प्रिया रमानी को एमजे अकबर मानहानि मामले में कोर्ट ने किया बरी

दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री एम.जे. अकबर के महिला पत्रकार प्रिया रमानी के ख़िलाफ़ आपराधिक मानहानि के मामले में फ़ैसला सुनाते हुए प्रिया रमानी को बरी कर दिया है.

एडिशनल चीफ़ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट रवींद्र कुमार पांडे ने दोनों पक्षों की मौजूदगी में एक ओपन कोर्ट में यह फ़ैसला सुनाया.

अदालत ने फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि यौन शोषण आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को ख़त्म कर देता है.

अदालत ने कहा, 'किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा की सुरक्षा किसी के सम्मान की क़ीमत पर नहीं की जा सकती है.'

अदालत ने कहा है कि महिलाओं के पास दशकों बाद भी अपनी शिकायत रखने का अधिकार है.

अदालत ने अपने फ़ैसले में ये भी कहा है कि सामाजिक प्रतिष्ठा वाला व्यक्ति भी यौन शोषण कर सकता है.

जज रविंद्र कुमार पांडे ने कहा, '...समाज को समझना ही होगा कि यौन शोषण और उत्पीड़न का पीड़ित पर क्या असर होता है.'

10 फ़रवरी को दोनों पक्षों की जिरह सुनने के बाद कोर्ट ने फ़ैसला 17 फ़रवरी तक के लिए स्थगित कर दिया था.

अदालत ने प्रभावित पक्षों से कहा है कि इस मामले में अपील दायर की जा सकती है.

प्रिया रमानी का आरोप

प्रिया रमानी ने दावा किया था कि एमजे एकबर ने मुंबई के ओबराय होटल में दिसंबर 1993 में नौकरी के लिए साक्षात्कार के दौरान उनका यौन शोषण किया था. एमजे अकबर का कहना था कि उन्होंने होटल में प्रिया रमानी से कोई मुलाक़ात नहीं की थी.

रमानी की वकील रेबेका जॉन ने कोर्ट से मांग की थी कि उनकी मुवक्किल को इस मामले में बरी कर दिया जाए. वहीं अकबर की वकील गीता लूथरा ने ज़ोर देते हुए कहा था कि रमानी के आरोपों के कारण अकबर की छवि ख़राब हुई है.

रमानी के ट्विटर अकाउंट पर भी बहस

वरिष्ठ वकील रेबेका ने कोर्ट से कहा था कि रमानी के ट्विटर अकाउंट को डिएक्टिवेट कर दिया गया था और उसे कोर्ट के निर्देश के बाद एक्टिवेट किया जा सकता है.

रेबेका जॉन ने यह भी सवाल किया था कि शिकायकर्ता ने उनके मुवक्किल का ट्विटर अकाउंट दोबारा शुरू करने के लिए कोई भी एप्लिकेशन नहीं दायर की थी.

वहीं वरिष्ठ वकील लूथरा ने कहा था कि अगर रमानी ने कई सालों के बाद एक 'मानहानि वाला बयान' दिया था तो यह उनकी ज़िम्मेदारी थी कि वो सच साबित करें.

जिरह के दौरान अंतिम तर्क देते हुए एमजे अकबर ने पत्रकार प्रिया रमानी से सवाल किया था कि उन्होंने मानहानि मामले में अपना ट्विटर अकाउंट डिलीट करके सबूत नष्ट किया है जो कि एक आपराधिक काम है.

क्या था मामला

प्रिया रमानी ने मी टू अभियान के दौरान तत्कालीन विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था और उन पर ऐसा आरोप लगाने वाली वो पहली महिला थीं.

#MeToo अभियान के तहत 20 महिला पत्रकारों ने अकबर पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे. इन महिलाओं का आरोप था कि द एशियन एज और अन्य अख़बारों के संपादक रहते हुए अकबर ने उनका यौन उत्पीड़न किया था.

एमजे अकबर पर लगे इन आरोपों के बाद 17 अक्तूबर 2018 को उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया था.

अकबर पर सबसे पहले आरोप लगाने वाली वरिष्ठ पत्रकार प्रिया रमानी ने उनके इस्तीफ़े पर खुशी ज़ाहिर की थी.

प्रिया रमानी ने ट्वीट किया था, "अकबर के इस्तीफ़े से हमारे आरोप सही साबित हुए हैं. हमें अब उस दिन का इंतज़ार है, जब हमें कोर्ट में न्याय मिलेगा."

सबसे पहले एमजे अकबर का नाम प्रिया रमानी ने ही लिया था. उन्होंने वोग इंडिया पत्रिका के लिए 'टू द हार्वी वाइन्सटीन ऑफ़ द वर्ल्ड' नाम से लिखे अपने लेख को री-ट्वीट करते हुए ऑफ़िस में हुए उत्पीड़न के पहले अनुभव को साझा किया था.

उन्होंने आरोप लगाया था कि अकबर ने न्यूज़रूम के अंदर और बाहर उनके साथ अश्लील हरकतें की थीं.

इस्तीफ़े के बाद जारी बयान में अकबर ने कहा था कि वो निजी तौर पर आरोपों के ख़िलाफ़ लड़ेंगे. इसके साथ ही अकबर ने रमानी के ख़िलाफ़ मानहानि का मामला दायर किया था.

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