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#eRUPI :ई-रुपी क्या है, जिसे पीएम मोदी ने लॉन्च किया है
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
मुद्रा और भुगतान का भविष्य डिजिटल है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को ई-रुपी को लॉन्च किया.
डिज़िटल भुगतान प्रणाली की दिशा में इसे एक अहम क़दम माना जा रहा है.
ये प्रणाली पैसा भेजने वाले और पैसा वसूल करने वाले के बीच 'एन्ड टू एन्ड एन्क्रिप्टेड' है यानी दो पार्टियों के बीच किसी तीसरे का इसमें दख़ल नहीं है.
इसे नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया (एनपीसीआई) ने विकसित किया है.
ये भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणाली के संचालन के लिए एक अम्ब्रेला संगठन है.
ये भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बैंक संघ (आईबीए) की एक पहल है.
ई-रुपी क्या है?
एनपीसीआई के अनुसार ई-रुपी डिजिटल पेमेंट के लिए एक कैशलेस और कॉन्टैक्टलेस प्लेटफ़ॉर्म है.
ये QR कोड या SMS के आधार पर ई-वाउचर के रूप में काम करता है.
एनपीसीआई के मुताबिक़ लोग इस एकमुश्त भुगतान के यूज़र्स कार्ड, डिजिटल भुगतान ऐप या इंटरनेट बैंकिंग एक्सेस के बिना ई-रुपी वाउचर को भुनाने में सक्षम होंगे.
इस ई-रुपी को आसान और सुरक्षित माना जा रहा है, क्योंकि यह बेनेफिशियरीज़ के विवरण को पूरी तरह गोपनीय रखता है.
इस वाउचर के माध्यम से पूरी लेन-देन प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेज़ और साथ ही विश्वसनीय मानी जाती है, क्योंकि वाउचर में आवश्यक राशि पहले से ही होती है.
फ़ायदे
सरकार अपनी कई योजनाओं के तहत ग़रीबों और किसानों को सहायता के रूप में कैश उनके बैंक खातों में ट्रांसफ़र करती रही है जैसा कि कोरोना काल में दिखा.
इस सिस्टम में सरकारी कर्मचारियों का काफ़ी दखल होता है. कई बार लोगों को इसमें काफ़ी परेशानी भी होती है. आरोप ये भी लगते हैं कि सरकारी कर्मचारी रिश्वत भी लेते हैं.
ई-रुपी के इस्तेमाल से इसका ख़तरा ख़त्म हो जाता है, जैसा कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि यह भुगतान प्रणाली "सुनिश्चित करती है कि लाभ बिना किसी परेशानी के बेनेफिशियरीज़ (लाभार्थी) तक पहुंचे."
ई-रुपी का इस्तेमाल सरकार की विशेष मुद्रा मदद के दौरान किया जा सकता है. इसे निजी कंपनियाँ भी अपने कर्मचारियों के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं.
मिसाल के तौर अगर आपकी कंपनी ने आपके वेतन के अलावा सितंबर के महीने में 500 रुपये प्रति कर्मचारी एक्स्ट्रा पेमेंट के तौर पर देने का फ़ैसला किया, तो ई-रुपी वाउचर के ज़रिए किया जा सकता है, जिसके अंतर्गत कंपनी आपके मोबाइल फ़ोन पर मैसेज या QR कोड की शक्ल में भेज सकती है.
इसमें वाउचर का इस्तेमाल हुआ या नहीं, ये भी ट्रैक किया जा सकता है.
पीएम मोदी डिजिटल वॉलेट और डिजिटल पेमेंट सिस्टम के एक बड़े और उत्साही समर्थक रहे हैं. उन्होंने रविवार को एक ट्वीट में कहा कि डिजिटल टेक्नॉलॉजी जीवन को बड़े पैमाने पर बदल रही है और 'ईज़ ऑफ लाइफ' को बढ़ा रही है.
कैशलेस समाज
पीएम ने 2016 में नोटबंदी लागू करके अवैध कैश को ख़त्म करने और भारत को एक कैशलेस समाज बनाने का दावा किया था. लेकिन बाद में उन्होंने कम कैश वाले समाज और सिस्टम की बात कही थी. इसके अलावा उन्होंने हमेशा डिजिटल वॉलेट को बढ़ावा दिया है
लेकिन डेलॉइट की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक़, 2020 में भारत के कुल ट्रांजैक्शन का 89 फ़ीसदी कैश में हुआ, जबकि चीन में 44 फ़ीसदी ट्रांजैक्शन कैश में हुआ. प्रधानमंत्री का डिजिटल पुश अब तक बहुत कामयाब नहीं रहा है, लेकिन वित्तीय विशेषज्ञ कहते हैं ई-रुपी इस दिशा में एक सकारात्मक क़दम है.
सरकार का अंदाज़ा ये है कि जैसे-जैसे सस्ते दाम वाले स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ेगा, देश में डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल भी बढ़ेगा.
फ़िलहाल देश के प्रसिद्ध डिजिटल वॉलेट में पेटीएम, फोनपे, अमेज़न पे, एयरटेल मनी और गूगल पे जैसे डिजिटल वॉलेट का इस्तेमाल आम होता जा रहा है.
डिजिटल करेंसी एक वैश्विक रुझान
ई-रुपी को रुपये के डिजिटल रूप को लॉन्च करने की दिशा में एक कदम के रूप में भी देखा जा रहा है, जिसे वर्तमान में लक्ष्मी कहा जाता है. चीन ने भी इसमें पहल की है और अपनी करेंसी युआन को डिजिटल शक्ल में कई शहरों में कई शहरों लॉन्च किया है.
इसने ई-आरएमबी नामक अपनी डिजिटल युआन मुद्रा को 2022 बीजिंग विंटर ओलंपिक के समय देश भर में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा है. 2022 में चीन आने वाले लोगों को ई-आरएमबी आभासी मुद्रा में ख़रीदना और बेचना पड़ सकता है.
निजी क्षेत्र में बिटकॉइन इस समय सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी है. आरबीआई की लक्ष्मी और बिटकॉइन जैसी क्रिप्टोकरेंसी में सबसे बड़ा फ़र्क़ ये है कि लक्ष्मी सरकारी नियंत्रण में होगी जबकि बिटकॉइन जैसी क्रिप्टो करेंसियाँ सरकारी नियंत्रण से बाहर रहती हैं.
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