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मणिपुर बीजेपी अध्यक्ष की मौत के दिन एक फ़ेसबुक पोस्ट के कारण लगा NSA
- Author, दिलीप कुमार शर्मा
- पदनाम, जोरहाट से, बीबीसी हिंदी के लिए
मणिपुर सरकार ने इम्फ़ाल स्थित पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम और राजनीतिक कार्यकर्ता एरेन्ड्रो लेचोम्बाम को उनकी एक फ़ेसबुक पोस्ट के लिए गिरफ़्तार करते हुए दोनों पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (एनएसए) लगाया है.
इम्फाल वेस्ट के ज़िला मजिस्ट्रेट किरणकुमार के एक आदेश के बाद मंगलवार को दोनों को जेल भेज दिया गया है.
असल में बीते गुरुवार को मणिपुर बीजेपी के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर एस टिकेंद्र सिंह का कोरोना संक्रमित होने के कारण निधन हो गया था और उसी दिन पत्रकार किशोरचंद्र और राजनीतिक कार्यकर्ता एरेन्ड्रो ने अपनी फ़ेसबुक पोस्ट पर लिखा था, "गाय का गोबर और गोमूत्र काम नहीं करता है. रेस्ट इन पीस."
इस फ़ेसबुक पोस्ट को कथित अपमान के तौर पर लेते हुए प्रदेश बीजेपी के प्रदेश महासचिव पी. प्रेमानंद मीतेई और प्रदेश उपाध्यक्ष उषाम देबेन सिंह ने दोनों के ख़िलाफ़ इम्फ़ाल पुलिस थाने में एक मामला (76 (5) 2021) दर्ज करवाया था.
इसके बाद मणिपुर पुलिस ने किशोरचंद्र और एरेन्ड्रो के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती और संज्ञेय अपराध के तहत आईपीसी की धारा 153-A/505(b) (2) r/w 201/ /295-A/503/504/34 लगाते हुए गुरुवार को उनके घर से गिरफ़्तार कर लिया था.
आईपीसी की धाराओं के बाद एनएसए
किशोरचंद्र और एरेन्ड्रो के वकील चोंगथाम विक्टर ने बीबीसी से कहा, "दोनों को सोशल मीडिया की एक पोस्ट के लिए गिरफ़्तार किया गया है. दरअसल उन्होंने चिकित्सा विज्ञान के आधार पर गाय के गोबर और गोमूत्र के इस्तेमाल पर अपनी बात कही थी. उन लोगों ने अपनी पोस्ट में किसी भी व्यक्ति का नाम उल्लेख नहीं किया था."
"केवल अपने वाक्य के अंत में रेस्ट इन पीस लिखा था. यह किसी भी तरह सरकार की आलोचना नहीं थी. उन लोगों ने केवल चिकित्सा विज्ञान में भरोसा करने के तर्क पर अपनी बात कही थी. चूकि दोनों पर एनएसए लगाया गया है इसलिए मैं एक बार फिर से संबंधित प्राधिकारी के समक्ष अपनी प्रस्तुति रखूँगा, बाक़ी मामले को ख़त्म करना या नहीं करना उन पर निर्भर करेगा."
वकील चोंगथाम के अनुसार पुलिस ने आईपीसी की धारा के तहत जो मामला दर्ज किया था, उसमें दोनों की ज़मानत हो गई थी लेकिन इसके बाद एनएसए लगा दिया गया.
पत्रकार किशोरचंद्र और राजनीतिक कार्यकर्ता एरेन्ड्रो की गिरफ़्तारी और उन पर लगाए गए एनएसए के इस मामले को पाँच दिन बीत चुके हैं लेकिन ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन समेत राज्य में पत्रकारों के लिए मौजूद किसी भी संगठन ने अबतक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
बीजेपी की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले में पत्रकार का जिक्र करते हुए मणिपुर बीजेपी के प्रवक्ता चोंगथम बिजॉय ने बीबीसी से कहा, "यह सज्जन अक्सर आदतन ऐसे मौखिक अपराध करते रहे हैं. पहले भी वह हमारी पार्टी के ख़िलाफ़ अपमानजनक बयानों के लिए जेल जा चुके है. उस दौरान भी उनपर एनएसए लगाया गया था लेकिन अदालत ने बाद में किसी तरह एनएसए तो हटा दिया था लेकिन वह क़रीब छह महीने तक जेल में रहे थे."
"मेरा यह मानना था कि शायद उनकी दिमाग़ी हालत ठीक नहीं है. क्योंकि जब हमारी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की कोविड के कारण मौत हुई तो यह पूरी पार्टी के लिए एक बहुत दुखद क्षण था और वह व्यक्ति उस समय गाय के गोबर और गौमूत्र से संबंधित अपमानजनक बाते सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ख़ुशी ज़ाहिर कर रहा था. एक सभ्य समाज में यह कैसे स्वीकार्य हो सकता है. हमारी पार्टी में बड़ी संख्या में युवा कार्यकर्ता हैं और इस तरह के अपमानजनक बयान से पार्टी के अंदर तनाव का माहौल उत्पन्न हो सकता है. इससे हिंसा भी हो सकती है."
क्या एक पत्रकार और राजनीतिक कार्यकर्ता पर एनएसए लगाने को आप उचित मानते है? इस सवाल का जवाब देते हुए चोंगथम बिजॉय कहते है, "एनएसए एक ऐसा क़ानून है जो इस तरह के लोगों पर ही उपयोग होता है. क्योंकि अपराध की प्रकृति को देखते हुए कई बार सिविल कोर्ट ज़मानत देने के लिए बाध्य हो जाते है. क्योंकि आरोप-पत्र इतनी जल्दी दाखिल नहीं किया जा सकता, लिहाजा मेरा मानना है कि किशोरचंद एक पत्रकार होने के लायक नहीं है जिस तरह का उनका व्यवहार और आचरण है."
'मणिपुर में प्रेस की आज़ादी'
राज्य के वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप फंजोबम के अनुसार साल 2017 में बीजेपी सरकार आने के बाद से यहाँ के पत्रकारों पर काफ़ी दबाव है.
वह कहते है, "फ़ेसबुक पर पोस्ट लिखना कोई अपराध नहीं हो सकता. जबकि उन लोगों ने किसी का नाम उल्लेख नहीं किया था. लोकतंत्र में ऐसी आलोचना की जा सकती है लेकिन इसके लिए एनएसए लगा कर जेल में डाल देना कहीं से भी उचित नहीं हो सकता. क्योंकि उस दिन बीजेपी के एक बड़े लीडर का निधन हो गया था. इसलिए उन लोगों द्वारा डाली गई पोस्ट देखने में अच्छी नहीं लग रही थी."
"लेकिन इसे इतना बड़ा अपराध भी घोषित नहीं किया जा सकता. बीते कुछ सालों से मणिपुर में प्रेस की आज़ादी बहुत कम हुई है. पहले ऐसा था कि अगर कोई पत्रकार भारतीय सेना के पर कुछ लिखता था तो सेना की तरफ़ से स्पष्टीकरण आता था प्रकाशित करने के लिए लेकिन यह सरकार सीधे गिरफ़्तार कर लेती है. ऐसी कार्रवाई को लोकतंत्र में सही नहीं ठहराया जा सकता."
हालांकि एफ़आईआर में ख़ासकर एरेन्ड्रो के नाम पर की गई शिकायत में बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष उषाम देबेन सिंह ने उल्लेख किया है कि एरेन्ड्रो ने अपने फ़ेसबुक पोस्ट में जानबूझकर अपमान करते हुए लिखा था, "कोरोना का इलाज गोबर और गोमूत्र नहीं है. इसका इलाज विज्ञान और सामान्य ज्ञान है. प्रोफ़ेसर जी आरआईपी."
इससे पहले भी किशोरचंद्र और एरेन्ड्रो को राज्य की बीजेपी सरकार की आलोचना करने और राजद्रोह के आरोप में दो बार गिरफ़्तार किया जा चुका है.
अपने फ़ेसबुक पर मणिपुर के मुख्यमंत्री बीरेन सिंह पर विवादित टिप्पणी करने के बाद पत्रकार किशोरचंद्र वांगखेम को 133 दिन जेल में रहना पड़ा था. बाद में मणिपुर हाई कोर्ट ने उन पर लगाए गए एनएसए और दर्ज किए गए मुक़दमे को ख़ारिज कर दिया था.
जेल से बाहर आने के बाद किशोरचंद्र ने बीबीसी से बात करते हुए कहा था कि जेल जाकर वह और मज़बूत हो गए हैं और आगे भी लोगों की आवाज़ उठाते रहेंगे.
जबकि एरेन्ड्रो पीपुल्स रिसर्जेंस एंड जस्टिस एलायंस के संस्थापक हैं, जो एक राजनीतिक दल है. साल 2017 के मणिपुर विधानसभा चुनाव में नागरिक अधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला ने इसी पार्टी से चुनाव लड़ा था.
एरेन्ड्रो अपने फ़ेसबुक पर देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को लेकर लगातार आलोचनात्मक तरीक़े से अपनी बात कहते आ रहें है. वह बीजेपी सरकार के कामकाज को लेकर भी आलोचना करते रहे हैं.
हाल ही में कोरोना वायरस से बचाव के लिए लोगों के एक समूह द्वारा गाय के गोबर को अपने शरीर पर मलने की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुई थीं.
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