भीमा कोरेगाँव मामला: 15 लोगों पर 'देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने' के आरोप का प्रस्ताव- प्रेस रिव्यू

राष्ट्रीय जांच आयोग ने एल्गार परिषद मामले में गिरफ़्तार 15 लोगों के ख़िलाफ़ देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने का आरोप लगाने का फैसला किया है. इस मामले में अधिकतम सज़ा मृत्युदंड है.

अंग्रेजी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर बताती है कि एनआईए ने इस महीने की शुरुआत में एक विशेष अदालत के समक्ष आरोपों का मसौदा पेश किया है.

इसमें बताया गया है कि अभियुक्तों ने "सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की हत्या एवं उसके हालात पैदा करने" के लिए अत्याधुनिक हथियार जुटाने की साजिश रची.

शुरुआती जाँच करने वाली पुणे पुलिस ने अपनी प्रस्तावित चार्जशीट में बताया था कि हथियार "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या" करने की साजिश से जुड़े थे.

लेकिन एनआईए ने अपने मसौदे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम नहीं लिया है.

एनआईए के एक अधिकारी ने कहा है कि इस मसौदे में सटीक आरोप नहीं लगाए गए हैं और इस मामले में जुटाए गए सबूत सुनवाई का हिस्सा रहेंगे. पुणे पुलिस ने एक पत्र मिलने की बात भी कही थी.

इस मामले में अभियुक्त रोना विल्सन ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था जहां उन्होंने उस रिपोर्ट का ज़िक्र किया जिसमें ये सामने आया कि उनकी डिवाइस से मिला अपराध सिद्ध करने वाला साक्ष्य एक मालवेयर के माध्यम से दो साल पहले 2018 में उनकी डिवाइस में डाला गया था.

एनआईए ने आरोप लगाया है कि ये 15 अभियुक्त प्रतिबंधित संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (माओवादी) के सदस्य हैं.

एनआईए ने कहा है कि 31, दिसंबर 2017 को आयोजित की गयी एल्गार परिषद का उद्देश्य दलित एवं अन्य जातियों की सांप्रदायिक भावनाओं को भड़काकर महाराष्ट्र, भीमा कोरेगाँव और पुणे ज़िले में जाति के नाम पर हिंसा, अस्थिरता और अराजकता फैलाना था.

इसके साथ ही कहा गया है कि अभियुक्तों ने "एम - 4 (अत्याधुनिक हथियार) की वार्षिक आपूर्ति" के लिए 8 करोड़ रुपये जुटाने की साजिश रची. इसके साथ ही देश के तमाम विश्वविद्यालयों से "आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए" छात्रों को अपने साथ जोड़ा गया.

इन सभी अभियुक्तों के ख़िलाफ़ 16 धाराओं के तहत केस दर्ज है. लेकिन इसके साथ ही अलग - अलग अभियुक्त के ख़िलाफ़ विशेष धाराओं के तहत भी मामले दर्ज किए गए हैं. उदाहरण के लिए अकादमिक आनंद तेलतुंबडे पर समूत मिटाने का मामला लगाया गया है.

इस मामले में सुधीर धावले, रोना विल्सन, सुरेंद्र गाडलिंग, शोमा सेन, महेश राउत, पी वरवरा राव, वरुण गोंजाल्विस, अरुण फरेरिया, सुधा भारद्वाज, गौतम नौलखा, हेनी बाबू, रमेश गाइचोर, ज्योति जगताप और सागर गोरखे शामिल हैं.

इस ड्राफ़्ट में फादर स्टेन स्वामी का भी ज़िक्र है जिनका पिछले साल कस्टडी में ही निधन हो गया था. हालांकि, उनके ख़िलाफ़ मामले को दबा दिया गया है. इसके साथ ही छह अन्य लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया है जो कि फरार चल रहे हैं.

देश के ख़िलाफ़ युद्ध छेड़ने के साथ ही इन लोगों के ख़िलाफ़ लगे आरोपों में राजद्रोह, समाज में बैर फैलाना, आपराधिक साजिश रचने समेत यूएपीए के तहत आने वाली धाराओं के साथ आरोप लगाने का प्रस्ताव दिया गया है.

इस चार्जशीट के आधार पर विशेष अदालत तय करेगी कि अभियुक्तों के ख़िलाफ़ कौन से आरोपों पर कार्रवाई की जा सकती है.

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हुर्रियत के दोनों धड़ों पर प्रतिबंध लगा सकती है सरकार

केंद्र सरकार अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दोनों धड़ों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रही है.

अंग्रेजी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी ख़बर बताती है कि अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस के दोनों धड़ों पर यूएपीए के तहत प्रतिबंध लगाया जा सकता है.

वहीं, इंडियन एक्सप्रेस ने भी इसी मसले पर छपी ख़बर में बताया है कि ये प्रतिबंध सुरक्षा एजेंसियों को हुर्रियत से जुड़े किसी भी नेता को गिरफ्तार करने और धन के प्रवाह को रोकने की अनुमति देगा.

केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, हुर्रियत के कट्टरपंथी और उदारवादी दोनों धड़ों को "गैरकानूनी संघ" घोषित करने की चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक रूप से काम शुरू होना बाकी है.

वर्तमान में कट्टरपंथी धड़े का नेतृत्व अशरफ सेहराई कर रहे हैं और उदारवादी धड़े का नेतृत्व मीरवाइज उमर फारूक कर रहे हैं.

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मद्रास हाई कोर्ट का सवाल, यूपी एमपी को संसद में ज़्यादा सीटें क्यों?

मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में पारित एक आदेश में केंद्र सरकार से जनसंख्या के कारण राज्यों की स्थिति में होने वाले भेदभाव को लेकर जवाब तलब किया है.

हिंदी अख़बार अमर उजाला में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, हाईकोर्ट ने जनसंख्या नियंत्रण को बेहतरीन तरीके लागू करने वाले तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के मुकाबले आबादी विस्फोट से गुजर रहे उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों को संसद में ज्यादा सीटें मिलने को लेकर स्पष्टीकरण तलब किया है. साथ ही तमिलनाडु को 5600 करोड़ रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश केंद्र सरकार को दिया है.

पीठ ने कहा, जो राज्य जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम को लागू करने में विफल रहे हैं, वे आबादी काबू में करने वाले राज्यों खासतौर पर दक्षिणी राज्यों तमिलनाडु व आंध्र प्रदेश से संसद में उन राज्यों से ज्यादा प्रतिनिधित्व पाने में सफल हो रहे हैं.

आदेश में कहा गया कि पिछले 14 आम चुनावों में तमिलनाडु को कम सीटों पर प्रतिनिधित्व पाने के लिए मुआवजे मिलना चाहिए. पीठ ने अपने अनुमान के आधार पर यह मुआवजा 5600 करोड़ रुपये के बराबर तय किया है और इसका भुगतान केंद्र सरकार को करने का निर्देश दिया है.

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कल्याण सिंह की प्रार्थना सभा में राष्ट्रीय ध्वज के ऊपर भाजपा का झंडा, विपक्ष ने साधा निशाना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बीते रविवार बीजेपी नेता कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि देने के लिए लखनऊ गए थे.

समाचार वेबसाइट एनडीटीवी की ख़बर के मुताबिक़, भाजपा ने कल्याण सिंह के अंतिम दर्शन की तस्वीर ट्वीट की है जिसमें कल्याण सिंह का शव राष्ट्रीय ध्वज से लिपटा हुआ है.

लेकिन इसका आधा हिस्सा भाजपा के पार्टी झंडे से ढका हुआ नजर आया.

इस तस्वीर पर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

युवा कांग्रेस अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने पूछा, "क्या न्यू इंडिया में भारतीय ध्वज पर पार्टी का झंडा लगाना ठीक है?"

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