उत्तराखंड: पहले भी मुश्किलों में रहा है ऋषि गंगा प्रोजेक्ट

    • Author, प्रवीण शर्मा
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए

उत्तराखंड के चमोली ज़िले में रविवार को ग्लेशियर फटने की घटना से इस इलाक़े के दो हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुकसान पहुंचा है. इनमें से एक है ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट और दूसरा है तपोवन विष्णुगढ़ प्रोजेक्ट.

इसमें ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट की क्षमता 13.2 मेगावाट है, जबकि तपोवन प्रोजेक्ट की क्षमता 520 मेगावाट तक पहुंचाने की योजना है. तपोवन प्रोजेक्ट एनटीपीसी के हाथ में है और यह फिलहाल निर्माणाधीन प्रोजेक्ट है.

13.2 मेगावाट क्षमता वाला है ऋषिगंगा प्रोजेक्ट

ऋषि गंगा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी ऋषि गंगा पावर प्रोजेक्ट को मिली थी.

यह प्रोजेक्ट अलकनंदा की एक सहायक नदी, ऋषि गंगा पर बनाया गया है. इस प्रोजेक्ट की क्षमता 13.2 मेगावाट है.

इस प्रोजेक्ट को 2016 में आई बाढ़ के दौरान भी नुकसान पहुंचा था. इस दौरान इससे बिजली पैदा होना बंद हो गया था और प्रोजेक्ट को बना रही लुधियाना की ऋषिगंगा पावर कॉरपोरेशन उस समय दिवालिया हो गई थी.

दिवालिया हो गई थी कंपनी

ऋषि गंगा पावर कॉरपोरेशन पर बैंकों का क़रीब 165 करोड़ रुपये बकाया था जो कि एनपीए में तब्दील हो गया था. इसके बाद जिन बैंकों ने इस प्रोजेक्ट के लिए लोन दिया था, वे अपने पैसे की रिकवरी के लिए इसे नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) में ले गए.

2018 में यह प्रोजेक्ट कुंदन ग्रुप को मिल गया था. कुंदन ग्रुप ने यह प्रोजेक्ट 45.62 करोड़ रुपये में हासिल किया था.

इसके बाद जून 2019 से ही इस प्रोजेक्ट से दोबारा बिजली उत्पादन शुरू हुआ था.

कुंदन ग्रुप के सीईओ एचडी कामत ने बीबीसी को बताया कि उन्हें इस प्रोजेक्ट में करीब 112 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है.

एचडी कामत ने बताया, "इस साइट पर काम कर रहे करीब 70 लोगों को अभी ढूंढा जा रहा है. साथ ही यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से तबाह हो गया है."

वे बताते हैं कि इसमें 3.3 मेगावाट की चार यूनिट्स लगी हुई थीं.

तपोवन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट

उत्तराखंड के चमोली ज़िले में ग्लेशियर फटने की घटना से एनटीपीसी के तपोवन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को भी नुक़सान पहुँचा है.

यह प्रोजेक्ट एनटीपीसी बना रही है. इसे 520 मेगावॉट की क्षमता का बनाया जाना है जिसमें 130 मेगावाट की चार यूनिट्स होंगी.

एनटीपीसी का तपोवन विष्णुगढ़ प्रोजेक्ट करीब 3,000 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा है. इस प्रोजेक्ट का बांध धौलीगंगा और ऋषिगंगा नदियों के संगम पर स्थित है.

इस प्रोजेक्ट से अभी बिजली उत्पादन भी शुरू नहीं हुआ है.

एनटीपीसी ने अपने ट्वीट में कहा है, "उत्तराखंड में तपोवन के निकट आई त्रासदी ने हमारे इस इलाक़े में बन रहे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के एक हिस्से को नुक़सान पहुंचाया है. बचाव का काम जारी है और जिला प्रशासन और पुलिस की मदद से हालात पर लगातार नज़र रखी जा रही है."

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