भारतीय मूल के लोग क्या अमेरिका में उदारवादी और भारत में रूढ़िवादी हैं?

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    • Author, सलमान रावी
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
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इस साल जनवरी माह में जारी की गई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया कि लगभग 1.8 करोड़ भारतीय दुनिया के दूसरे देशों में रहते हैं.

ये एक बड़ी आबादी है और रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि इन भारतीय प्रवासियों की सबसे ज़्यादा तादाद यूएई, सऊदी अरब और अमेरिका में है. ये सभी प्रवासी, भारत में होने वाली हर गतिविधि पर नज़र भी रखते हैं और राय भी.

ज़ाहिर है कि सबकी अपनी अपनी राय है और उसमें भिन्नता भी साफ़ समझ में आती है.

पिछले साल सितंबर माह की पहली से लेकर 20 तारीख़ तक तीन अमेरिकी संस्थाओं ने मिलकर, वहाँ रह रहे भारतीय प्रवासियों को लेकर एक सर्वेक्षण किया.

ये संस्थाएं हैं- 'कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस', 'जॉन्स हॉपकिन्स स्कूल ऑफ़ एडवांस्ड स्टडीज़' और पेन्सिल्वेनिया विश्वविद्यालय, जिन्होंने इस शोध के लिए वोटिंग कंपनी- 'यूगोव' की मदद ली.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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इमेज कैप्शन, 69 प्रतिशत भारतीय प्रवासियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पसंद है.

सर्वेक्षण की जो रिपोर्ट जारी की गयी है उसके अनुसार भारतीय मूल के अमेरिकी वहाँ पर उदारवादी हैं और 'व्हाइट सुप्रीमेसी' के ख़िलाफ़ हैं.

मगर जब भारत की बात आती है तो वो बहुसंख्यकवादी सोच के साथ नज़र आते हैं. सर्वेक्षण के अनुसार, ऐसा सोचने वाले 67 प्रतिशत प्रवासी भारतीय हैं जबकि 40 प्रतिशत बहुसंख्यकवाद के ख़िलाफ़ विचार रखते हैं.

सर्वेक्षण में ये भी पाया गया कि अमेरिका में रहने वाले 69 प्रतिशत भारतीय प्रवासियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पसंद है. इस सर्वे का नाम- 'इंडियन अमेरिकन्स एटीट्युड सर्वे' रखा गया है.

इस सर्वेक्षण की जानकारी मंगलवार को सार्वजनिक की गयी. सर्वे में पाया गया है कि ज़्यादातर प्रवासी जो नरेंद्र मोदी को पसंद करते हैं, उन्होंने अमेरिकी चुनाव में 'रिपब्लिकन' को ही वोट दिया है.

मोदी, ट्रंप

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सर्वे में भारत की दिशा और राजनीतिक पार्टियों की पसंदगी पर सवाल

क्या भारत सही रास्ते पर चल रहा है? इस सवाल को लेकर भी भारतीय मूल के अमेरिकियों में राय बनती हुई दिखी जिनमें से 36 प्रतिशत को लगता है कि भारत सही दिशा में जा रहा है जबकि 39 प्रतिशत लोग इससे सहमत नज़र नहीं आये.

सर्वेक्षण की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें शामिल होने वाले दस में से सात हिंदू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम करने के तरीके से ख़ुश दिखे जबकि पाँच में से एक मुसलमान को उनकी कार्यशैली पसंद आई. वहीं भारतीय मूल के अमेरिकी ईसाइयों में ये बराबर-बराबर था.

उसी तरह, सर्वेक्षण की रिपोर्ट में कहा गया कि 33 प्रतिशत प्रवासियों को भाजपा पसंद है जबकि सिर्फ़ 13 प्रतिशत ही को कांग्रेस पसंद है.

सर्वेक्षण करने वाली संस्थाओं ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि व्यवस्थित ढंग से कभी भारतीय मूल के अमेरिकियों को लेकर कोई सर्वेक्षण नहीं हुआ ताकि पता चल सके कि वो भारत के बारे में क्या सोचते हैं.

हालांकि जिन लोगों ने इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट को देखा है उनका कहना है कि इसका 'सैंपल साइज़' तुलनात्मक रूप से बहुत ही छोटा था- जैसे सिर्फ़ 1200. जबकि अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की संख्या 4.2 करोड़ बताई जाती है जिनमें से 38 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक हैं ही नहीं.

भारतीय मूल के अमेरिकी

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चीन के बारे में क्या सोचते हैं भारतीय मूल के अमेरिकी?

सर्वेक्षण में शामिल किये गए प्रवासियों में से 74 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक थे जबकि 23 प्रतिशत नहीं. इन 23 प्रतिशत के बीच में भी 88 प्रतिशत ऐसे थे जिन्होंने भारत की अपनी नागरिकता को नहीं छोड़ा है. सर्वेक्षण ऑनलाइन ही किया गया.

जहाँ तक विदेश नीति का सवाल है तो भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों को लगता है कि दोनों देशों के बीच सम्बन्ध मज़बूत रहने चाहिए.

ज़्यादातर भारतीय मूल के अमेरिकियों के विचार चीन को लेकर एक जैसे ही हैं जो चीन के ख़िलाफ़ नज़र आए. लेकिन, रिपोर्ट में ये कहा गया है कि भारत किस तरह से चीन से निपटे? इसको लेकर राय बंटी हुई दिखी.

अमेरिका

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सर्वेक्षण के कुछ प्रमुख बिंदु

  • जो 23 प्रतिशत प्रवासी अमेरिकी नागरिक नहीं हैं उनमें से 80 प्रतिशत चाहते हैं कि मौक़ा मिलने पर वो अमेरिकी नागरिकता लेना चाहेंगे.
  • सर्वेक्षण में भाग लेने वाले ज़्यादातर प्रवासियों का कहना है कि वो व्यक्तिगत, राजनीतिक या सांस्कृतिक रूप से खुद को भारत से जुड़ा हुआ ही रखते हैं.
  • लगभग सभी प्रवासियों को भारत के सरकारी अमले में फैले भ्रष्टाचार को लेकर चिंता है. साथ ही भारत में आर्थिक विकास की धीमी गति को लेकर भी सर्वेक्षण में शामिल लोग चिंतित दिखे.
  • सर्वेक्षण में शामिल इंजीनियरिंग से जुड़े लोगों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बतौर पीएम काफ़ी पसंद किए गए. इनमें से ज़्यादातर लोग उत्तरी और पश्चिमी भारत के रहने वाले हैं.
वीडियो कैप्शन, महात्मा गांधी को ये चिंता हमेशा सताती थी

70 फ़ीसदी हिंदू, 20 फ़ीसदी मुस्लिम मोदी से ख़ुश

'कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस' के दक्षिण एशिया के निदेशक मिलन वैष्णव के अनुसार इस रिपोर्ट का अध्यापन उनके अलावा देवेश कपूर और सुमित्रा बद्रीनाथ द्वारा किया गया है.

उनका कहना है कि सर्वेक्षण में पाया गया कि जो लोग प्रधानमंत्री का समर्थन करते या तारीफ़ करते नज़र आए उनमें हिंदी भाषियों के अलावा गुजराती और मराठी शामिल हैं.

सर्वेक्षण में शामिल 70 प्रतिशत हिंदू मोदी के समर्थन में दिखे जबकि 20 प्रतिशत मुसलमान उनके काम से ख़ुश नज़र आते दिखे.

सर्वेक्षण का हिस्सा रहीं पेन्सिल्वेनिया विश्वविद्यालय में पीएचडी की छात्र सुमित्रा बद्रीनाथ के अनुसार बातचीत के क्रम में भारतीय मूल के अमेरिकी लोगों ने जो उद्धरण दिए उनसे साफ़ था कि वो अमेरिका में ज़्यादा उदारवादी हैं और उस सोच की वकालत भी करते हैं.

अमेरिकी समाज के कई ऐसे ज्वलंत मुद्दे हैं जिनको लेकर भारतीय मूल के लोगों ने हमेशा ही अपनी उदारवादी सोच को स्पष्ट तरीके से रखा है. मगर सुमित्रा बद्रीनाथ ने अपने ट्वीट में कहा कि जब बात भारत की आती है तो वही लोग रूढ़िवादी सोच अपनाए हुए नज़र आते हैं.

BBC ISWOTY

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