कोरोना: जानिए 'एंटीबॉडी कॉकटेल' दवा से जुड़े हर सवाल का जवाब

'एंटीबॉडी कॉकटेल'

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    • Author, सरोज सिंह
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

दिल्ली से सटे गुरुग्राम के मेदांता मेडीसिटी अस्पताल में 84 साल के बुज़ुर्ग को कोरोना संक्रमण के इलाज के दौरान 'एंटीबॉडी कॉकटेल' दवा दी गई और वो ठीक भी हो गए. उसके बाद से ही भारत में इस दवा के बारे में कई तरह के सवाल पूछे जा रहे.

भारत सरकार ने इस कोविड-19 के इलाज में इस दवा के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंज़ूरी दी.

फ़िलहाल मेदांता अस्पताल और देश भर के अपोलो अस्पताल में ये दवा कोविड-19 के इलाज के इस्तेमाल में लाई जा रही है. लेकिन दवा कैसे काम करती है, कौन ले सकता है, मरीज़ को कहाँ से मिलेगी, इन तमाम सवालों के जवाब जानने के लिए बीबीसी ने बात की गुरुग्राम मेदांता मेडीसिटी के चेयरमैन डॉक्टर नरेश त्रेहन से.

'एंटीबॉडी कॉकटेल

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क्या है कोविड-19 के इलाज में एंटीबॉडी कॉकटेल दवा?

स्विस कंपनी रॉश ने ये दवा बनाई है. इसमें दो एंटीबॉडी का मिश्रण कृत्रिम तरीक़े से लैब में तैयार किया गया है, जिसे मोनोक्लोनल एंटीबॉडी कॉकटेल कहते हैं. ये दवा हैं -कैसिरिविमाब (Casirivimab) और इम्डेविमाब (Imdevimab)

कैसे काम करती है दवा?

शरीर के अंदर जैसे ही दवा पहुँचती है ये वायरस को ब्लॉक कर देती है जिस वजह से कोरोना वायरस दूसरे सेल्स ( कोशिकाओं ) के अंदर नहीं प्रवेश कर पाता. ऐसा इसलिए संभव हो पाता है क्योंकि उसे शरीर के अंदर फैलने और बढ़ने के लिए ज़रूरी पोशक तत्व नहीं मिलते. मतलब ये कि दोनों एंटीबॉडी मिलकर वायरस को मल्टीप्लाई शरीर में मल्टीप्लाई होने से रोकते हैं और इस तरह से वायरस को न्यूट्रीलाइज़ (बेअसर) कर देते हैं.

दुनिया में कहाँ-कहाँ इस्तेमाल हुई ये दवा?

दावा है कि पिछले साल अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ये दवा कोविड-19 बीमारी के इलाज के दौरान दी गई थी. दवा देने के दो-तीन दिन के अंदर ही वो अपने काम पर लौट पाए थे. पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप का कोविड-19 टेस्ट जैसे ही पॉज़िटिव आया तुरंत ही ये एंटीबॉडी कॉकटेल दवा उन्हें दे दी गई थी, जिस वजह से शरीर में वायरस का फैलाव तुंरत रोकने में सफलता मिली.

कोविड-19 की दवा के तौर पर अमेरिका और यूरोप के कई देशों में इसका इस्तेमाल हो रहा है. संक्रमण रोकने में ये कितनी कारगर है इस पर शोध भी हुआ है. तीन फ़ेज़ के ट्रायल्स में नतीजे अच्छे रहे हैं. भारत में इसे अब मंज़ूरी मिली है. रॉश कंपनी के साथ भारत की सिप्ला कंपनी ने क़रार किया है. भारत की दूसरी फ़ॉर्मा कंपनियाँ भी भारत में इस तरह के एंटीबॉडी कॉकटेल बनाने की तैयारी में है.

एंटीबॉडी कॉकटेल'

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इमेज कैप्शन, 84 साल के बुजुर्ग जिन्हें मेदांता अस्पताल में एंटीबॉडी कॉकटेल दवा दी गई.

कोविड-19 के मरीज़ को कब दी जाए ये दवा?

डॉक्टर त्रेहन के मुताबिक़ जैसे ही मरीज़ का कोविड-19 टेस्ट पॉज़िटिव आए वैसे ही ये दवा डॉक्टरों की सलाह पर 48-72 घंटे के अंदर दी जा सकती है. बीमारी के पता चलने के बाद जितनी जल्दी ये दवा दी जा सके उतना बेहतर होता है. इसके पीछे की वजह ये हैं कि शरीर के अंदर वायरस के प्रवेश करने के पहले सात दिन में ही वायरस सबसे तेज़ी से फैलता है. जितनी जल्द वायरस के मल्टीप्लाई होने की रफ़्तार पर लगाम लगा पाएँगे, उतनी जल्दी ही मरीज़ ठीक होगा.

क्या हर कोरोना मरीज़ ये दवा ले सकता है?

  • ये दवा कोविड-19 के माइल्ड से मॉडरेट मरीज़ों के लिए है. लेकिन डॉक्टर की सलाह ज़रूरी है.
  • डायबटीज़, ब्लडप्रेशर, कैंसर, किडनी और लीवर की दूसरी बीमारी से जूझ रहे मरीज़, ऐसे मरीज़ जिनकी उम्र ज़्यादा उन पर इसके इस्तेमाल की तुरंत सलाह दी जाती है. ऐसे मरीज़ों में इस्तेमाल करने पर 70 फ़ीसद तक उन्हें अस्पताल जाने से बचाया जा सकता है. इसके अलावा रिस्क फ़ैक्टर की वजह से जिन मरीज़ों को अस्पताल तुरंत ही ले जाने की नौबत आई, उनमें से भी 70 फ़ीसद की जान बच गई. ऐसा शोध में पाया गया है.
  • 12 साल से ज़्यादा उम्र के बच्चों को भी ये दवा दी जा सकती है अगर उनका वज़न 40 किलो से ज़्यादा है.
  • लेकिन जो मरीज़ ऑक्सीजन स्पोर्ट पर हैं, अस्पताल में भर्ती है, जिन्हें सीवियर कोविड-19 संक्रमण है, जिनके फेफड़ों में वायरस घर बना चुका है, उन पर इस दवा का असर नहीं होता. वायरस के शरीर में संक्रमण फैलने के सात से 10 दिन के अंदर लिया जाए तो ही इस दवा का असर देखने को मिलता है.

घर पर रह कर आइसोलेट करने वाले मरीज़ क्या करें?

इस दवा को डॉक्टरों की देखरेख में ही देने की सलाह दी जाती है. इसके लिए आपको डॉक्टर के पास अस्पताल जाकर ही इसे ओपीडी में इंजेक्शन लगवाना होगा. इंजेक्शन लगने के 1 घंटे बाद तक, मरीज़ को डॉक्टरों की देख-रेख में रहने की आवश्यकता पड़ती है, ताकि कोई रिएक्शन हो तो तुंरत देखा जा सके.

फिलहाल कुछ गिने-चुने अस्पतालों में इस दवा के लिए स्टॉफ को ट्रेनिंग दी गई है. जिसमें मेदांता और अपोलो अस्पताल शामिल हैं. फ़िलहाल इसे बाज़ार से आम आदमी नहीं ख़रीद सकता.

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एक मरीज़ को दवा की कितनी डोज़ चाहिए ?

इस एंटीबॉडी कॉकटेल की 1200मिलीग्राम (कैसिरिविमाब 600 मिलीग्राम और इम्डेविमाब 600 मिलीग्राम) एक डोज़ ही हर मरीज़ को दी जानी चाहिए. एक डोज़ की कीमत 59 हज़ार 750 रुपये हैं. इस दवा के एक पैक से दो मरीज़ो का इलाज किया जा सकता है. इसे दो से आठ डिग्री तापमान पर साधारण फ़्रिज में ही स्टोर किया जा सकता है.

अपोलो अस्पताल की तरफ़ से जारी प्रेस रिलीज़ में कहा गया है कि पहली खेप में भारत को दवा के एक लाख पैकेट मिले हैं यानी आज की तारीख़ में दो लाख लोगों का इलाज इस दवा से संभव है.

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एंटीबॉडी कॉकटेल के साइड इफे़क्ट?

दुनिया भर में कई हज़ार मरीज़ों पर इसका इस्तेमाल हो चुका है, लेकिन किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है. अब तक इसके कोई बड़े साइड इफे़क्ट देखने को नहीं मिले हैं. माइनर साइड इफ़ेक्ट में कुछ एलर्जी या ऐनाफ़लैक्सिस जैसे रिएक्शन देखने को मिले हैं. चूंकि इस दवा को भारत में हाल ही में इमरजेंसी इस्तेमाल की इजाज़त मिली है, इस वजह से ट्रेंड डॉक्टरों और अस्पताल में ही लगाने की सलाह दी जा रही है. ताकि मरीज़ों का फॉलोअप भी किया जा सके.

कोविड-19 होने के पहले एहतियात के तौर ली जा सकती है?

डॉक्टर एहतियात के तौर पर इस दवा के इस्तेमाल की सलाह नहीं देते. शरीर में इसका असर 3-4 हफ़्ते तक ही रहता है. जब तक कोविड-19 की आरटीपीसीआर टेस्ट रिपोर्ट पॉज़िटिव ना आए, इसे लेने की सलाह नहीं दी जा रही. लेकिन कोरोना वैक्सीन लेने के बाद अगर आप संक्रमित होते हैं, उस सूरत में ये दवा ली जा सकती है.

कोविड-19 के वेरिएंट पर दवा का असर

डॉक्टर त्रेहन का दावा है कि चूंकि ये एंडीबॉडी कृत्रिम तरीक़े से लैब में बनाई गई है, नए वेरिएंट आने पर भी ये बेअसर नहीं होगी. कुछ बदलाव के साथ कोविड-19 के नए वेरिएंट के ख़िलाफ़ ये आसानी से असरकारी बनाई जा सकती है.

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