मुस्लिम बुज़ुर्ग के वायरल वीडियो मामले में क्या है ज़मीनी सच्चाई: बीबीसी ग्राउंड रिपोर्ट

    • Author, कीर्ति दुबे और दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

दिल्ली से सटे ग़ाज़ियाबाद के लोनी बॉर्डर पर 5 जून को एक मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ मारपीट हुई. उसका एडिटेड वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ. वायरल वीडियो में पीड़ित बुजुर्ग अब्दुल समद सैफ़ी सैफ़ी ने दावा किया था कि उन्हें ऑटो सवार कुछ लोगों ने अगवा किया, उनकी पिटाई की, दाढ़ी काट दी और जय श्री राम का धार्मिक नारा लगाने के लिए मजबूर किया. जबकि ग़ाज़ियाबाद पुलिस का दावा है कि जानबूझ कर घटना को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की गई.

इस घटना के दो तार हैं - एक ग़ाज़ियाबाद का लोनी बॉर्डर जहां की ये घटना है और दूसरा बुलंदशहर जहां घटना के बाद बुज़ुर्ग रह रहे थे. वीडियो वायरल होने के 10 दिन बाद मुस्लिम बुज़ुर्ग मीडिया के सामने आए.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस घटना पर ट्विट किया, जिसके जवाब में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनपर सीधा हमला किया. इसके बाद मामला तूल पकड़ता गया.

ग़ाज़ियाबाद पुलिस ने इस मामले में ट्विटर समेत कुछ लोगों के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज की है.

घटना की ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए बीबीसी ने अपने दो संवाददाताओं को ग्राउंड पर भेजा. कीर्ति दुबे लोनी बॉर्डर से रिपोर्ट कर रहीं है और दिलनवाज़ पाशा बुलंदशहर से.

तारीख़ :16 जून स्थान : ग़ाज़ियाबाद के लोनी बॉर्डर से रिपोर्टर : कीर्ति दुबे

ग़ाज़ियाबाद के लोनी इलाक़े में मुस्लिम बुज़ुर्ग के साथ मारपीट के वीडियो में मुख्य अभियुक्त परवेश गुर्जर के बंथला गांव में मौजूद एक मंज़िला मकान पर अब ताला लगा है. गांव के लोग किसी भी बाहरी को देखकर घर के भीतर चले जा रहे हैं. कोई भी बात नहीं करना चाहता. न वीडियो के बारे में और न ही परवेश या उसके परिवार के बारे में. लोगों में अजीब सा डर है, जो सन्नाटे की शक्ल में महसूस होता है.

12 तारीख़ को हुई परवेश की गिरफ़्तारी के बाद उनका परिवार गायब है. परवेश के घर से 10 कदम की दूरी पर उसकी मौसी फूलवती का परिवार रहता है. जब हम उनके घर पहुंचे, तो वह दलान में एक चारपाई पर बैठी थीं. मेरा परिचय सुनकर वह तुरंत कहती हैं, "बेटी मैं तो दो दिन पहले आई हूं. मुझे नहीं पता कि क्या हुआ था उस दिन."

कुछ देर की बातचीत के बाद वह धीरे-धीरे खुलती हैं और बताती हैं, "एक मौलाना आता था उनके घर. 2-3 महीने पहले ही वह परवेश के परिवार के संपर्क में आया था. पुड़िया-ताबीज़ दिया करता था, लेकिन परवेश के परिवार में बीते कुछ महीने से कुछ ठीक नहीं हो रहा था. मौलाना की दवाई पीने से 20 दिन पहले उसकी पत्नी का बच्चा ख़राब हो गया. 3 जून को उनके पिता सुरेंद्र तंवर का एक्सिडेंट हो गया. काम का भी नुक़सान हुआ. उसके पास एक डीजे और कैंटर (सामान ढोने वाली गाड़ी) था, वो भी बिक गए. दो बार परवेश ने जान देने की कोशिश की. सब उसकी ताबीज के कारण हुआ."

फूलवती का कहना है कि उन्होंने मारपीट वाला वीडियो नहीं देखा है. उन्हें पुलिस के आने पर मारपीट होने का पता चला. लेकिन, जब हमने फूलवती को वीडियो दिखाया, तो वह तुरंत ही अब्दुल समद सैफ़ी को पहचान लेती हैं और कहती हैं, "हां, यही ताबीज़ देने का काम करता था."

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लेकिन, इस पूरे गांव में कोई इस घटना के बारे में बात नहीं करना चाहता. सभी एक ही जैसी बात कहते हैं कि हम उस दिन घर पर थे ही नहीं. वीडियो दिखाए जाने पर भी कोई ये नहीं बताता है कि उन्होंने कभी इस मुस्लिम शख़्स को देखा है या नहीं.

आख़िर ये वीडियो बनाया कहां गया है, इस सवाल का जवाब अब भी किसी के पास नहीं है?

गांव में घूमते हुए हमारी नज़र ईंट से बनी एक घेर (जहां मवेशी रखे जाते हैं) पर पड़ी, जिसमें दो गाय बांधी गई थीं. जब हम इस घेर में दाख़िल हुए, तो ये वही जगह थी, जहां अब्दुल समद सैफ़ी से मारपीट का वीडियो वायरल हो रहा है. परवेश की मौसी ने हमें बताया कि ये घेर परवेश के परिवार का है.

इस घेर में नीले रंग का वही प्लाटिक का टैंकर, सफेद रंग का डिब्बा, एक चारपाई और ईंट से बनी दीवार थी, जो वीडियो में नज़र आ रही है.

अब्दुल समद सैफ़ी के कई दावे झूठे निकले- पुलिस

ग़ाज़ियाबाद पुलिस ने इस मारपीट के मामले में मुख्य आरोपी परवेश गुर्जर को माना है. 16 जून तक पुलिस ने परवेश गुर्जर, आदिल खां, अभय उर्फ़ कल्लू गुर्जर, इंतेज़ार और सद्दाम नाम के पांच अभियुक्तों को गिरफ़्तार किया है.

लोनी बॉर्डर थाने के एसपी इराज राजा बीबीसी से कहते हैं, "हमारे पास 7 जून को एफ़आईआर दर्ज कराई गई और उसमें भी एफ़आईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ़ थी. जबकि सीसीटीवी फ़ुटेज बता रही है कि वह ख़ुद इंतेज़ार के साथ गाड़ी पर बैठकर बेहटा हाजीपुर गांव गए थे. अभी तक कि हमारी जांच में जो सामने आया है, वो बताता है कि समद सैफ़ी ने बहुत कुछ झूठ बोला है?"

आख़िर पुलिस ये किस बुनियाद पर कह रही है कि समद सैफ़ी ने झूठ बोला है और क्यों पुलिस अब तक मूल वीडियो हासिल नहीं कर पाई है? बीबीसी के इस सवाल पर एसएचओ कहते हैं, "हमारे पास समद सैफ़ी का कॉल रिकॉर्ड है, जो बताता है कि वह बीते एक महीने से परवेश से कई बार फ़ोन के ज़रिए संपर्क कर चुके थे."

"वायरल वीडियो में ऑडियो नहीं है. इसे पहले एडिट किया गया है. हम आपकी इस बात को मान रहें हैं, लेकिन ये वीडियो परवेश के फ़ोन से बनाया गया था और हमने पूछताछ की, तो उसने बताया है कि वह फ़ोन उसने तोड़ दिया. देखिए सुबूत मिटाने के लिए ये होता है, लेकिन हम कोशिश में लगे हैं कि मूल वीडियो मिल जाए."

परवेश गुर्जर की गिरफ़्तारी के पीछे की कहानी

परवेश गुर्जर वायरल वीडियो के मामले में मुख्य आरोपी हैं, लेकिन उनकी गिफ़्तारी 12 जून को रंगदारी के एक दूसरे मामले में हुई है. इस मामले में एफ़आईआर 10 जून को लोनी में रहनेवाले इंतेज़ार ने की थी. ये वही शख़्स है, जिस पर समद सैफ़ी को परवेश गुर्जर से मिलाने का आरोप है.

इस एफ़आईआर में कहा गया है कि परवेश गुर्जर नाम का शख़्स मुझसे 2 लाख रुपए की रंगदारी मांग रहा है और न देने पर जान से मारने की धमकी दे रहा है. मैं और मेरा परिवार डरे हुए हैं, क्योंकि इससे पहले ये शख़्स कई बार जेल से छूटा है.

10 जून की इस एफ़आईआर के बाद 12 जून को परवेश की गिरफ़्तारी हुई है, जबकि अब्दुल समद सैफ़ी ने अपने साथ मारपीट की घटना की एफ़आईआर 7 जून को दर्ज कराई थी.

परवेश की गिरफ़्तारी के लेकर इस कन्फ़्यूज़न पर एएसपी इराज राजा बताते हैं, "अब्दुल समद सैफ़ी ने जो एफ़आईआर दर्ज कराई थी, वो अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ थी, इसलिए इस गिरफ़्तारी में देर हुई है. ये बात सही है कि हमने परवेश को रंगदारी के केस में पहले गिरफ़्तार किया था, लेकिन अब हम उसकी पुलिस रिमांड ले रहे हैं और उससे इस मामले में पूछताछ की जाएगी."

कल्लू गुर्जर और परवेश की दोस्ती

इसके बाद हम इस मामले में गिरफ़्तार अभय उर्फ कल्लू गुर्जर घर पहुंचे. यहां हमारी मुलाकात उनके पिता ज्ञानेंद्र गुर्जर से हुई. ज्ञानेंद्र का दावा है कि उनके बेटे ने उन्हें पूरी बात बताई है और ये ताबीज़ के बदले पैसे ऐंठने का मामला है.

उनका आरोप है, "लोनी के ही रहनेवाले इंतेज़ार के ज़रिए अब्दुल समद सैफ़ी और परवेश के परिवार की मुलाकात हुई थी. इंतेज़ार और अब्दुल समद सैफ़ी ने मिलकर परवेश से ताबीज़ के नाम पर लाखों रुपए लिए. जब परवेश ने इंतेज़ार से पैसों की मांग की, तो इंतेज़ार ने परवेश पर रंगदारी का मुक़द्दमा दर्ज करा दिया."

ज्ञानेंद्र का कहना है, "मेरे बेटे कल्लू की मुलाक़ात परवेश से जिम में हुई थी. 5 जून को परवेश ने कल्लू को फ़ोन करके बुलाया था. मेरा बच्चा तो 19 साल का है. दोस्ती में चला गया. इस मारपीट से उसका कोई लेना-देना नहीं है. वो फंस गया है."

हालांकि, पुलिस ने बीबीसी को पैसे ऐंठे जाने के दावे से जुड़ी कोई जानकारी नहीं दी है. पुलिस का कहना है कि ये मारपीट ताबीज़ की वजह से हुई. ताबीज़ लेने के बाद परवेश के साथ बहुत कुछ बुरा हुआ. ग़ुस्से में परवेश ने ये क़दम उठाया.

घटना की जगह शाम को पहुंचा आदिल खां

इस मामले में 30 साल के आदिल खां की गिरफ़्तारी हुई थी, जिन्हें ज़मानत मिल चुकी है और वो जेल से बाहर आ चुके हैं. आदिल खां का घर लोनी बॉर्डर थाने के ठीक सामने है. यहां घर के बाहर 10-12 लोग बैठे हुए थे.

यहां हमारी मुलाक़ात आदिल के बड़े भाई फ़ज़ल खान से हुई. फ़ज़ल खान ने बताया कि आदिल को अपने परिवार के साथ बाहर भेज दिया गया है.

पहले तो वह इस मामले पर बात करने से कतराते हैं, लेकिन बाद में धीरे-धीरे खुलने लगे.

फ़ज़ल के मुताबिक़ आदिल को मारपीट के बाद 5 जून की शाम को परवेश का फ़ोन आया था. जब आदिल को पता चला कि बुज़ुर्ग की दाढ़ी काटी गई है, तो इससे वो परेशान हुआ और उसी ने अब्दुल समद सैफ़ी को वहां से बाहर निकालने में मदद की.

"हम मुस्लिम समुदाय के इज़्ज़तदार लोग हैं. आप देख रही हैं हमारे दरवाजे पर लोग आते हैं. आख़िर हम दाढ़ी काटने का समर्थन कैसे कर सकते हैं? आदिल को इसलिए ज़मानत मिली है, क्योंकि वह शाम को मौक़े पर पहुंचा."

इसी दौरान बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा बुलंदशहर के अनूपशहर कस्बे पहुँचे जहां अब्दुल समद सैफ़ी का पूरा परिवार पिछले कुछ दिनों से रह रहा था.

तारीख़: 16 जूनस्थान : बुलंदशहर ज़िले का अनूपशहर कस्बारिपोर्टर : दिलनवाज़ पाशा

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के अनूपशहर कस्बे का एक मोहल्ला अचानक चर्चा में आ गया है. यहां रहने वाले 72 वर्षीय अब्दुल समद सैफ़ी के घर के बाहर पत्रकारों और स्थानीय लोगों की भीड़ है.

अब्दुल समद सैफ़ी के साख 05 जून को ग़ाज़ियाबाद के लोनी बॉर्डर इलाके में मारपीट हुई. सोशल मीडिया पर उसका वीडियो वायरल हुआ. उस दिन के बाद से अब्दुल समद सैफ़ी मीडिया से दूर थे. 10 दिन बाद वो एक बार दोबारा 16 जून की शाम को मीडिया के सामने आए.

सिर पर अरबी साफा, हाथ में तस्बीह और हरे रंग की सूफी अंगूठी पहने अब्दुल समद सैफ़ा जब कैमरे के सामने आए, तो उम्मैद इदरीसी भी वहां मौजूद थे. उम्मैद इदरीसी, समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता होने का दावा करते हैं. उम्मैद ने सबसे पहले 07 जून को अब्दुल समद सैफ़ी के साथ फेसबुक लाइव किया था और उनके साथ मारपीट के मुद्दे को उठाया था.

बीबीसी से बात करते हुए समद सैफ़ी ने कहा, "चार लोगों ने मुझ पर हमला किया. वो मेरा चेहरा ढंक करके ले गए थे, एक कमरे में बंद कर दिया था. वहां गाय बंधी थी. उन्होंने मुझे दो-तीन घंटा पकड़कर रखा."

जब उनसे पूछा गया कि क्या वो परवेश गुर्जर और इंतेजार नाम के लोगों को जानते हैं तो उन्होंने कहा, " मेरी परवेश गुर्जर से किसी तरह की कोई जान पहचान नहीं है. मैं इंतेजार को जानता हूं. वहां मेरे भांजे रहते हैं, मैं उन्हें जानता हूं."

समद सैफ़ी ने बताया, "मैं अल्लाह-अल्लाह कर रहा था. वो कह रहे थे अल्लाह का नाम क्यों ले रहा है. मैंने उनसे कहा कि मेरी जान अल्लाह के हाथ में है, वो चाहेगा तो मुझे बचा लेगा."

उनके बेटे तैयब सैफ़ी ने बीबीसी से कहा, 'हम अपनी सरकार से ये उम्मीद है कि हमारे साथ इंसाफ होगा. योगी आदित्यनाथ हमारे मुख्यमंत्री हैं, हमें पूरा भरोसा है कि वो हमारे साथ इंसाफ़ करेंगे और हमारे पिता से मारपीट करने वाले सभी लोगों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा."

ये है 16 जून का बीबीसी को दिया बयान.

बदलते बयान

14 जून को स्थानीय पत्रकार उस्मान ने भी समद सैफी का वीडियो पर इंटरव्यू किया था, इस वीडियो में अपना परिचय बताते हुए उन्होंने कहा था, "मेरा नाम सूफी अब्दुल समद है. मैं बेहटा जा रहा था. गोलचक्कर पर नहर के पास कुछ ऑटो वालों ने मुझे बैठाया था. बाद में ऑटो में दो लड़के और चढ़ गए. उन्होंने मेरी कनपटी पर तमंचा रख दिया और मुझे जंगल में एक मकान में ले गए. मेरे साथ बहुत मारपीट की गई. मुझे पाकिस्तानी और आतंकवादी बोला गया. मुझे धमकाया गया कि हम अब तक 19 मुसलमानों को मार चुके हैं, तुम्हें भी मार देंगे. मैं बहुत चिल्लाता रहा. वो जयश्री राम के नारे लगा रहे थे."

अनूपशहर में उनके घर के आसपास रहने वाले अधिकतर लोग अपनी पहचान जाहिर करके मीडिया से बात करने को तैयार नहीं हुए. जिन लोगों से हमने बात की उनका कहना था कि समद सैफ़ी का परिवार लकड़ी और लौहे का काम करता है. उनके पीर या सूफी होने के बारे में किसी ने जानकारी नहीं दी.

पड़ोसियों का कहना था कि यदि वो बाबा या सूफी का काम करते हैं तो इस बारे में उन्हें जानकारी नहीं है. आसपास के मौहल्लों में रहने वाले लोग भी उनका हालचाल लेने घर आए थे.

ऐसे ही एक युवक ने कहा, "बुजुर्ग की दाढ़ी काटे जाने का वीडियो देखकर मुझे बहुत अफसोस हुआ. हिंदुस्तान में इस तरह की घटनाएं नहीं होनी चाहिए."

एफ़आईआर

अब्दुल समद सैफी दावा करते हैं कि समद पहले 06 जून को लोनी थाने गए थे और अपनी तहरीर दी थी. इस तहरीर में उन्होंने अज्ञात युवकों पर मारपीट करने और जय श्री राम का नारा लगाने के लिए मजबूर करने के आरोप लगाए थे.

जबकि उम्मैद पहलवान कहते हैं कि उन्हें फोन कॉल के जरिए लोगों ने समद सैफ़ी के साथ हुई मारपीट के बारे में पता चला. जब वो समद सैफ़ी से मिलने पहुँचे तो उन्होंने बताया कि वो लोनी थाने गए थे जहां सिपाहियों ने उन्हें दो हज़ार रुपए देकर वापस भेज दिया. उनकी तहरीर पर कोई कार्रवाई पुलिस ने नहीं की. जब पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज नहीं की तो मैं उन्हें अपने साथ फ़ेसबुक लाइव पर लाया और उसके दो घंटे बाद ही मुक़दमा दर्ज हो गया.

उम्मैद पहलवान का दावा है कि वो समद सैफ़ी या उनके परिवार में किसी को नहीं जानते थे. वही इराज़ राजा कहते हैं, "ऐसा हो सकता है कि थाने में तहरीर देने से पहले ही सूफ़ी समद सैफ़ी उम्मैद पहलवान के संपर्क में आ गए हों. हम इस बात की जांच कर रहे हैं कि पीड़ित और उम्मैद पहलवान कब संपर्क में आए."

ग़ाज़ियाबाद पुलिस ने 06 जून को ऐसी कोई तहरीर मिलने से इनकार किया है.

इराज राजा कहते हैं, " हमें 06 जून को कोई तहरीर नहीं मिली है. हमें नहीं पता कि परिवार इस तरह की तहरीर की बात क्यों कर रहा है. पुलिस को तहरीर 07 जून को मिली थी और उसी आधार पर पहले अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया था. पीड़ित बुजुर्ग ने तहरीर में कहा था कि उन्हें जंगल ले जाया गया, लेकिन हमला परवेश गुर्जर के घर में हुआ है जहां चारों तरफ पक्का मकान है."

पुलिस का कहना है कि इंतेज़ार के कहने पर सद्दाम अब्दुल समद को लेकर परवेश गुर्जर के घर पहुंचा था. बाद में वहां आदिल, इंतेज़ार और कल्लू गुर्जर भी आ गए.

ग़ाज़ियाबाद पुलिस के मुताबिक ये सभी लोग हमले में शामिल थे और इन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया है. उनके मुताबिक हमले में सात-आठ लोग शामिल रहे होंगे. बाकी की पहचान कर ली गई है, उन्हें जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

वहीं बीबीसी से बातचीत में अब्दुल समद सैफ़ी ने कहा कि उन पर हमला करने वालों में कोई भी मुसलमान व्यक्ति शामिल नहीं था.

लोनी क्षेत्र के सर्किल ऑफ़िसर अतुल सोनकर कहते हैं, " अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कराने की वजह से पुलिस को पड़ताल करने में भी दिक़्कतें आईं. यही वजह कि गिरफ़्तारी करने में छह दिन लग गए. यदि अभियुक्तों की पहचान पहले ही ज़ाहिर कर दी गई होती तो उन्हें तुरंत गिरफ़्तार कर लिया गया होता."

भाजपा का पक्ष

भाजपा के प्रवक्ता शलभ मणि त्रिवाठी ने ट्विटर पर दो वीडियो जारी किया है. एक में अभियुक्त परवेश बुज़ुर्ग से पूछताछ रहा है और समद सैफ़ी ये स्वीकार कर रहे हैं कि उन्होंने इंतेज़ार के कहने पर प्रवेश के घर में ताबीज़ दिया था. दूसरे वीडियो में समद सैफ़ी को पीटने वाले अभियुक्त सद्दाम का बयान है.

ग़ाज़ियाबाद पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि ये वीडियो उनके संज्ञान में है और इसकी जांच की जा रही है. अतुल सोनकर कहते हैं, 'ये वीडियो बुज़ुर्ग पर हमले के दौरान रिकॉर्ड किए गए वीडियो का हिस्सा हो सकता है.'

वीडियो वायरल किसने किया?

ग़ाज़ियाबाद पुलिस के मुताबिक बुज़ुर्ग पर हमले का वीडियो अभियुक्त परवेश गुर्जर के मोबाइल फ़ोन से बनाया गया है. हालांकि ये वीडियो सोशल मीडिया पर सबसे पहले किसने वायरल किया ये स्पष्ट नहीं है.

वीडियो का एडिटेड हिस्सा सबसे पहले वायरल हुआ था जिससे आवाज़ हटा दी गई थी. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सबसे पहले वीडियो वायरल करने वाले व्यक्ति की पहचान की जा रही है उसे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा.

वहीं उम्मैद इदरीसी आरोप लगाते हैं कि ये वीडियो सबसे पहले परवेश गुर्जर ने ही अपनी वॉल पर पोस्ट किया था. उनका आरोप है, "परवेश ने हिंदुओं में अपनी पैठ बनाने के लिए ये वीडियो बनाया और जारी किया."

ऐसे कई सवाल अब भी हैं जिनके जवाब मिलना बाक़ी हैं :

  • यदि अब्दुल समद हमलावरों को जानते थे तो उन्होंने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ FIR क्यों लिखवाई?
  • सबसे पहले किसने वीडियो एडिट करके पोस्ट किया?
  • क्या वीडियो से मूल ऑडियो हटाया गया, हाँ तो क्यों?
  • मूल वीडियो कहाँ है?
  • पुलिस का दावा है कि वीडियो सिर्फ़ परवेश के फोन में था. फिर ये वीडियो बाकी लोगों के पास कैसे पहुंचा. वीडियो का दूसरा हिस्सा जो शलभ मणि ने ट्वीट किया है वो बाहर कैसे आया?

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