चीन के रवैये से भारत का भरोसा टूटा: सेना प्रमुख जनरल नरवणे- प्रेस रिव्यू

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भारत के सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकंद नरवणे ने कहा है कि एक्चुअल लाइन ऑफ़ कंट्रोल (एलएसी) यानी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चीन के बढ़ते हस्तक्षेप और यथास्थिति में एकतरफ़ा बदलाव की कोशिशों के कारण दोनों देशों की सेना में टकराव हुआ. जनरल नरवणे ने कहा कि चीन के रवैये के कारण भारत का भरोसा टूटा है.
जनसत्ता में छपी ख़बर के अनुसार देश के पूर्वोत्तर इलाक़ों में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं को लेकर आयोजित कार्यक्रम में जनरल नरवणे ने कहा कि इस इलाक़े की क्षेत्रीय और आंतरिक सुरक्षा जुड़ी हुई है. असम राइफ़ल्स और यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टिट्युशन के सालाना सेमीनार के दारौन इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था.
इस मौक़े पर सेना प्रमुख ने कहा कि पारंपरिक तौर पर नेपाल भारत का सहयोगी रहा है लेकिन हाल के वक़्त में वहां चीनी निवेश बढ़ा है. वहीं भूटान इस दिशा में सावधानी से क़दम उठा रहा है और बांग्लादेश के साथ भारत से संबंध मज़बूत हुए हैं.
अख़बार के अनुसार उन्होंने कहा तीनों देशों के समीकरण का असर पूर्वोत्तर पर पड़ रहा है और सेना की नज़र इन बदलावों पर है और सेना के अधिकारी इसे लेकर सतर्क हैं.

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ग्लेशियर टूटने के बाद बनी झील, फिर मंडराया ख़तरा
हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार में छपी एक ख़बर के अनुसार बीते सप्ताह चमोली में ग्लेशियर के टूटने के बाद ऋषि गंगा नदी के ऊपर के हिस्से में बनी झील का दौरा करने के लिए अधिकारियों ने आठ सदस्यीय टीम को वहां भेजा है.
ग्लेशियर टूटने के बाद नदी के ऊपरी हिस्से में एक जगह पर बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया है और इस कारण राहत कार्य में मुश्किल आ सकती है.
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि बाढ़ प्रभावित रैणी गाँव के नज़दीक छह किलोमीटर ऊपर की तरफ़ ग्लेशियर टूटने के कारण पानी और मलबा जमा हो गया है. यहां से धीरे-धीरे पानी निकलना शुरू हो सकता है जो राहत और बचाव कार्य के लिए मुश्किल का सबब बन सकता है.
अहमदाबाद स्थित फ़िज़िकल रीसर्च लैब के रिटायर्ड वैज्ञानिक नवीन जुयाल ने अख़बार को बताया कि "ये एक झील सी बन गई है जो पूरी तरह भर गई है. यहां से पानी बहना कभी भी शुरू हो सकता है."
उन्होंने कहा, "एक जगह है, जहाँ रोन्टीगढ़ या रोन्टी नदी ऋषि गंगा नदी से मिलती है. सात फ़रवरी को जब ग्लेशियर टूटा तो उसके कारण आई बाढ़ से मलबा यहां गिरा. इससे ऋषि गंगा का रास्ता रुक गया, अब वहां झील बन गई है जो भर गई है."
"अधिकारी यहां से पानी निकालने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसा नहीं लगता कि ये झील टूटेगी लेकिन पानी यहां से बहना शुरू होगा और इससे राहत कार्य में बाधा आ सकती है."
बीते सप्ताह उत्तराखंड के चमोली ज़िले में नंदा देवी ग्लेशियर का एक हिस्सा टूटने से हिमस्खलन हुआ और धौली गंगा, ऋषि गंगा और अलकनंदा नदियों में पानी का स्तर बढ़ गया था. बाढ़ ने तपोवन हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट को तबाह कर दिया था और कई लोग टनल में फंस गए थे.
टनल में फँसे 34 लोगों के क़रीब पहुंची बचाव टीम
तपोवन हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट के टनल में फंसे 34 लोगों को निकालने के काम में लगी टीम अब मुख्य टनल के और क़रीब पहुंच गई है.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में छपी एक ख़बर के अनुसार जिस टनल में लोग फंसे हैं उसके पास बनी एक और टनल तक बचाव टीम पहुंच गई है. माना जा रहा है कि इस रास्ते टनल में फंसे लोगों को निकाला जा सकता है.
आईटीबीपी के प्रवक्ता विवेक पांडेय के हवाले से अख़बार ने लिखा है, "शुक्रवार शाम तक हम टनल के पास वाली फ्लशिंग टनल (इसके ज़रिए टनल में मौजूद मलबा बाहर निकाला जा सकता है) में 12 मीटर लंबा और 75 मिलीमीटर चौड़ा रास्ता बनाने में कामयाब हुए हैं. ये अच्छी बात है कि टनल में हमें पानी नहीं मिला और न ही अधिक प्रेशर है."
हालांकि उन्होंने कहा कि तकनीकी कारणों से फ्लशिंग टनल में अभी वो कैमरा नहीं लगा पाए हैं. बचाव टीम अब ड्रिलिंग मशीन के ज़रिए इस रास्ते को और चौड़ा करने की कोशिश कर रही है.
अख़बार के अनुसार इस टनल में क़रीब 180 मीटर पर तेज़ मोड़ है. माना जा रहा है कि बाढ़ की वजह से जो मलबा टनल में आया उसकी गति इस मोड़ पर आ कर धीमी हो गई. इसी मोड़ के कुछ दूर पर लोग फंसे हो सकते हैं.
पहले बचाव दल ने टनल का सीधा मलबा निकालने की कोशिश की थी लेकिन लगातार बहते पानी के कारण ऐसा करने में मुश्किल हुई. इसके बाद अब टनल में फंसा मलबा निकालने के लिए टनल में 70 मीटर की दूरी पर बाहर से सीधे ड्रिल किया जा रहा है और ताकि मलबे को फ्लशिंग टनल के ज़रिए बाहर निकाला जा सके.
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मुझे पीएम मोदी की आलोचना करने के लिए कहा जाता था - दिनेश त्रिवेदी
तृणमूल कांग्रेस से सांसद दिनेश त्रिवेदी ने शुक्रवार को राज्यसभा की अपनी सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया है. उनका कहना है कि पार्टी अब ममता बनर्जी के काबू में नहीं है बल्कि कुछ कॉर्पोरेट सलाहकारों की राय पर चल रही है.
इस्तीफ़ा देने के बाद दिनेश त्रिवेदी ने अख़बार द हिंदू से बात की और पार्टी छोड़ने के अपने कारण बताए.
उन्होंने अख़बार से कहा, "मैं ममता बनर्जी की इज़्ज़त करता हूं और आगे भी करता रहूंगा. मुझे नहीं लगता कि पार्टी अब ममता बनर्जी के कंट्रोल में है, पार्टी अब कॉर्पोरेट सलाहकारों की राय पर चल रही है. एक ग़रीब पार्टी को राजनीतिक सलाह लेने के लिए किसी व्यक्ति को इतने पैसे क्यों देने चाहिए?"
"मुझे रोज़ कहा जाता था कि मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करूं. लेकिन ये मेरे मूल्य नहीं हैं. मैं ऐसा नहीं कर सकता. अगर प्रधानमंत्री कुछ अच्छा करते हैं तो उनकी तारीफ़ की जानी चाहिए. और अगर सरकार ग़लत करती है तो इस तरफ भी हमें उसका विरोध करना चाहिए."
आने वाले वक्त में बीजेपी में शामिल होने की संभावना के सवाल पर उन्होंने कहा, "मोदी के साथ मेरे अच्छे संबंध हैं. सीताराम येचुरी और बिमन बोस के साथ और मोहन भागवत के साथ भी मेरे अच्छे संबंध हैं. फिलहाल मैं सार्वजनिक जीनव में तो रहूंगा लेकिन मेरे लिए ये आत्मसमीक्षा का वक्त है."

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