एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कोरोना पर मानी यह बात- प्रेस रिव्यू

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देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने कहा है कि कोरोना महामारी के कारण देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ रहे जबर्दस्त दबाव के कारण मरीज़ों के लिए अस्पताल में बेड का इंतज़ार करना देश में अधिक मौतों की एक वजह हो सकती है.

इंडियन एक्सप्रेस के दिए एक साक्षात्कार में गुलेरिया ने कहा कि देश में बीते नौ दिनों से लगातार संक्रमण के तीन लाख से अधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं.

उन्होंने कहा, "स्थिति से निपटने के लिए हम ट्राइगेजिंग नाम की एक रणनीति पर काम कर रहे हैं. जैसे कि अगर किसी मरीज़ की स्थिति बेहतर है और उसे ऑक्सीजन सिलिंडर की ज़रूरत नहीं है तो उसे बिना ऑक्सीजन वाले बेड में शिफ्ट किया जाए और उसे निगरानी में रखा जाए. अस्पताल को दो हिस्सों में बाँटा जाए, पहला उन मरीज़ों के लिए जिन्हें अधिक मात्रा में ऑक्सीजन की ज़रूरत है और दूसरा उन मरीज़ों के लिए जिन्हें कम ऑक्सीजन की ज़रूरत है."

उन्होंने कहा, "आज से पहले ट्राइगेजिंग जैसी रणनीति की ज़रूरत नहीं पड़ी लेकिन अब ये अहम होता जा रहा है. महामारी की पहली लहर में संक्रमितों की संख्या में धीरे-धीरे इज़ाफा हुआ लेकिन दूसरी लहर में जैसे संक्रमितों की संख्या में रॉकेट की तेज़ी से उछाल आया है. इस कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर इसका जबर्दस्त दवाब पड़ा रहा है. तेज़ी से मामले बढ़ रहे हैं जिस कारण संसाधनों की कमी हो रही है."

उन्होंने कहा कि देश में मौतों के आँकड़े बढ़ने की दो या तीन वजहें हो सकती हैं.

उन्होंने कहा कि "अगर मौतों की संख्या अधिक है और मौतों का प्रतिशत कम है तो स्थिति को समझने के लिए हमें और आँकड़ों की ज़रूरत होगी. दूसरा ये कि हाल में आए कुछ आँकड़े ये इशारा कर रहे हैं कि शायद वायरस के ब्रिटिश वेरिएंट के कारण अधिक संख्या में मौतें हो रही हैं. ये संभव है कि ये वेरिएंट अधिक संक्रामक होने के साथ-साथ अधिक मौतों के लिए भी ज़िम्मेदार हों."

अब तक की मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि कोरोना वायरस के भारतीय वेरिएंट के कारण देश में अधिक मौतें हो रही हैं. हालांकि अब तक विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारतीय वेरिएंट के अधिक घातक होने की पुष्टि नहीं की है.

तीसरा कारण उन्होंने ये बताया कि "संक्रमण के मामलों में तेज़ी से आए उछाल के कारण स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव पड़ा है. एसे में कई मरीज़ों को बेड नहीं मिल रहा और वो घरों में इलाज करा रहे हैं. ये मरीज़ जब तक अस्पताल पहुंचते हैं उनकी हालत गंभीर हो चुकी होती है. इस कारण भी मौतों के आँकड़े बढ़ सकते हैं."

कोरोना टेस्टिंग

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प्रादेशिक ट्रेनिंग सेंटर खोलगी सरकार

भारत के छोटे शहरों और कस्बों में कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार ने एम्स की मदद से प्रादेशिक ट्रेनिंग सेंटर खोलने का फ़ैसला किया है. डॉक्टर रणदीप गुलेरिया के अनुसार इन सेंटर्स में कोविड-19 को लेकर डॉक्टरों को तालीम दी जाएगी.

द हिंदू में छपी एक ख़बर के अनुसार शुक्रवार को हुए एक संवाददाता सम्मेलन में स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि मंत्रालय अब सप्ताह में कोरोना पर एक बैठक करेगा.

केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बच्चों के लिए कोविड-19 से जुड़ी गाइडलाइन्स जारी की जिसमें बताया गया है कि किन बच्चों को हॉस्पिटल में भर्ती करने की ज़रूरत पड़ सकती है.

सरकार ने कहा है कि जिन बच्चों को संक्रमण के कारण सांस लेने में तकलीफ़ हो उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए. कोरोना के मामूली लक्षण वाले बच्चों का इलाज घर पर किया जाना चाहिए.

गाइडलाइन्स में कहा गया है कि अस्पताल न आने वाले ऐसे बच्चों को बुखार की दवा दी जानी चाहिए.

भारत में कोरोना वायरस

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महामारी की दूसरी लहर का असर अर्थव्यवस्था पर

अख़बार जनसत्ता के पहले पन्ने पर छपी एक ख़बर के अनुसार देश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर शुरू हुए अभी कुछ ही दिन हुए हैं और अर्थव्यवस्था पस्त होने लगी है.

अख़बार लिखता है कि महामारी की असर पिछले साल से अधिक है, लेकिन अर्थव्यवस्था को लेकर वित्त मंत्रालय या वित्त मंत्री की तरफ़ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है.

अख़बार के अनुसार देश के कई हिस्सों में आंशिक या पूर्ण प्रतिबंध लगाए गए हैं जिसका असर कारखानों के उत्पादन पर पड़ने लगा है. बड़े-बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद होने लगे हैं और थोक बाजार बंद किए जाने लगे हैं. कोरोना महामारी की पहली लहर का प्रकेप झेलकर संभलने की कोशिश कर रहे रेस्तरां-होटल व्यवसाय फिर से लड़खड़ाने लगे हैं.

अख़बार के अनुसार सरकार का इरादा पिछले साल की तरह देशव्यापी पूर्णबंदी लगाने का नहीं है, लेकिन इसकी भी योजना नहीं है कि अर्थव्यवस्था को साल 2020 की तरह कोई ख़ास पैकेज दिया जाए.

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