भारत ने कोरोना महामारी के बीच चीन को दिया यह झटका- प्रेस रिव्यू

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भारत में 5जी तकनीक के ट्रायल में चीनी दूरसंचार कंपनियों को न शामिल करने के फ़ैसले को चीन ने चिंतित करने वाला और खेदजनक बताया है.
द हिंदू अख़बार के मुताबिक़, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने लंदन में ग्लोबल डायलॉग सिरीज़ इवेंट में बुधवार को भारत का नज़रिया पेश करते हुए कहा कि सीमा पर तनाव होने पर अन्य क्षेत्रों में अच्छे संबंध 'वास्तविक नहीं' हो सकते हैं.
हालांकि, जयशंकर ने 5जी मुद्दे का ख़ासतौर से ज़िक्र नहीं किया लेकिन कहा कि संबंधों पर भारत का नज़रिया बेहद विस्तृत है.
उन्होंने कहा, "एक ओर सीमा पर ख़ून-ख़राबा, टकराव, ज़बर्दस्ती, धमकी हो और फिर कहिए कि दूसरे क्षेत्रों में अच्छे रिश्ते बनाते हैं. यह वास्तविक नहीं है."
दूरसंचार विभाग ने मंगलवार को टेलिकॉम सर्विस प्रोइवाडर्स (टीएसपी) कंपनियों को 5जी तकनीक के ट्रायल की अनुमति दे दी थी.
इसके साथ ही ख़्वावे और ज़ेडटीई जैसी चीनी कंपनियां भारत में 5जी की रेस से बाहर हो गई थीं.

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टेलिकॉम मंत्रालय के बयान के अनुसार, "भारती एयरटेल लिमिटेड, रिलायंस जियो इन्फ़ोकॉम लिमिटेड, वोडाफ़ोन आइडिया लिमिटेड और एमटीएनएल टीएसपी आवेदनकर्ता हैं. इन टीएसपी कंपनियों ने मूल उपकरण निर्माताओं और टेक्नॉलजी प्रोवाइडर्स एरिक्सन, नोकिया, सैमसंग और सी-डॉट से क़रार किया है."
चीन ने क्या कहा
नई दिल्ली में चीनी दूतावास ने इस पर बयान जारी किया था, "चिंता और खेद व्यक्त करते हैं कि भारत में भारतीय टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ 5जी ट्रायल में चीनी दूरसंचार कंपनियों को शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई."
प्रवक्ता वांग शाचियन ने कहा, "उपयुक्त चीनी कंपनियां सालों से भारत में काम कर रही हैं, बड़ी संख्या में रोज़गार दे रही हैं और भारत के दूरसंचार के बुनियादी ढांचा निर्माण में योगदान दे रही हैं."
उन्होंने कहा कि 'ट्रायल से चीनी दूरसंचार कंपनियों को अलग हटाना उनके वैध अधिकारों और अभिरुचियों को नुक़सान पहुंचाएगा.'
बंगाल सरकार से केंद्र ने पूछा- अब तक रिपोर्ट क्यों नहीं मिली

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद राज्य में हुई हिंसा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से पूछा है कि उसने अब तक इस पर उसे रिपोर्ट क्यों नहीं दी.
द इंडियन एक्सप्रेस अख़बार सूत्रों के हवाले से लिखता है कि गृह मंत्रालय के राज्य सरकार को भेजे गए पत्र में हिंसा को न रोकने का आरोप लगाया गया है.
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव अलपन बंदोपाध्याय को गृह मंत्रालय से भेजे गए पत्र में तीन मई के पत्र का भी ज़िक्र है, जिसमें गृह मंत्रालय ने स्थिति पर रिपोर्ट जमा करने को कहा था.
पत्र के हवाले से अख़बार को मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, "अभी तक रिपोर्ट नहीं मिली है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा जारी है. इसका मतलब है कि प्रभावी तरीक़े अभी तक नहीं अपनाए गए हैं."
इसके साथ ही पत्र में यह भी कहा गया है कि अगर वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट नहीं मिली तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा.
'कोरोना के एक साल ने 23 करोड़ भारतीयों को बनाया ग़रीब'
कोविड-19 की एक साल की महामारी के दौरान भारत में 23 करोड़ भारतीय ग़रीबी में चले गए हैं.
इकोनॉमिक टाइम्स अख़बार ने अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की एक रिपोर्ट के हवाले से लिखा है कि ग्रामीण भारत में 15% तो वहीं शहरी भारत में 20% ग़रीबी बढ़ी है.
इसके अलावा कोरोना के कारण लागू की गई रोकटोक के कारण आर्थिक गतिविधियों में कमी आने से आय भी कम हुई हैं.
'स्टेट ऑफ़ वर्किंग इंडिया 2021: वन ईयर ऑफ़ कोविड-19' नामक रिपोर्ट में संकेत दिए गए हैं कि अगर भविष्य में फिर लॉकडाउन लगाया जाता है तो हालात और ख़राब हो सकते हैं.
लेबर मार्केट पर रिपोर्ट कहती है कि महामारी से पहले की तुलना के मुक़ाबले साल 2020 के आख़िर में 1.5 करोड़ मज़दूरों का काम चला गया था.
इसके साथ ही रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी 2020 में प्रति व्यक्ति औसत मासिक घरेलू आय जो 5,989 रुपये थी वो अक्तूबर 2020 में घटकर 4,979 हो गई थी.
भारत में 4.12 लाख संक्रमण के रिकॉर्ड मामले पाए गए

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भारत में बुधवार को कोरोना वायरस संक्रमण और मौतों के रिकॉर्ड मामले पाए गए हैं.
द टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार के मुताबिक़, बुधवार को देश में 4.12 लाख संक्रमण के मामले पाए गए जो पिछली बार के सबसे अधिक मामलों से 10 हज़ार अधिक हैं जबकि कल इसके कारण 3,980 लोगों की मौत हुई है.
भारत में अब तक सबसे अधिक संक्रमण के मामले 30 अप्रैल को पाए गए थे. उस समय एक दिन में 4.02 लाख नए संक्रमण के मामले सामने आए थे.
इतने रिकॉर्ड संक्रमण के मामले तब पाए गए हैं जब एक दिन में होने वाली कुल टेस्टिंग में कमी दर्ज की गई है.
मंगलवार को केवल 15.4 लाख सैंपल ही टेस्ट हुए जबकि उससे एक दिन पहले 16.6 लाख सैंपल टेस्ट हुए थे.
30 अप्रैल को जब रिकॉर्ड मामले सामने आए थे तब 19.4 लाख सैंपल की टेस्टिंग हुई थी. यानी के इस बार 4 लाख से कम सैंपल टेस्ट हुए और संक्रमण के मामले 4.12 लाख से अधिक पाए गए.
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