भारत-पाकिस्तान के बीच इस ‘शांति’ के पीछे यूएई का हाथ है? - प्रेस रिव्यू

जयशंकर और ज़ायद

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इमेज कैप्शन, दिल्ली में एस जयशंकर से मुलाक़ात करते यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्लाह बिन ज़ायद

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के दिनों में तनाव कम करने की कोशिशों के बीचे दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तीसरे देश के सहयोग से हुई बातचीत है.

हालंकि भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है.

अख़बार ने ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि दोनों देशों ने शांति स्थापित करने के लिए संयुक्त अरब अमीरात की मध्यस्थता से रोडमैप तैयार करने पर काम किया है.

संयुक्त अरब अमीरात और पाकिस्तान ने भी आधिकारिक तौर पर इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक 25 फ़रवरी को भारत और पाकिस्तान के डीजीएमओ ने साझा बयान जारी कर संघर्ष विराम की घोषणा संयुक्त अरब अमीरात की मध्यस्थता में हुई बातचीत के नतीजे में की थी.

रिपोर्ट के मुताबिक यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्लाह बिन ज़ायद ने 26 फ़रवरी को दिल्ली दौरे के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक में भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने के प्रयासों पर भी चर्चा की थी.

ज़ायद और जयशंकर

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इससे पहले भारत के दो शीर्ष अख़बार और एक वेबसाइट अपनी रिपोर्टों में ये बता चुके हैं कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर बाजवा के बीच 'बैक-चैनल' बात हुई है.

अख़बार ने अज्ञात अधिकारी के हवाले से बताया है कि संघर्ष विराम की घोषणा इस दिशा में पहला क़दम है और आगे और भी घोषणाएं हो सकती हैं.

अधिकारी के मुताबिक़, अगले क़दम में भारत और पाकिस्तान दिल्ली और इस्लामाबाद में अपने राजनयिकों को फिर से भेज सकते हैं. इसके बाद दोनों देशों के बीच कारोबार शुरू करने और फिर कश्मीर के भविष्य पर चर्चा होनी है.

दंगे की आग में क्यों सुलग रहा है तेलंगाना का एक क़स्बा?

बलात्कार की घटना के बाद भैंसा में प्रदर्शन भी हुए हैं

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इमेज कैप्शन, बलात्कार की घटना के बाद भैंसा में प्रदर्शन भी हुए हैं

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक तेलंगाना का एक क़स्बा 15 दिनों से दंगे की आग में सुलग रहा है. सोमवार को निर्मल ज़िले के भैंसा क़स्बे का साप्ताहिक बाज़ार दस दिन बाद खुला तो लोग ज़रूरी सामान ख़रीदने के लिए उमड़ पड़े.

यहां 7 मार्च की शाम को हिंसा की छुटपुट घटनाएं हुईं थीं. पहले एक बकरी चोरी को लेकर लोग भिड़ गए फिर मोटरसाइकिल की एक मामूली दुर्घटना के बाद लोग भिड़ गए. ये मामूली घटनाएं शहर में दंगे और आगजनी की वजह बन गई. इसके बाद दस मार्च को एक तीन साल की बच्ची के बलात्कार के बाद फिर तनाव भड़क गया.

रिपोर्ट के मुताबिक उस दिन फिर हिंसा हुई जिसमें 12 लोग घायल हुए. प्रशासन को शहर में धारा 144 लगानी पड़ी. अब तक पुलिस ने इस संबंध में 28 एफ़आईआर दर्ज की हैं. बलात्कार के मामले में पुलिस ने एक 14 साल के किशोर को गिरफ्तार किया है और पोक्सो के तहत भी मामला दर्ज किया है.

भैंसा बाज़ार में फल बेचने वाले वसम शेख़ ने अख़बार से कहा, "आप नहीं जानते कब यहां हालात बेकाबू हो जाएंगे. बहुत सोच समझकर बोलना पड़ रहा है. किसी भी बात पर हालात ख़राब हो सकते हैं."

पुलिस ने हालात नियंत्रित करने के लिए दोनों समुदायों की पीस कमेटी भी बनाई है. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इनका असर नहीं दिख रहा है क्योंकि लोग अब एक दूसरे पर विश्वास नहीं कर रहे हैं.

पुलिस के मुताबिक 7 मार्च के घटनाक्रम में मुसलमानों के दो घर और छह दुकानें जला दी गईं जबकि दोनों ही समुदायों के वाहनों को भी आग लगाई गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक़, इस साल ये भैंसा में सांप्रदायिक तनाव की तीसरी घटना है. यहां पहले भी हिंदुओं और मुसलमानों के बीच तनाव रहा है.

कुंभ मेले में कोविड की निगरानी के पर्याप्त इंतेज़ाम नहीं

हरिद्वार में कुंभ

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हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, हरिद्वार में चल रहे कुंभ मेले में कोविड महामारी की निगरानी के पर्याप्त इंतेज़ाम नहीं हैं.

एक दिन पहले ही केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखकर कोविड को लेकर चिंताएं ज़ाहिर की थीं.

इसके बाद हरिद्वार ज़िला प्रशासन और मेला समिति ने तैयारियां तो बढ़ाई हैं लेकिन अभी भी इंतेज़ाम पर्याप्त नहीं हैं.

कुंभ मेला दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक जमावड़ों में शामिल है. हरिद्वार में श्रद्धालुओं की संख्या अभी और भी बढ़ सकती है.

ऐसे में प्रशासन के लिए कोविड महामारी रोकने के इंतेज़ाम करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है.

कर्नाटक आरक्षण की सीमा को 50 फ़ीसदी से बढ़ा सकता है

येदियुरप्पा

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द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक कर्नाटक ने सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में आरक्षण को 50 फ़ीसदी से बढ़ाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मज़बूत तर्क रखे हैं.

राज्य के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कैबिनेट की बैठक में ये प्रस्ताव पेश किया था.

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से जारी नोटिस के जवाब में कर्नाटक सरकार ने कहा है कि ये आरक्षण की सीमा तय करना राज्य सरकार का अधिकार है.

कर्नाटक में ओबीसी वर्ग आरक्षण बढ़ाने की मांग कर रहा है. राज्य में एक सदस्य आयोग अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण को 13 से 15 फ़ीसदी करने और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण को 3 से बढ़ाकर पांच फ़ीसदी करने की सिफ़ारिश कर चुका है.

यदि सरकार ओबीसी की मांगों को भी मानती है तो राज्य में आरक्षण 56 प्रतिशत तक हो जाएगा.

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