार और दिल्ली आने के लिए कहा गया था.
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी टीएस सिंह देव को दिए वादे से बंधे हुए हैं जबकि प्रियंका गांधी चाहती हैं कि भूपेश बघेल पद पर बने रहें. भूपेश बघेल अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं, इसलिए प्रियंका गांधी का ये मानना है कि उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले नेतृत्व में कोई बदलाव किया गया तो इससे ग़लत संदेश जाएगा.
छत्तीसगढ़ में ओबीसी समूहों की बड़ी आबादी है और बीजेपी भी साल 2023 के चुनाव से पहले किसी भरोसेमंद पिछड़े चेहरे को सामने लाने की कोशिश कर रही है.

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बंगाल में शुभेंदु अधिकारी और दिलीप घोष के बीच 'मतभेद'
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव ख़त्म होने के लगभग चार महीने होने जा रहे हैं लेकिन भाजपा की राज्य इकाई और विधायक दल के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए प्रस्तावित समन्वय समिति का गठन नहीं हो पाया है.
कलकत्ता से छपने वाले टेलीग्राफ़ अख़बार के मुताबिक़ ऐसा बंगाल भाजपा में दिलीप घोष और शुभेंदु अधिकारी धड़ों के बीच जारी मतभेदों की वजह से नहीं हो पाया है.
बीजेपी किसी राज्य में चाहे सत्ता में हो या विपक्ष में, पार्टी के विधायक दल और राज्य इकाई के नेतृत्व के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए एक कोऑर्डिनेशन कमिटी बनाई जाती है.
शुभेंदु अधिकारी 10 मई को भाजपा विधायक दल के नेता चुने गए थे लेकिन अभी तक इस समन्वय समिति का गठन नहीं हो पाया है.
अख़बार का कहना है कि भगवा खेमे में ये बात छुपी नहीं है कि दिलीप घोष और उनका धड़ा तृणमूल कांग्रेस से बीजेपी में आए शुभेंदु अधिकारी और उनकी टीम को पसंद नहीं करता है.
पार्टी की मीटिंग में बंद दरवाज़ों के भीतर दिलीप घोष अपने विधायकों को कई बार ये कह चुके हैं कि कोई फ़ैसला लेने या सार्वजनिक तौर पर कोई कदम उठाने से पहले उन्हें पार्टी से संपर्क करना चाहिए.
सूत्रों का कहना है कि घोष के क़रीबी नेता अधिकारी और उनकी टीम से दूरी बनाकर चलते हैं, इसलिए अभी तक समन्वय समिति का गठन नहीं हो पाया है.

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सुल्तानपुर का नाम भगवान राम के बेटे कुश पर रखा जा सकता है
फ़ैज़ाबाद का नाम अयोध्या करने के बाद अब उसके पड़ोसी ज़िले सुल्तानपुर का नाम जल्द ही हिंदुओं के अराध्य भगवान राम के बेटे कुश के नाम पर 'कुश भवनपुर' रखा जा सकता है.
इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की रिपोर्ट के मुताबिक़ सूत्रों का कहना है कि उत्तर प्रदेश राजस्व बोर्ड ने राज्य सरकार को सुल्तानपुर का नाम बदलने को लेकर एक प्रस्ताव भेजा है और अगली कैबिनेट मीटिंग में इस पर फ़ैसला लिया जा सकता है.
ज़िला गज़ेटियर के ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए सुल्तानपुर ज़िला प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 1300 ईस्वी में ये शहर 'कुश भवनपुर' के नाम से जाना जाता था और अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण के समय तक इस पर भर राजवंश का शासन था. बाद में इस शहर का नाम बदलकर 'सुल्तानपुर' कर दिया गया.
सुल्तानपुर के ज़िलाधिकारी रवीश गुप्त ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, "कुछ महीनों पहले जब हमने ज़िला गज़ेटियर के रिकॉर्ड्स को खंगाला तो देखा कि 1300 ईस्वी के आस-पास अलाउद्दीन खिलजी के शासन के दौरान इस शहर को उसकी फौज ने बर्बाद कर दिया था और तब से सुल्तानपुर के नाम से जाना गया."
उत्तर प्रदेश सरकार ने साल 2018 में फैज़ाबाद शहर का नाम अयोध्या कर दिया था.

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नितिन पटेल: जब तक हिंदू बहुमत में हैं, संविधान और क़ानून तभी तक रहेंगे
गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने शुक्रवार को कहा कि संविधान, धर्मनिरपेक्षता और क़ानून के बारे में तभी तक बातें होंगी जब तक कि हिंदू बहुमत में रहेंगे और जैसे ही ये समुदाय अल्पसंख्यक हो जाएगा, कुछ बाक़ी नहीं रहेगा.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़ नितिन पटेल ने ये बात गांधीनगर के भारत माता मंदिर में कही. इस मंदिर को राज्य में भारत माता का पहला मंदिर माना जाता है.
मंदिर में विश्व हिंदू परिषद द्वारा आयोजित मूर्ति प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान उन्होंने कहा, "हमारे देश में कुछ लोग संविधान, धर्मनिरपेक्षता के बारे में बात करते हैं. लेकिन मैं आपको ये बताना चाहता हूं कि... और अगर आप इसे वीडियो रिकॉर्ड करना चाहते हैं तो आप कीजिए.... मेरे शब्दों को नोट कर लीजिए. जो लोग संविधान, धर्मनिरपेक्षता, कानून वगैरह के बारे में बात करते हैं, ये तभी तक है जब तक इस देश में हिंदू बहुमत में है. जिस रोज़ हिंदुओं की संख्या कम हो जाएगी, यहां कोई धर्मनिरपेक्षता, कोई लोकसभा, कोई संविधान नहीं बचेगा. कुछ शेष नहीं बचेगा."
गुजरात के गृह मंत्री प्रदीप सिंह जडेजा, विश्व हिंदू परिषद और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेता इस कार्यक्रम में मौजूद थे.
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