गलवान में सैनिकों की मौत को लेकर चीन में भारत को गालियाँ: प्रेस रिव्यू

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हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर में कहा गया है कि गलवान घाटी में बीते साल 15 जून को हुई झड़प में अपने सैनिकों के मारे जाने की बात पहली बार स्वीकार करने के बाद भी चीन में भारत-विरोधी ऑनलाइन दुष्प्रचार जारी है.
ख़बर के मुताबिक, चीनी नागरिक पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के मारे गए सैनिकों से संबंधित वीडियो और तस्वीरें ऑनलाइन पोस्ट कर रहे हैं, जबकि भारत-चीन इस बारे में रविवार को संयुक्त बयान जारी कर चुके हैं जिसमें पेगॉन्ग झील से सैनिकों को पीछे हटाने का काम पूरा होने की घोषणा की गई है.
भारत और चीन के सैनिकों के बीच जानलेवा झड़प के वीडियो बीते शुक्रवार को पहली बार आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल्स से चीन के तमाम ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर शेयर किए गए थे.
रविवार को जारी संयुक्त बयान के बावजूद चीन में भारतीय दूतावास के वीबो एकाउंट को निशाना बनाकर हज़ारों मैसेज छोड़े गए हैं जो गालियों और अपशब्दों से भरे पड़े हैं.
वहीं सरकारी मीडिया, वेबसाइटों और ब्लॉग पर चीन और उसकी सेना की प्रशंसा की बौछार हो रही है जिनमें कहा जा रहा है कि उन्होंने ज़्यादा शक्तिशाली होने के बावजूद भारतीय सेनाओं के सामने संयम बरता.
चीन के सरकारी समाचार पत्र चाइना न्यूज़ डेली की एक रिपोर्ट के अनुसार इंटरनेट पर चार सैनिकों और उनकी अंत्येष्टि की तस्वीरें शेयर की गईं. इनमें एक तस्वीर में मारे गए सैनिकों में से एक आधा छीला संतरा हाथ में लिए मुस्कुरा रहा है.
रिपोर्ट के अनुसार इसके साथ ही चीन में कम-से-कम तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया जिन्होंने इंटरनेट पर सेना का "अनादर" किया था.
हालाँकि ये नहीं बताया गया कि उन्होंने क्या कहा था.
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आ सकते हैं भारत

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द हिंदू की एक ख़बर में कहा गया है कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आ सकते हैं.
इस सम्मेलन के बहाने चीनी राष्ट्रपति का भारत दौरा इसलिए भी मायने रखेगा कि दोनों देशों के सैनिकों के बीच एक वर्ष पहले ही गलवान घाटी में हिंसक झड़प हुई थी जिसमें दोनों तरफ़ के सैनिक मारे गए थे. इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया था.
ख़बर में कहा गया है कि चीन ने भारत की मेज़बानी में इस वर्ष होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के लिए अपना 'समर्थन' जताया है और कहा है कि सीमा-संकट का असर इस सम्मेलन पर नहीं पड़ेगा.
उम्मीद की जा रही है कि इस साल के उत्तरार्ध में भारत में हालात बेहतर हुए तो वर्चुअल समिट की नौबत नहीं आएगी और ब्रिक्स देशों के नेताओं को सम्मेलन के लिए भारत आने का मौका मिलेगा.
ख़बर में इस तथ्य की ओर ध्यान खींचा गया है कि साल 2017 में डोकलाम में भारत और चीन के सैनिकों के बीच 72 दिन तक चला गतिरोध ख़त्म होने के पांच दिन बाद प्रधानमंत्री मोदी ब्रिक्स सम्मेलन में शिरकत के लिए चीन गए थे.
अधिकारियों का कहना है कि उस समय सम्मेलन का वक्त ऐसा था कि दोनों देशों के अधिकारियों ने चीन और भारत के बीच गतिरोध ख़त्म करने के लिए भरपूर ज़ोर लगाया था.
लेकिन अब चार साल बाद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद इतना अधिक गहराया कि साल 1967 के बाद सीमा पर इतने बड़े पैमाने पर हिंसा हुई.
इस बार डोकलाम की तरह सीमा विवाद किसी एक जगह तक सीमित भी नहीं है और हज़ारों सैनिकों को पूरी तैयारी के साथ तैनात किया गया.
'ब्रिक्स' दुनिया की पांच उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं का एक समूह है, जो अंग्रेज़ी अक्षरों बी.आर.आई.सी.एस. से मिलकर बना है. ये पांच देश हैं - ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ़्रीका. इस समूह में दक्षिण अफ़्रीका के जुड़ने से पहले इसे 'ब्रिक' कहा जाता था.
सेंसेक्स 1,145 अंक टूटा, निफ्टी 14,700 अंक से नीचे

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जनसत्ता की ख़बर के मुताबिक, भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट का सिलसिला सोमवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में भी जारी रहा. बाजार में भारी बिकवाली के बीच सेंसेक्स 1,145 अंक टूट गया, जबकि निफ्टी 14,700 अंक के स्तर से नीचे आ गया.
ख़बर में कहा गया है कि ''वैश्विक बाजारों के नकारात्मक रुख ने भी बाजार धारणा को प्रभावित किया. हालांकि आश्चर्यजनक रूप से रुपये में मजबूती का रुख रहा, लेकिन इससे निवेशकों की धारणा को बल नहीं मिल पाया.''
कारोबारियों ने कहा कि कई राज्यों में कोविड-19 संक्रमण के मामले बढ़ने तथा मूल्यांकन के मोर्चे पर चिंता से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई.
बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1,145.44 अंक यानी 2.25 प्रतिशत के नुकसान से 49,744.32 अंक पर नीचे आ गया. यह सेंसेक्स में दो माह में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट है.
इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 306.05 अंक यानी 2.04 प्रतिशत टूटकर 14,700 अंक से नीचे 14,675.70 अंक पर बंद हुआ.
इस तरह पिछले पांच सत्रों में सेंसेक्स 2,409.81 अंक और निफ्टी 639 अंक टूट चुका है.
श्रीराम हिंदुओं के दिल के बहुत करीब: मद्रास हाईकोर्ट

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दैनिक जागरण की एक ख़बर के मुताबिक, मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै पीठ ने शहर में श्रीराम मंदिर के लिए जागरूकता अभियान चलाने की मांग वाली याचिका मंज़ूर करते हुए सहायक पुलिस आयुक्त के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें कोरोना महामारी और कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए इजाज़त देने से मना किया गया था.
ख़बर के मुताबिक, हाईकोर्ट ने कहा कि श्रीराम हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं और दिल के बहुत करीब हैं. ये आदेश न्यायमूर्ति आर हेमलता की पीठ ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जिला संयोजक एन. सेल्वाकुमार की याचिका पर दिया, जिन्होंने श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए वैन के ज़रिए मदुरै और आसपास जागरूकता अभियान चलाना चाहते हैं.
पुलिस ने उन्हें इसकी मंजूरी नहीं दी तो मामला कोर्ट पहुंचा. ख़बर के मुताबिक, मद्रास हाईकोर्ट का कहना है, ''जब लोगों को पिक्चर हॉल, मॉल और अन्य सार्वजनिक जगहों पर मास्क और सैनिटाइजर जैसे सुरक्षा उपायों के साथ जाने की अनुमति है, तो फिर श्रीराम मंदिर के लिए वैन के ज़रिए जागरूकता अभियान को अनुमति न देने का तर्कसंगत आधार नज़र नहीं आता. ये भी स्पष्ट नहीं है कि इससे क़ानून-व्यवस्था की समस्या कैसे खड़ी हो सकती है.''

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