पंजाब: नवजोत सिंह सिद्धू क्यों बोले- तुम AAP में आओगे तो कोई बात नहीं...

नवजोत सिंह सिद्धू क्या संकेत देना चाहते हैं? क्रिकेटर से राजनेता बने सिद्धू क्या एक नई टीम की तलाश में हैं? क्या वो एक बार फिर नए सिरे से नई पारी की शुरुआत करना चाहते हैं?

एक ऐसे दिन जब कई दूसरे खिलाड़ी अलग वजहों से चर्चा में रहे, तब सिद्धू ने भी सुर्खियाँ बनाईं, लेकिन अपने कई ट्वीट्स की वजह से.

पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में सिद्धू के ट्वीट्स के कई मायने निकाले जा रहे हैं.

भारतीय जनता पार्टी के बाद सिद्धू फ़िलहाल कांग्रेस में हैं. लेकिन माना जा रहा है कि यहाँ भी वे नाराज़ चल रहे हैं.

कहाँ है निशाना?

उन्होंने मंगलवार को एक के बाद एक कई ट्वीट किए. इनमें सबसे ज़्यादा चर्चा में रहे ट्वीट में उन्होंने लिखा, "हमारे विपक्षी मेरे और दूसरे लॉयल कांग्रेसवालों के लिए गा रहे हैं, तुम अगर आप (AAP) में आओगे, तो कोई बात नहीं. तुम अगर कांग्रेस में रहोगे, तो मुश्किल होगी."

सिद्धू पंजाब में विधायक हैं. वो पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार का हिस्सा थे, लेकिन बाद में उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ा.

प्रदेश में चुनाव क़रीब हैं और एक बार फिर दोनों नेताओं की तकरार सतह पर है. इसके लिए सिद्धू ने हाल में दिल्ली के भी कई चक्कर लगाए. उन्होंने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भी मुलाक़ात की.

विरोधियों की तारीफ़

सिद्धू ने मंगलवार को ये भी कहा कि विरोधी उनकी बातें बेहतर तरीक़े से समझते हैं और विरोधियों में वो आम आदमी पार्टी की ही बात कर रहे थे.

सिद्धू ने लिखा, " हमारी विपक्षी AAP ने हमेशा पंजाब के लिए मेरे विजन और काम को मान्यता दी. चाहे 2017 के पहले मेरी ओर से उठाए गए बेअदबी, ड्रग्स, किसानों के मुद्दे, भ्रष्टाचार, बिजली संकट के मुद्दे हों या आज जब मैं पंजाब मॉडल पेश कर रहा हूँ. ये साफ है कि वो जानते हैं कि वास्तविकता में पंजाब के लिए कौन संघर्ष कर रहा है."

इसके साथ सिद्धू ने एक वीडियो भी पोस्ट किया है. इसमें आम आदमी पार्टी नेता संजय सिंह और भगवंत मान सिद्धू की तारीफ़ करते दिख रहे हैं.

कैप्टन से मुक़ाबला?

कांग्रेस नेता के तौर पर नवजोत सिंह सिद्धू ये बात उस दिन कर रहे हैं, जब दिल्ली में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की मुलाक़ात की चर्चा है. प्रशांत किशोर साल 2017 के उत्तर प्रदेश चुनाव में राहुल गांधी और कांग्रेस के साथ काम कर चुके हैं और फ़िलहाल पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के सलाहकार हैं.

जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकारें हैं, उन सभी के मुख्यमंत्रियों में कैप्टन अमरिंदर सिंह का दर्जा अलग है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारतीय जनता पार्टी के क़द्दावर नेता अरुण जेटली को अमृसतर सीट पर मात दी थी.

उसके बाद 2017 में पंजाब में कांग्रेस उनके नेतृत्व में चुनाव में उतरी और जीत हासिल करने में कामयाब रही. अकाली-बीजेपी गठबंधन के मुक़ाबले पंजाब के वोटरों ने अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस को चुना. आम आदमी पार्टी भी उन्हें ख़ास चुनौती नहीं दे सकी. कांग्रेस एक बार फिर कैप्टन की अगुवाई में ही आगे बढ़ने का संकेत दे चुकी है.

साल 2017 के चुनाव के पहले भी आम आदमी पार्टी ने सिद्धू को अपने साथ जुड़ने का न्यौता दिया था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी को छोड़ने के बाद उन्होंने कांग्रेस के साथ जाना पसंद किया.

साल 2014 में जब भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें अमृतसर से लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार नहीं बनाया, तो उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का फ़ैसला किया. बाद में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा लेकिन बीजेपी की तब के सहयोगी अकाली दल से तकरार की वजह से उन्होंने राज्यसभा सीट छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए.

सिद्धू कैप्टन अमरिंदर सिंह से तक़रार को लेकर भी चर्चा में रहे. पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान के न्योते पर उनके शपथ समारोह में पाकिस्तान जाने और वहाँ पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा से गले मिलने को लेकर भी आलोचकों के निशाने पर रहे.

कांग्रेस के अंदर उनकी नाराज़गी की ख़बरों के बीच अकाली दल नेता सुखबीर सिंह बादल ने बीती 30 जून को उन्हें ऐसी 'मिसगाइडेड मिसाइल बताया था, जो नियंत्रण के बाहर है और वो अपने समेत किसी भी दिशा में टकरा सकती है.'

सिद्धू ने इस पर पलटवार करते हुए कहा था कि उनका 'निशाना बादल का भ्रष्ट तंत्र है.'

अब देखना ये है कि सिद्धू का अगला क़दम क्या होता है?

कॉपी: वात्सल्य राय

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