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किसान आंदोलन: सोशल मीडिया के एक दस्तावेज़ को लेकर पुलिस ने दर्ज की एफ़आईआर, ग्रेटा का नाम नहीं
दिल्ली पुलिस ने कहा कि किसान आंदोलन की आड़ में सरकार के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर जो पोस्ट किए जा रहे थे उस सिलसिले में एक एफ़आईआर दर्ज की गई है. पुलिस ने ये स्पष्ट किया है कि इस एफ़आईआर में पर्यावरणविद ग्रेटा थनबर्ग का नाम नहीं है.
गुरुवार शाम हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी क्राइम प्रवीर रंजन ने कहा कि किसान आंदोलन के दौरान पुलिस सोशल मीडिया पर भी निगरानी कर रही है और पुलिस को पता चला है कि क़रीब 300 से अधिक ऐसे ट्विटर हैंडल हैं जिनसे किसान आंदोलन के नाम पर भारत सरकार के ख़िलाफ़ ट्वीट किए जा रहे थे.
उन्होंने कहा, "सोशल मीडिया की निगरानी के दौरान पुलिस को एक अकाउंट के ज़रिए एक दस्तावेज़ मिला है जो एक टूलकिट है जिसमें 'प्रायर एक्शन प्लान' नाम का एक सेक्शन है."
"इसमें किसान आंदोलन के दौरान क्या करना है ये कहा गया है. इसमें कहा गया है कि 23 जनवरी से लगातार किसान आंदोलन को लेकर काफी ट्वीट करने हैं, 26 जनवरी को दिल्ली की सीमा के पास में होने वाले मार्च में शिरकत करनी है और वापस सीमा पर आना है."
उन्होंने कहा, "26 जनवरी को जो कुछ हुआ उसे देख कर ऐसा लगता है कि टूलकिट में जो लिखा है उसका पूरी तरह पालन किया गया है."
"ये टूलकिट खालिस्तानी समर्थक संगठन पोएटिक जस्टिस फाउंडेशन के द्वारा बनाया गया है. इसे पहले अपलोड किया गया और फिर कुछ दिन बाद इसे डिलीट कर दिया गया."
"इसी के मद्देनज़र दिल्ली पुलिस ने टूलकिट लिखने वालों के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 124 ए, 153, 153 ए और 120 बी के तहत मामला दर्ज किया है. इसकी जांच साइबर सेल को सौंप दी गई है. हमने एफ़आईआर में किसी का नाम नहीं लिया है."
किसान आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय समर्थन
भारत में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर हाल में जानी मानी अंतरराष्ट्रीय गायिका रिहाना ने ट्वीट किया था.
उन्होंने लिखा- "इस बारे में कोई बात क्यों नहीं कर रहा है?"
इसके बाद अमेरिकी उप-राष्ट्रपति कमला हैरिस की भांजी मीना हैरिस, पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग और पूर्व पॉर्न स्टार मिया ख़लीफ़ा ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट किया है.
इसके बाद जानामानी युवा पर्यावरणविद ग्रेटा थनबर्ग ने ट्वीट किया कि वो भारत में हो रहे किसान आंदोलन का समर्थन करती हैं.
जिस टूलकिट की बात दिल्ली पुलिस ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेस में की है वो ग्रेटा ने चार फरवरी को सोशल मीडिया पर अपलोड की थी.
ये अपलोड करते हुए उन्होंने लिखा, "अगर ये मददग़ार साबित हो सके तो जो लोग ज़मीन पर हैं ये टूलकिट उनके लिए है. उन्होंने पहला दस्तावेज़ हटा दिया क्योंकि वो पुराना हो गया था."
मामले पर विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग के ट्वीट के बाद यानी तीन फरवरी को भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर इन ट्वीट्स को लेकर बयान जारी किया और कहा कि कुछ वेस्टेड इंटरेस्ट ग्रुप्स इन आंदोलनों को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं.
मंत्रालय ने कहा कि "भारत की संसद ने व्यापक बहस और चर्चा के बाद, कृषि क्षेत्र से संबंधित सुधारवादी क़ानून पारित किया. ये सुधार किसानों को अधिक लचीलापन और बाज़ार में व्यापक पहुंच देते हैं. ये सुधार आर्थिक और पारिस्थितिक रूप से सतत खेती का मार्ग प्रशस्त करते हैं."
"भारत के कुछ हिस्सों में किसानों का एक बहुत छोटा वर्ग इन सुधारों से सहमत नहीं है. भारत सरकार ने प्रदर्शनकारियों की भावनाओं का सम्मान करते हुए, उनके प्रतिनिधियों के साथ बातचीत शुरू की है. इस कोशिश में अब तक ग्यारह दौर की वार्ता हो चुकी है जिनमें केंद्रीय मंत्री हिस्सा ले रहे हैं सरकार ही नहीं, भारत के प्रधानमंत्री की ओर से इन क़ानूनों को स्थगित करने का प्रस्ताव भी दिया गया है."
विदेश मंत्रालय ने इस पोस्ट के बाद दो हैशटैग्स #IndiaTogether और #IndiaAgainstPropaganda का इस्तेमाल किया था. इस पोस्ट के सोशल मीडिया में आने के बाद बॉलीवुड की कई हस्तियां, राजनेता और क्रिकेट खिलाड़ियों ने इन्हीं हैशटैग्स को इस्तामेल कर ट्वीट किए.
इनमें गृह मंत्री अमित शाह समेत बीजेपी के अन्य नेता, अक्षय कुमार, अजय देवगन, सुनील शेट्टी, लता मंगेशकर, सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली शामिल थे.
हालांकि अभिनेत्री तापसी पन्नू का ट्वीट इस सभी से हट कर था. उन्होंने लिखा, "अगर एक ट्वीट आपकी एकता को कमज़ोर कर सकता है, एक मज़ाक आपके भरोसे को डिगा देता है या एक कार्यक्रम आपकी धार्मिक आस्था को चोट पहुंचा सकता है, तो आपको अपने मूल्यों पर फिर से विचार करने की ज़रूरत है, न कि दूसरों के लिए 'प्रौपेगैंडा टीचर' बनने की."
कौन हैं रिहाना और ग्रेटा थनबर्ग?
पॉप म्यूज़िक की दुनिया की सबसे बड़ी हस्तियों में रिहाना का नाम शामिल है. 32 वर्षीय रिहाना ने घरेलू हिंसा, एलजीबीटीक्यू, डोनाल्ड ट्रंप से लेकर म्यांमार और भारत में किसान आंदोलन जैसे विषयों पर ट्वीट किया है.
किसान आंदोलन पर ट्वीट करने के बाद से रिहाना के ट्विटर फॉलोअर्स की संख्या में दस लाख का इज़ाफ़ा होता दिख रहा है. रिहाना ने जब इस मुद्दे पर ट्वीट किए थे तो उनके दस करोड़ फ़ॉलोअर थे, लेकिन इस ट्वीट के बाद ये संख्या बढ़कर दस करोड़ दस लाख हो चुकी है.
वहीं 18 साल की ग्रेटा थनबर्ग जानीमानी पर्यावरणविद हैं. जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर जागरूकता पैदा करने के लिए उन्होंने स्वीडन की संसद के बाहर विरोध-प्रदर्शन के लिए हर शुक्रवार अपना स्कूल छोड़ा था पर्यावरण बचाने के लिए मुहिम छेड़ी थी.
ग्रेटा थनबर्ग को टाइम मैगज़ीन ने 2019 का 'पर्सन ऑफ़ द ईयर' घोषित किया था. इस पुरस्कार के लिए नामित होने वाली वो सबसे कम उम्र की व्यक्ति हैं.
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