जम्मू कश्मीर: रोहिंग्या 'होल्डिंग सेंटर' में कोरोना संक्रमण, 53 क़ैदी पॉज़िटिव

हीरानगर होल्डिंग सेंटर का फ़ाइल चित्र

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    • Author, मोहित कंधारी
    • पदनाम, जम्मू से बीबीसी के लिए

जम्मू-कश्मीर के कठुआ ज़िले में हिरासत में रखे गए 53 रोहिंग्या मुसलमान कोरोना संक्रमित हो गए हैं. ज़िले के हीरानगर के 'होल्डिंग सेंटर' यानी उपजेल में रखे गए बाक़ी रोहिंग्या मुसलमानों को संक्रमण से बचाने के लिए 'पॉज़िटिव' पाए गए लोगों को आइसोलेट कर दिया गया है.

संक्रमित पाए गए बुज़ुर्ग रोहिंग्या मुसलमानों के रिश्तेदार चाहते हैं कि उन्हें रिहाकर दिया जाए ताकि घर पर उनकी देखभाल हो सके.

जम्मू में मार्च के पहले हफ़्ते में एक विशेष अभियान चलाया गया था. उसी दौरान इलाक़े में ग़ैर-क़ानूनी ढंग से रह रहे रोहिंग्या की शिनाख़्त कर उन्हें होल्डिंग सेंटर में भेजा गया था.

रोहिंग्या मुसलमान

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कठुआ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर अशोक चौधरी ने बीबीसी को बताया, "बीते सप्ताह सामान्य जाँच के दौरान सेंटर के कुछ लोगों में कोरोना संक्रमण के लक्षण नज़र आये थे जिसके बाद सोमवार से तीन दिन का कैंप लगाया गया और सेंटर में रह रहे लोगों की जाँच की गई."

डॉ अशोक चौधरी ने बताया कि जाँच के दौरान 53 रोहिंग्या संक्रमित पाए गए हैं और उन्हें सेंटर में ही अलग-अलग जगहों पर रखा गया है. उन्होंने ये भी बताया कि अप्रैल के पहले हफ़्ते में सेंटर में रखे गए 45 वर्ष से ऊपर की आयु वाले 58 रोहिंग्या लोगों को टीका भी लगाया गया था.

कठुआ के ज़िलाधिकारी राहुल यादव ने बीबीसी को बताया, "कोरोना पॉज़िटिव पाए गए सभी रोहिंग्या में सामान्य लक्षण हैं. किसी को अस्पताल नहीं भेजा गया है. होल्डिंग सेंटर में तैनात डॉक्टर ही सबकी निगरानी कर रहे हैं."

होल्डिंग सेंटर में क्यों है रोहिंग्या?

जम्मू में बिना वैध काग़ज़ों के रहने वाले रोहिंग्या मुसलमानों को होल्डिंग सेंटर में रखा गया है.

जम्मू कश्मीर पुलिस ने छह मार्च को एक बयान जारी कर कहा था, "जम्मू में अवैध रूप से रह रहे जिन आप्रवासियों के पास पासपोर्ट अधिनियम की धारा (3) के मुताबिक़, वैध यात्रा दस्तावेज़ नहीं थे, उन्हें हीरानगर के 'होल्डिंग सेंटर' भेजा गया है "

सुप्रीम कोर्ट

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जम्मू कश्मीर के गृह विभाग की फ़रवरी 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक़ पाँच ज़िलों के 39 शिविरों में 6523 रोहिंग्या रहते हैं.

पुलिस ने रोहिंग्या लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई ऐसे समय की थी जब उनमें से कुछ के पास से फ़र्ज़ी आधार कार्ड और पासपोर्ट बरामद होने के दावे किए गए थे.

सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्याओं को हिरासत में रखने और उन्हें वापस उनके देश भेजने के मामले की सुनवाई करते हुए अप्रैल में कहा था कि किसी भी रोहिंग्या को तब तक वापस म्यांमार नहीं भेजा जाएगा, जब तक उन्हें वापस भेजने के लिए उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती है.

टीकाकरण की माँग

होल्डिंग सेंटर में कोरोना संक्रमण की ख़बर आने के बाद रोहिंग्या बंदियों के परिवार वाले भी चिंतित हैं. जम्मू के भटिंडी इलाक़े में रहने वाले अब्दुल ग़फ़ूर ने बताया कि उनके परिवार के पाँच सदस्य हीरानगर के होल्डिंग सेंटर में बंद हैं और लॉकडाउन के चलते वो एक महीने से उनसे नहीं मिल सके हैं.

रोहिंग्या मुसलमान

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उन्होंने कहा, "मैं बहुत चिंतित हूँ क्योंकि हमें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि कौन बीमार है और कौन नहीं." ग़फ़ूर ने सरकार से अपील की है कि 70 साल से ऊपर के रोहिंग्या मुसलमानों को रिहा कर दिया जाना चाहिए ताकि परिवार वाले उनकी देखभाल कर सकें.

मौलवी मुश्ताक़ ने कहा कि जेल में बंद रोहिंग्या को टीका लगाया गया है लेकिन जो लोग इस समय अलग-अलग कैंपों में रह रहे हैं उनका टीकाकरण अभियान शुरू नहीं किया गया है. उन्होंने सरकार से जम्मू के विभिन्न इलाक़ों में रह रहे रोहिंग्या परिवारों को टीका लगाने की माँग की है.

रोहिंग्या मुसलमान

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क़ैदियों का टीकाकरण

जम्मू-कश्मीर के जेल विभाग के उप महानिरक्षक डॉ मोहम्मद सुल्तान लोन ने बीबीसी को बताया कि केंद्र शासित प्रदेश की विभिन्न जेलों में 26 मई तक छह प्रतिशत से ज़्यादा बंदियों को कोरोना वायरस की वैक्सीन लगाई गई है. उन्होंने बताया कि अभी दो सेंट्रल और 10 ज़िला जेलों में क़रीब 4500 से ज्यादा क़ैदी हैं. 45 साल से ऊपर वाले 316 क़ैदियों का टीकाकरण हो चुका है. अनंतनाग ज़िला जेल में गुरुवार को टीकाकरण कैंप लगाया गया है.

पिछले हफ़्ते उधमपुर जेल के 479 में से 72 क़ैदी कोरोना संक्रमित पाए गए थे. डॉ लोन के मुताबिक़ उधमपुर जेल में 81 क़ैदियों को कोरोना वैक्सीन दी गयी है. भदरवाह जेल में 42, राजौरी में 53, कठुआ में 58, रियासी में छह, सेंट्रल जेल श्रीनगर में 38, बारामुल्ला में 10, पुलवामा में 28 क़ैदियों को वैक्सीन दी गयी है.

जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट के जस्टिस अली मोहम्मद मागरे की अध्यक्षता में क़ायम की गई उच्च स्तरीय समिति ने भी जम्मू कश्मीर सरकार से कहा है कि वो जेलों में बंद क़ैदियों के टीकाकरण अभियान में तेजी लाए.

उन्होंने जेलों के अंदर क़ैदियों की संख्या कम करने के लिए ये प्रस्ताव भी दिया था कि मामूली अपराधों के लिए जेल में बंद क़ैदियों को 90 दिन के पैरोल पे रिहा कर दिया जाना चाहिए.

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