पश्चिम बंगाल चुनाव: कोकेन और कोयला बने राजनीति के नए हथियार

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- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
कोयला और कोकेन में क्या समानता है? इस सवाल का सीधा जवाब है- कुछ नहीं. सिवाय इसके कि दोनों के नाम तीन अक्षर के हैं और 'क' से शुरू होते हैं. लेकिन अगर पश्चिम बंगाल की राजनीति के संदर्भ में देखें तो इस सवाल का जवाब काफ़ी पेचीदा है.
विधानसभा चुनावों के ऐन पहले ये दोनों नाम सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और सत्ता की सबसे बड़ी दावेदार होने का दावा कर रही बीजेपी के प्रमुख हथियार बन चुके हैं.
इस मुद्दे पर दोनों पार्टियां एक-दूसरे को कठघरे में खड़ा करने में जुट गई हैं. किसके दावों में कितना दम है, इसका खुलासा तो लंबी जांच प्रक्रिया के पूरी होने के बाद ही हो पाएगा. लेकिन इन दोनों घटनाओं की टाइमिंग कुछ सवाल और संदेह ज़रूर पैदा करती है.
कोलकाता पुलिस ने एक विश्वसनीय सूचना के आधार पर बीते शुक्रवार को महानगर से बीजेपी के युवा मोर्चा की नेता और मॉडलिंग से जुड़ी रहीं पैमेला गोस्वामी और उनके एक सहयोगी प्रदीप कुमार दे को करीब दस लाख रुपए की कोकेन के साथ गिरफ्तार किया था.
उसके ठीक तीसरे दिन यानी रविवार को कोयले के अवैध खनन और बिक्री के मामले की जांच कर रही सीबीआई ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और सांसद अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी से पूछताछ की और नोटिस थमाने उनके घर पहुंच गई.

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पैमेला के बयान के आधार पर मंगलवार देर रात पश्चिम बंगाल से बाहर भागने की कोशिश कर रहे बीजेपी नेता राकेश सिंह को भी बर्दवान से गिरफ्तार कर लिया गया.
इससे पहले दिन में उनके घर पहुंची पुलिस के कामकाज में बाधा पहुंचाने के आरोप में राकेश के दोनों पुत्रों सोहम और साहेब सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया. मंगलवार को ही हाईकोर्ट ने राकेश सिंह की एक याचिका खारिज कर दी जिसमें उन्होंने इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई रोकने की अपील की थी.
इन दोनों मुद्दों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार तेज़ हो रहा है. अपने तीन नेताओं की नशीली दवाओं की तस्करी और बिक्री के मामले में गिरफ्तारी से बीजेपी बैकफुट पर हैं. हालांकि पार्टी के नेता इसे राजनीतिक साजिश करार दे रहे हैं.
दूसरी ओर, सीबीआई ने कोयला मामले में मंगलवार को अभिषेक की पत्नी रुजिरा से करीब एक घंटे तक पूछताछ की है. लेकिन जांच एजंसी के अधिकारी उनके जवाबों से संतुष्ट नहीं हैं. इसलिए उनसे दोबारा पूछताछ के आसार हैं.
क्या है पूरा मामला?
पैमेला को उनके एक मित्र प्रबीर कुमार और उनके (पैमेला के) निजी सुरक्षा गार्ड के साथ शुक्रवार को कोलकाता के न्यू अलीपुर इलाक़े से गिरफ्तार किया गया था. पुलिस के मुताबिक पैमेला के थैले और कार में दस लाख कीमत की 90 ग्राम कोकेन बरामद की गई थी.
पैमेला ने शनिवार को एक स्थानीय अदालत में सुनवाई के दौरान दावा किया कि उन्हें उनकी पार्टी के ही नेता राकेश सिंह ने फंसाया है. पैमेला ने कहा कि राकेश सिंह ने ही अपने आदमियों से कोकेन उनकी कार में रखवा दी थी. उन्होंने मामले की जांच सीआईडी से कराने की भी मांग की.
इस बीच, कोलकाता पुलिस ने पैमेला के पिता कौशिक गोस्वामी के हवाले से कहा है कि पैमेला को ड्रग्स लेने की लत है.
कोलकाता पुलिस के मुताबिक, पैमेला के पिता की ओर से बीते साल अप्रैल में शिकायत मिलने के बाद से गोस्वामी और उनके मित्र प्रवीर की गतिविधियों पर निगाह रखी जा रही थी. पुलिस को लिखे पत्र में कौशिक ने आरोप लगाया है कि प्रबीर ने ही पैमेला को मादक पदार्थों का आदी बनाया है.
टीएमसी ने कहा है कि यह पूरा घटनाक्रम बीजेपी का असली चेहरा दिखाता है.
पार्टी महासचिव पार्थ चटर्जी के मुताबिक़ ,''इससे पहले बीजेपी की एक नेता बच्चों की तस्करी के मामले में गिरफ्तार हुई थीं. अब एक दूसरी नेता ड्रग्स मामले में गिरफ्तार हुई हैं. इससे साफ होता है कि बीजेपी और उसके नेताओं का असली चेहरा क्या है.''

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लेकिन बीजेपी इसे राजनीतिक साज़िश और बदले की राजनीति करार दे रही है.
बीजेपी की प्रदेश समिति के सदस्य राकेश सिंह ने अपनी गिरफ्तारी के बाद पत्रकारों से कहा, "सत्तारूढ़ टीएमसी और कोलकाता पुलिस उनके खिलाफ साजिश रच रही है. उन्होंने पैमेला को सिखा-पढ़ा दिया है." सिंह का दावा है कि वह एक साल से अधिक समय से पैमेला के संपर्क में नहीं थे और किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं.
''किसी के खि़लाफ़ शिकायत कर देना आसान है, लेकिन साबित करना मुश्किल. यह तो पैमेला ही बता सकती हैं कि उसने मेरा नाम क्यों लिया. मैं बस यही कह सकता हूं कि यह मुझे बदनाम करने की साजिश है. मैं इस तरह की गंदी राजनीति में विश्वास नहीं करता."
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं, "जो लोग बदले की राजनीति की बात करते हैं मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या राकेश सिंह और उनके दोनों बेटों की गिरफ्तारी बदले की राजनीति नहीं है? इस मामले की सही जांच होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके."
लेकिन टीएमसी के वरिष्ठ नेता तापस राय कहते हैं, "नशीली वस्तुओं की तस्करी के इस मामले की जड़ें काफी गहरी हैं. यह बदले की राजनीति नहीं हैं. हकीकत सामने लाना जरूरी है."

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कौन हैं पैमेला गोस्वामी?
पश्चिम बंगाल की राजनीति में पैमेला का नाम भले ज्यादा लोग नहीं जानते हों, लेकिन बीजेपी में वे किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं.
उन्होंने वर्ष 2019 में भगवा पार्टी का हाथ थामा था. उस साल ममता बनर्जी की 21 जुलाई को हुई शहीद रैली के बाद प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष की ओर से आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ही पैमेला पार्टी में शामिल हुई थीं.
उनके साथ टॉलीवुड की एक अन्य अभिनेत्री रिमझिम मित्रा भी बीजेपी में शामिल हुई थी. पैमेला अभिनय के साथ मॉडलिंग भी कर चुकी हैं. उन्होंने कोलकाता के एक मशहूर कॉलेज से बिज़नस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई की है. वो हिंदी और बांग्ला के अलावा फ्रेंच भी बोलती हैं.
बीजेपी में शामिल होने से पहले पैमेला कोलकाता के अलावा दिल्ली और पुणे में अलग-अलग नौकरियां कर चुकी हैं. कुछ समय तक उन्होंने एक विमान कंपनी में भी काम किया.
वर्ष 2019 में बीजेपी में शामिल होने के बाद अगले साल ही उनको युवा मोर्चा का महासचिव बना दिया गया था. उसके बाद से वे पार्टी के तमाम कार्यक्रमों में बड़े नेताओं के साथ शिरकत करती रही हैं. सोशल मीडिया पर उनके काफी फॉलोवर हैं.

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कौन हैं राकेश सिंह?
राकेश सिंह वर्ष 2003 में कांग्रेस में शामिल हुए थे. उसके बाद उनको अलीपुर जू वर्कर्स यूनियम का अध्यक्ष चुना गया था. वर्ष 2018 के आखिर में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया.
पश्चिम बंगाल के एडवोकेट जनरल किशोर दत्त ने मंगलवार को राकेश की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत को बताया था कि राकेश कुख्यात हिस्ट्रीशीटर हैं और उनके खिलाफ 56 आपराधिक मामले दायर हैं.
उनमें से 27 मामले उनके बीजेपी में शामिल होने के बाद दर्ज हुए हैं. वर्ष 2017 में महानगर के सीएमआरआई अस्पताल में तोड़-फोड़ और कथित उगाही के मामले में भी अस्पताल प्रबंधन ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी.
वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ईश्वर चंद्र विद्यासागर की प्रतिमा को तोड़ने के मामले में भी राकेश का नाम सामने आया था.
बीते साल 10 दिसंबर को दक्षिण 24-परगना जिले में जब बीजेपी अध्यक्ष जे.पी.नड्डा के काफिले पर हमला हुआ था तो राकेश नड्डा की कार में सामने की सीट पर बैठे थे. उनको वाई कटेगरी की सुरक्षा हासिल है.
उनकी सुरक्षा में तैनात सीआईएसएफ के जवानों ने मंगलवार को घर की तलाशी लेने पहुंची पुलिस की टीम को भीतर घुसने से रोक दिया था.
कोयला खनन मामला
इस बीच, मंगलवार को ही सीबीआई की एक टीम ने अभिषेक बनर्जी के घर जाकर कोयला मामले में उनकी पत्नी से करीब घंटे भर तक पूछताछ की. उनके बैंक खातों में हुए लेन-देन के बारे में कई सवाल पूछे गए. लेकिन सीबीआई की टीम उनके जवाब से संतुष्ट नहीं है.
जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर कहा, "हम जल्दी ही रुजिरा से दोबारा पूछताछ करेंगे. हमारे सवालो के जवाब नहीं मिले हैं. इससे पहले सोमवार को रुजिरा की बहन मेनका गंभीर से भी करीब तीन घंटे तक पूछताछ की गई थी."
सीबीआई का कहना है कि कोयले के अवैध खनन मामले से ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) और सीआईएसएफ के कुछ कर्मचारी भी जुड़े हैं. उनको राज्य के एक प्रभावशाली व्यक्ति का संरक्षण हासिल है.
मंगलवार को सीबीआई की टीम के अभिषेक के घर पहुंचने से कुछ पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी वहां पहुंची थीं और अपनी नातिन को साथ लेकर निकल गईं. टीएमसी के एक नेता बताते हैं, "दीदी नहीं चाहती थीं कि उनकी नातिन सीबीआई टीम को मां से पूछताछ करता हुआ देखे."
लेकिन सीबीआई टीम से पहले अभिषेक के आवास पर ममता के दौरे पर टिप्पणी करते हुए बीजेपी ने आरोप लगाया है कि वो जांच को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं.
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष कहते हैं, "दाल में कुछ काला जरूर है. दीदी जांच को प्रभावित करने का प्रयास कर रही हैं. भ्रष्टाचार पर परदा डालने के लिए दीदी हर बार मौके पर पहुंच जाती हैं, सीबीआई की जांच के दौरान कई ओर लोगों को समन भेज कर पूछताछ की जाएगी."
उधर, टीएमसी ने इसके लिए बीजेपी की खिंचाई करते हुए कहा है कि वह उसके (बीजेपी) के सामने घुटने नहीं टेकेगी.
पार्टी के प्रवक्ता कुणाल घोष कहते हैं, "सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रय एजंसियां जिन नेताओं के खिलाफ जांच कर रही हैं उनमें से ज्यादातर बीजेपी में शामिल हो चुके हैं. लेकिन जिन लोगों ने झुकने से इंकार कर दिया है उनको धमकाया जा रहा है. लेकिन टीएमसी पर इसका कोई असर नहीं होगा."

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