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तालिबान ने 140 हिंदुओं और सिखों को काबुल छोड़ने से रोका -प्रेस रिव्यू
काबुल एयरपोर्ट पर भारतीय वायु सेना के एक विशेष विमान को रोके जाने की ख़बर है.
अंग्रेज़ी में छपने वाले 'द हिंदू' अख़बार ने 'इंडिया वर्ल्ड फ़ोरम' के अध्यक्ष पुनीत सिंह के हवाले से रिपोर्ट दी है कि तालिबान ने कम से कम 140 अफ़ग़ान सिखों, हिंदुओं और अन्य लोगों को काबुल एयरपोर्ट जाने से रोका है.
पुनीत सिंह काबुल से लोगों को निकालने के अभियान में विदेश मंत्रालय और भारतीय वायु सेना के साथ कॉर्डिनेट कर रहे हैं.
अख़बार का कहना है कि इस घटनाक्रम की वजह से वायु सेना के विशेष विमान को उड़ान भरने में देर हुई. ये विमान बुधवार से काबुल एयरपोर्ट पर उड़ान भरने का इंतज़ार कर रहा था.
'इंडिया वर्ल्ड फ़ोरम' का कहना है कि तालिबान ने बुधवार की रात इन यात्रियों को एयरपोर्ट के बाहर से ही लौटा दिया.
इससे पहले हिंदू अख़बार ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि गुरुवार सुबह लगभग 200 अफ़ग़ान हिंदू और सिख और अन्य देशों के नागरिकों को हिंडन एयरपोर्ट पर पहुंचना था. लेकिन तालिबान द्वारा इन यात्रियों को रोके जाने से इस फ़्लाइट को देर हुई.
दूसरी तरफ़ तालिबान का कहना है कि वो नहीं चाहता, अफ़ग़ान लोग देश छोड़कर जाएं.
महाश्वेता देवी की कहानी 'द्रौपदी' डीयू के सिलेबस से बाहर
दमन और उत्पीड़न के ख़िलाफ़ एक आदिवासी महिला के संघर्ष पर जानीमानी लेखिका महाश्वेता देवी की लघु कहानी 'द्रौपदी' को दिल्ली विश्वविद्यालय ने इंग्लिश ऑनर्स के अपने सिलेबस से हटा दिया है.
कोलकाता से छपने वाले अख़बार 'द टेलीग्राफ़' ने सिलेबस में बदलाव की सिफ़ारिश करने वाली ओवरसाइट कमेटी के एक सदस्य के हवाले से बताया है कि 'द्रौपदी' को सिलेबस से हटाए जाने की वजह इस कहानी में रेप का एक वर्णन है.
वाइस चांसलर पीसी जोशी ने चार विषयों के सिलेबस को मंज़ूरी देने के लिए अपने आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल किया.
दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहास में ऐेसे मौके कम ही आए हैं जब वाइस चांसलर ने एग्ज़ीक्यूटिव काउंसिल को दरकिनार करते हुए अपने आपातकालीन अधिकारों का इस्तेमाल किया हो. सिलेबस में बदलाव से जुड़े फ़ैसले एग्ज़ीक्यूटिव काउंसिल को लेने होते हैं.
डीयू की तरफ़ से जारी की गई मीडिया रिलीज़ में सिलेबस में किए बदलावों का विस्तार से बचाव किया गया है. यूनिवर्सिटी की तरफ़ से ये कहा गया है कि सिलेबस में ऐसी कोई भी सामाग्री नहीं होनी चाहिए जिससे किसी व्यक्ति की भावनाएं आहत होती हों.
दिल्ली विश्वविद्यालय के 130 सदस्यों वाली अकादमिक परिषद के तीन सदस्यों ने सिलेबस में किए गए बदलावों पर आधिकारिक तौर पर विरोध जताया है.
महाराष्ट्र: नारायण राणे का एलान
केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को भले ही महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर टिप्पणी करने के मामले में ज़मानत मिल गई हो, लेकिन राज्य की गठबंधन सरकार और भाजपा के बीच के नए विवाद की स्थिति पैदा होती दिख रही है.
इकॉनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, सिंधुदुर्ग पुलिस ने सात सितंबर तक धारा 144 लागू करने का फ़ैसला किया है. दंड प्रक्रिया संहिता के इस प्रावधान के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के सार्वजनिक जगहों पर इकट्ठा होने पर रोक लगाई जाती है.
लेकिन केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने एलान किया है कि उनकी 'जन आशीर्वाद यात्रा' शुक्रवार सुबह रत्नागिरि से शुरू होकर उसी दिन दोपहर सिंधुदुर्ग पहुंचेगी. राणे की योजना सिंधुदुर्ग में दो दिन तक रुकने की है. वे वहां जनसंपर्क अभियान चलाना चाहते हैं.
बीजेपी का मानना है कि धारा 144 लागू करने का मक़सद नारायण राणे की यात्रा को रोकना है. हालांकि पार्टी का ये भी कहना है कि धारा 144 केंद्रीय मंत्री के कार्यक्रम पर लागू नहीं होगी. 'जन आशीर्वाद यात्रा' के प्रमुख और बीजेपी के राज्य सचिव प्रमोद जाखड़ ने कहा है कि सेक्शन 144 नारायण राणे पर लागू नहीं हो सकता.
उन्होंने कहा, "नारायण राणे एक केंद्रीय मंत्री हैं. वे लोगों से उनकी समस्याएं जानने के लिए मिलेंगे. कोई कैसे एक केंद्रीय मंत्री को लोगों से मिलने से रोक सकता है. सेक्शन 144 का इस्तेमाल एक केंद्रीय मंत्री को उसकी ज़िम्मेदारियों का निर्वहन करने से रोकने के लिए नहीं किया जा सकता है."
बीजेपी नेताओं का दावा है कि रत्नागिरि और सिंधुदुर्ग के ज़्यादातर जगहों को शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने बुक कर लिया है ताकि नारायण राणे को अपनी मीटिंग करने के लिए जगह न मिले. हालांकि शिवसेना का कहना है कि धारा 144 लागू करने का फ़ैसला स्थानीय प्रशासन का है और ये कोई राजनीतिक निर्णय नहीं है.
कोरोना महामारी की दूसरी लहर अभी ख़त्म नहीं हुई हैः केंद्र सरकार
केंद्र सरकार ने गुरुवार को कहा है कि कोरोना महामारी के लिहाज़ से सितंबर और अक्टूबर का महीना महत्वपूर्ण होगा. इसके साथ ही केंद्र सरकार ने लोगों को एहतियात के त्योहार मनाने की सलाह दी है.
बिज़नेस स्टैंडर्ड अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार, मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने ये बात दोहराई कि देश अभी भी कोरोना महामारी की दूसरी लहर से गुज़र रहा है.
आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा कि कोरोना वैक्सीन्स बीमारी में सुधार कर रही हैं, लेकिन ये बीमारी को रोक नहीं रही हैं. इसलिए ये ज़रूरी है कि वैक्सीन लगवाने के बाद भी मास्क पहनना जारी रखा जाए.
राजेश भूषण ने कहा, "महामारी की दूसरी लहर अभी ख़त्म नहीं हुई है. इसलिए हमें सभी एहतियाती उपाय बरतने होंगे. ख़ासकर हर त्योहार के बाद संक्रमण के मामलों में होने वाली वृद्धि के अनुभवों को देखते हुए ये ज़रूरी है."
"सितंबर और अक्टूबर का महीना हमारे लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि हम कुछ त्योहार मनाने जा रहे हैं. ये त्योहार कोरोना का ख़्याल रखते हुए मनाए जाने चाहिए."
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