तेजस्वी यादव बोले- विपक्ष को एकजुट होना चाहिए, वरना इतिहास माफ़ नहीं करेगा - प्रेस रिव्यू

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बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि विपक्षी दलों को सारे मतभेद भुलाकर और अपने-अपने अहंकार को परे रखकर एक साथ आना चाहिए, वरना इतिहास उन्हें ऐसा ना करने के लिए कभी माफ़ नहीं करेगा.
अंग्रेज़ी अख़बार द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में उन्होंने ये बात कही. यादव ने कहा कि विपक्ष के पास 'असल मुद्दों' की कमी नहीं है और उन्हें इन असल मुद्दों के इर्द-गिर्द ही अपनी राजनीतिक रणनीति बनानी चाहिए.
उन्होंने ये भी कहा कि कांग्रेस को भविष्य में किसी भी विपक्षी गठबंधन का आधार बनना होगा, क्योंकि वो एक राष्ट्रीय पार्टी है और बीजेपी के ख़िलाफ़ सीधे तौर पर 200 सीटों पर चुनाव लड़ती है.
यादव ने अख़बार से बातचीत में कहा कि ममता बनर्जी, अखिलेश यादव और शरद पवार जैसे नेता देश की मौजूदा स्थिति को लेकर हमेशा चिंतित नज़र आते हैं और वो लगातार इसके बारे में बोलते भी रहे हैं, लेकिन इन सभी को एक टीम बनाने के बारे में सोचना चाहिए और अलग-अलग राज्यों में साथ में यात्राएं करनी चाहिए.

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वे बोले, "मुझे लगता है कि जल्द ही इस दिशा में कुछ होगा. विपक्ष के सभी प्रमुख नेता साथ बैठकर इस बारे में बात करेंगे. जब मुझसे कोई पूछता है, तो मैं कहता हूँ कि समय आ गया है और हमें जल्द से जल्द बीजेपी सरकार के ख़िलाफ़ एक मज़बूत गठबंधन तैयार करना चाहिए. बल्कि मैं कहूंगा कि हमें हार के अगले दिन से ही इस दिशा में काम करना चाहिए था."
यादव ने कहा कि "विपक्ष के नेताओं को लगातार जनता के बीच जाना चाहिए. आरजेडी बिहार तक सीमित है, तो कोई पश्चिम बंगाल या सिर्फ़ महाराष्ट्र में अपना प्रभाव रखता है. ऐसे में हमें एकजुट होना होगा और मिलकर विभिन्न राज्यों में जाना होगा. हमें लोगों को मुद्दे समझाने होंगे, हमें मेहनत करनी होगी, हमें लोगों को याद दिलाना होगा कि किन वादों के साथ बीजेपी सत्ता में आयी थी जिन्हें उसने पूरा नहीं किया."
आरजेडी नेता ने कहा कि 'हम अगर लोगों को समझा नहीं पाते, तो इसमें हमारी कमी है. शायद हम उन्हें एकजुट दिखाई नहीं देते. इसीलिए हमें अपने सारे मतभेद भुलाने होंगे, अपने-अपने अहंकार को साइड रखना होगा और ये देखे बिना आगे बढ़ना होगा कि अगर हम जीते तो हमें क्या मिलेगा. देश बचेगा, तभी तो नेतागिरी बचेगी. लेकिन बीजेपी वाले ज़्यादा वक़्त तक रहे, तो देश में कुछ नहीं बचेगा.'

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तेजस्वी यादव ने माना कि कांग्रेस के साथ परेशानियाँ हैं और पार्टी को ख़ुद ही इससे लड़ना होगा. कांग्रेस को मैदान में उतर जाना चाहिए. उनके पास 200 सीटें ऐसी हैं, जहाँ वो सीधे तौर पर बीजेपी को टक्कर देते हैं. इसलिए देर करने से कोई फ़ायदा नहीं होगा. मैं नहीं जानता कि कोरोना महामारी की वजह से कितना संभव हो पायेगा और बीजेपी क्या करेगी, लेकिन हमें कुछ तो करना होगा.
लेकिन लोगों को बीजेपी नेतृत्व का विकल्प दिखाई नहीं देता! तो इस बात पर यादव ने कहा, "हमें रणनीति बनानी होगी. हमें सोचना होगा कि हम इस सरकार को कैसे घेर सकते हैं. लोग चाहते हैं कि ये सरकार जल्द से जल्द गिरे. जिन्होंने बीजेपी को वोट दिया, उन्हें आज अपनी ग़लती महसूस होती है. लेकिन ये हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम लोगों को विकल्प दें. सबसे महत्वपूर्ण है कि हम इस बारे में बैठकर बात करें. देश और संविधान बचाने के बारे में सोचें."

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जजों को सम्राटों की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
हिन्दी अख़बार अमर उजाला के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायाधीशों को अपनी सीमाएं पता होनी चाहिए, उनमें शीलता और विनम्रता होनी चाहिए, जजों को सम्राटों की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए.
शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की. शीर्ष अदालत ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सरकारी अधिकारियों को अनावश्यक रूप से अदालत में नहीं बुलाया जाये. किसी अधिकारी को अदालत में बुलाने से अदालत की गरिमा और महिमा नहीं बढ़ती है.
जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने कहा कि कुछ हाईकोर्टों में अधिकारियों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाने की प्रथा विकसित हुई है. वास्तव में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच शक्तियों को लेकर लक्ष्मण रेखा खिंच गई है. अधिकारियों को अदालत में बुलाकर इस सीमा-रेखा का उल्लंघन किया जा रहा है और उनपर दबाव बनाकर अपनी इच्छा के अनुसार आदेश पारित किया जाता है.
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि अधिकारियों को बार-बार अदालत में बुलाना बिल्कुल भी सराहनीय नहीं है. इसकी कड़े शब्दों में निंदा की जानी चाहिए.
शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणियाँ उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक चिकित्सा अधिकारी के वेतन के संबंध में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दायर अपील पर की हैं.
हाईकोर्ट ने इस मामले में चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के सचिव को समन जारी किया था.
सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ के फ़ैसलों को दरकिनार कर दिया.
शीर्ष अदालत ने कहा कि जजों को अफ़सरों को समन देने की प्रथा से बचना चाहिए क्योंकि कार्यपालिका के अधिकारी भी लोकतंत्र के तीसरे अंग के रूप में अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं.

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मोदी सरकार के 42 फ़ीसदी मंत्री हैं दाग़ी: एडीआर रिपोर्ट
अधिकांश अख़बारों ने चुनाव सुधारों के लिए काम करने वाले समूह 'एडीआर' की रिपोर्ट को प्रकाशित किया है जिसमें कहा गया है कि इस बार मोदी कैबिनेट में 42 फ़ीसदी मंत्री दाग़ी छवि के हैं.
हिन्दुस्तान अख़बार ने इस पर अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि केंद्रीय मंत्रिमण्डल के 78 मंत्रियों में से 42 प्रतिशत ने अपने ख़िलाफ़ आपराधिक मामले होने की घोषणा की है. इनमें से चार पर हत्या के प्रयास से संबंधित मामले भी हैं.
15 नये कैबिनेट मंत्रियों और 28 राज्य मंत्रियों ने बुधवार को शपथ ली थी. इसके बाद मंत्री परिषद के कुल सदस्यों की संख्या 78 हो गई है.
एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रैटिक रिफ़ॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के अनुसार, नई मंत्री परिषद के क़रीब 24, यानी 31 प्रतिशत मंत्रियों ने हत्या, हत्या के प्रयास, डकैती आदि समेत गंभीर आपराधिक मामलों की घोषणा की है.
इसके अलावा, रिपोर्ट में जिन मंत्रियों का विश्लेषण किया गया उनमें से 70 (90 प्रतिशत) करोड़पति हैं. प्रति मंत्री औसत संपत्ति 16.24 करोड़ रुपये है. चार मंत्रियों ने 50 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति का उल्लेख किया है. ये मंत्री हैं- ज्योतिरादित्य सिंधिया, पीयूष गोयल, नारायण तातु राणे और राजीव चंद्रशेखर.
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