You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
उत्तर प्रदेश में पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की मौत पर हंगामा, विपक्ष ने योगी सरकार को घेरा, हत्या का मामला दर्ज
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ ज़िले में पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की रविवार रात एक ईंट भट्ठे के किनारे संदिग्ध हालात में मौत हो गई. पुलिस इस मौत को दुर्घटना बता रही थी जबकि परिजनों को आशंका है कि उनकी हत्या हुई है. इस मामले को लेकर राजनीति भी गरमा गई.
कांग्रेस की महासचिव और उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर मामले में यूपी की योगी सरकार को घेरा है.
सुलभ श्रीवास्तव एबीपी न्यूज़ के संवाददाता थे.
प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक आकाश तोमर ने बीबीसी को बताया कि प्रथमदृष्ट्या यह दुर्घटना ही लग रही है, लेकिन हम इसकी जाँच करा रहे हैं. एसपी आकाश तोमर का कहना था, "घटना के वक़्त कुछ प्रत्यक्षदर्शी भी मौजूद थे. उनका कहना है कि यह दुर्घटना ही है और जानकारी पोस्टमॉर्टम की रिपोर्ट आने के बाद ही मिल पाएगी."
हत्या का मामला दर्ज़
हालांकि अब पुलिस ने उनकी पत्नी की तहरीर पर अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ हत्या की धाराओं में एफ़आईआर दर्ज की है.
प्रयागराज ज़ोन के एडीजी प्रेम प्रकाश ने मीडिया को बताया कि परिवार को सुरक्षा भी मुहैया कराई गई हैं और परिवार की मांग का पूरा ख्याल रखा जाएगा.
एडीजी प्रेम प्रकाश ने सुलभ के पत्र पर सफ़ाई देते हुए कहा, "कल दोपहर को ही लेटर मिला था जिसे तुरंत प्रतापगढ़ के एसपी को फॉरवर्ड कर दिया गया था. एसपी ने तुरंत सुलभ से बात भी कर ली थी. प्रभारी एसपी ने उनसे बात कर हर तरह की मदद का भरोसा दिलाया था."
अब तक पुलिस सुलभ श्रीवास्तव की मौत को हादसा ही मान रही थी.
घटना से एक दिन पहले ही यानी 12 जून को सुलभ श्रीवास्तव ने इलाहाबाद ज़ोन के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक और प्रतापगढ़ के पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर अपनी हत्या की आशंका जताई थी. पत्र में उन्होंने लिखा था कि शराब माफ़िया से उनकी जान को ख़तरा है क्योंकि उन्होंने एक ख़बर लिखी थी जिसे लेकर उन्हें धमकियाँ मिल रही थीं और दो दिन से उनका पीछा किया जा रहा था.
स्थानीय पत्रकार मनोज त्रिपाठी के मुताबिक़, "असलहा फ़ैक्टरी पर कार्रवाई की ख़बर कवर करके रात नौ बजे के क़रीब सुलभ श्रीवास्तव लालगंज से मुख्यालय की ओर आ रहे थे. रास्ते में यह हादसा हुआ. पीछे से आ रहे साथी पत्रकारों ने उन्हें ज़िला अस्पताल में भर्ती कराया जहाँ कुछ ही देर बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया."
सुलभ श्रीवास्तव की पत्नी रेणुका श्रीवास्तव का कहना है कि जब से उन्होंने शराब माफ़िया के ख़िलाफ़ ख़बर चलाई थी तभी से कुछ लोग उनके पीछे पड़े थे. बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, "जब बड़े अफ़सरों को उन्होंने पत्र लिखा था तो मोबाइल पर हमें दिखाया भी था. घर पर बता भी रहे थे कि कुछ लोग पीछे पड़े हैं, धमकी दे रहे हैं. प्रशासन को पत्र इसलिए लिखा था कि शायद सुरक्षा मिल जाएगी. लेकिन उससे पहले ही सब कुछ चला गया."
योगी सरकार पर निशाना
उधर, पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की मौत को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है. आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इसे हत्या क़रार दिया है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, "शराब माफ़ियाओं के ख़िलाफ़ ख़बर चलाने के कारण यूपी में एक पत्रकार की हत्या हो जाती है जबकि एक दिन पहले सुलभ जी ने एडीजी को पत्र लिखकर हत्या की आशंका जताई थी, लेकिन सब सोते रहे."
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव की मौत को लेकर योगी सरकार पर हमला किया है. प्रियंका गांधी ने सवाल किया है कि 'क्या जंगलराज को पालने-पोसने वाली यूपी सरकार के पास पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव जी के परिजनों के आंसुओं का कोई जवाब है?'
प्रतापगढ़ के एसपी आकाश तोमर से जब बीबीसी ने सुलभ श्रीवास्तव के पत्र पर हुई कार्रवाई के संबंध में पूछा तो उनका जवाब था, "मैं कई दिन से छुट्टी पर था. आज ही मैंने ज्वॉइन किया है. उनके पत्र पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी जानकारी लेने की कोशिश कर रहा हूँ."
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)