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पश्चिम बंगाल चुनाव में अभिषेक बनर्जी बनाम जय शाह, ममता बनर्जी ने अमित शाह को घेरा
- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर पार्टी के तमाम नेता पश्चिम बंगाल में बीते लोकसभा चुनावों के समय से ही नाम लिए बिना बुआ-भतीजे की जोड़ी को निशाना बनाते रहे हैं.
इस साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और डायमंड हार्बर सीट से लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी इन हमलों के केंद्र में हैं.
केंद्रीय नेताओं की बात छोड़ भी दें, तो हाल में टीएमसी छोड़ कर बीजेपी में जाने वाले शुभेंदु अधिकारी और राजीव बनर्जी जैसे पूर्व मंत्री भी लगातार अभिषेक पर हमले कर रहे हैं.
लेकिन अब ख़ासकर अमित शाह के मौजूदा दो-दिवसीय कोलकाता दौरे के समय ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर पलटवार शुरू कर दिया है.
राज्य के दो दिन के दौरे पर पहुँचे अमित शाह ने गुरुवार को दक्षिण 24-परगना ज़िले के नामखाना की एक रैली में बीजेपी के सत्ता में आने की स्थिति में सरकारी कर्मचारियों के लिए सातवाँ वेतनमान लागू करने और सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 33 फ़ीसदी आरक्षण समेत ढेरों वादे तो किए ही, एक बार फिर बुआ-भतीजे की जोड़ी पर हमला किया.
अमित शाह ने कहा, "तृणमूल कांग्रेस का एक ही नारा है - भतीजे का कल्याण. लेकिन मोदी सरकार का नारा है - सबका साथ-सबका विकास."
उनका आरोप था कि विकास के लिए केंद्र की ओर से अब तक भेजा गया धन यहाँ सिंडीकेट की जेब में चला गया है. बीते पाँच वर्षो में मोदी सरकार की ओर से भेजी गई 3.59 लाख करोड़ की रकम भाइपो यानी भतीजे और टीएमसी के गुंडों की जेब में चली गई है.
उनका कहना था, "सत्ता में आने के बाद बीजेपी इन सबकी जाँच कराएगी और भ्रष्टाचारियों को जेल भेजेगी."
ममता का जवाब
इसके बाद शाम को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उसी ज़िले के पैलान में एक रैली को संबोधित किया. उसमें अभिषेक बनर्जी भी मौजूद थे. भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हमले के जवाब में ममता ने अमित शाह के बेटे पर निशाना साधा.
उन्होंने कहा, "अमित शाह बार-बार बुआ-भतीजा करते हैं. अगर उनमें हिम्मत है तो अभिषेक के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ कर दिखाएँ. शाह के बेटे भी भ्रष्टाचार के आरोपों से नहीं बच सकते. आख़िर उनके पास करोड़ों रुपए कहाँ से आए हैं? मेरी सज्जनता को कमज़ोरी समझने की ग़लती मत करें."
ममता का कहना था कि उनके ख़िलाफ़ वंशवाद के आरोप निराधार हैं. वे चाहतीं तो अभिषेक को राज्यसभा में भेज सकती थीं. लेकिन इसकी बजाय अभिषेक ने लोकसभा चुनाव लड़ने का फ़ैसला किया.
टीएमसी अध्यक्ष ने कहा, "मैंने अब तक अभिषेक को दूसरों के मुक़ाबले तवज्जो नहीं दी है. उनको उप-मुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री भी नहीं बनाया है. कुछ साल पहले उसे सड़क हादसे में जान से मारने की साज़िश भी हो चुकी है."
ममता सवाल करती हैं कि आख़िर अमित शाह के बेटे में ऐसी कौन सी काबिलियत है कि वह भारतीय क्रिकेट की बागडोर संभाल रहे हैं?
अमित शाह के बेटे जय शाह इस समय भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई के सचिव हैं.
ममता का कहना था, "अगर अमित शाह में हिम्मत है, तो जो कहना है सीधे अभिषेक का नाम लेकर कहें. मैं उनको अभिषेक के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने की चुनौती देती हूँ. पहले वे भतीजे से तो निपट लें, फिर दीदी से निपटेंगे. राजनीति में लक्ष्मण रेखा पार मत करें."
ममता कहती हैं कि ऐसा संभव नहीं है कि अमित शाह अपने बेटे को परदे के पीछे रख कर दूसरों पर हमले करें. उनका बेटा भी तो मेरा भतीजा ही है.
ममता ने कहा कि उनकी वजह से अभिषेक को भला-बुरा सुनना पड़ रहा है.
उन्होंने कहा, "उनके (बीजेपी नेताओं के) पुत्र विदेशों में चले जाते हैं. मेरे पास ऐसे तमाम नेता-पुत्रों की सूची है. लेकिन हमारे घर के लड़के यहीं रह कर आम लोगों के हित में काम करते हैं. अगर अमित शाह में हिम्मत है, तो अपने बेटे को भी राजनीति में उतारें. मेरा परिवार ऐसा कोई काम नहीं करेगा, जिससे बंगाल और इसके लोगों के हितों को नुक़सान पहुँचे."
भतीजे-बेटे की जंग
बीजेपी नेताओं के हमलों के केंद्र में रहे अभिषेक बनर्जी कहते हैं, "बाहरी लोगों को चुनावों के बाद बंगाल से लौट जाना होगा. बीजेपी के नेता सोनार बांग्ला यानी सोने का बंगाल बनाने का दावा कर रहे हैं. लेकिन वे पहले सोनार उत्तर प्रदेश, सोनार हरियाणा या सोनार राजस्थान क्यों नहीं बनाते?"
उनका कहना था कि ममता बनर्जी सरकार के ख़िलाफ़ कोई ठोस मुद्दा नहीं होने की वजह से ही बीजेपी के तमाम नेता ममता बनर्जी के परिवार पर निशाना साध रहे हैं. लेकिन बंगाल के लोगों को इससे भरमाया नहीं जा सकता.
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता सांसद सौगत राय कहते हैं, "बीजेपी नेताओं के पास दूसरा कोई मुद्दा नहीं बचा है. इसलिए वे ममता बनर्जी के परिवार पर हमले कर रहे हैं. लेकिन इससे कोई फ़ायदा नहीं होगा."
दूसरी ओर, बीजेपी का दावा है कि असली जगह चोट पड़ने से दीदी तिलमिला रही हैं. इसी वजह से वे अभिषेक के बचाव में उतर आई हैं.
प्रदेश बीजेपी के उपाध्यक्ष रीतेश तिवारी कहते हैं, "जो व्यक्ति (जय शाह) राजनीति में नहीं है, उस पर हमला ममता के मानसिक दिवालिएपन का सबूत है. यह बंगाल की सभ्यता औऱ संस्कृति के ख़िलाफ़ है. हमारी लड़ाई ममता बनर्जी के परिवार से नहीं, बल्कि उनकी सरकार के भ्रष्टाचार, कुशासन, अंफान और कोविड प्रबंधन में नाकामी के ख़िलाफ़ है. जहाँ तक भतीजे पर आरोपों की बात है, तो ऐसे आरोप तृणमूल के लोग ही लगा रहे हैं."
राजनीतिक पर्यवेक्षक विश्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं, "बीते लोकसभा चुनावों में भी प्रधानमंत्री मोदी समेत बीजेपी के केंद्रीय नेताओं ने बुआ-भतीजे का नाम लिए बिना उन पर हमले किए थे. लेकिन अब सत्ता पर काबिज होने के लिए बीजेपी पूरी ताक़त से चौतरफ़ा हमलों में जुटी है. इसका कितना सियासी फ़ायदा मिलेगा, यह कहना तो मुश्किल है. लेकिन भतीजे बनाम बेटे के मुद्दे पर इस जंग के आगे और तेज़ होने का अंदेशा है."
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