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छत्तीसगढ़: हसीना और सुंदरी दोनों लड़कियों से चंदू मौर्य की शादी चर्चा में
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से, बीबीसी हिंदी के लिए
छत्तीसगढ़ के माओवाद प्रभावित बस्तर में हुई एक शादी की सोशल मीडिया पर चर्चा है.
यह शादी टिकरा लोहंगा गांव में संपन्न हुई, जिसमें गांव के चंदू मौर्य ने एक ही मंडप में, एक साथ दो लड़कियों के साथ शादी की रस्में निभाईं.
रविवार को यह शादी संपन्न हुई, जिसकी रस्में चार दिनों तक चलीं.
मुरिया जनजाति के चंदू कहते हैं, "मैंने दोनों लड़कियों से प्यार किया था और किसी को धोखा नहीं दे सकता था. मन में थोड़ा सवाल था. लेकिन जब दोनों इस शादी के लिए तैयार हो गईं तो मैं भी राज़ी हो गया."
उनकी पत्नी सुंदरी कश्यप और हसीना बघेल भी इस शादी से बेहद ख़ुश हैं.
सुंदरी कहती हैं, "मैं इन्हें पसंद करती थी और इनके साथ ही रहना चाहती थी. फिर हसीना आई. वह भी साथ रहना चाहती थी. मुझे तो कोई दिक्क़त नहीं थी. बाद में जब शादी की बात आई तो तय हुआ कि हम दोनों ही चंदू की दुल्हन बनेंगी."
पहली मुलाक़ात में प्रेम प्रस्ताव
टिकरा लोहंगा गांव के रहने वाले नौंवी पास चंदू मौर्य खेती-बाड़ी करते हैं.
कुल जमा दो एकड़ में खेती-बाड़ी के अलावा वनोपज संग्रह, परिवार की आय का बड़ा स्रोत है.
चंदू बताते हैं कि तीन साल पहले उनकी मुलाक़ात सुंदरी कश्यप से तब हुई, जब वे सुंदरी के गांव तोकापाल के एरंडवाल में एक काम के सिलसिले में पहुंचे थे.
पहली मुलाक़ात में ही दसवीं पास सुंदरी ने प्रेम प्रस्ताव रखा और 24 साल के चंदू को भी 21 साल की सुंदरी भा गईं. चंदू अपने गांव लौट आए लेकिन सेलफ़ोन ने दोनों को जोड़े रखा और प्रेम गहराता गया.
फिर हसीना से हुई मुलाक़ात
इस बीच दो साल बाद चंदू की मुलाक़ात अपने गांव में 20 साल की हसीना बघेल से हुई. करंजी गांव की रहने वाली नौंवी पास हसीना बघेल, टिकरा लोहंगा में एक विवाह समारोह में भाग लेने पहुंची थी.
चंदू कहते हैं, "गांव में एक शादी में हसीना आई थी. उसने बात करने के लिए कहा. मैं बोला, चलो ठीक है. मुझे लगा कि ऐसे ही दोस्ती चलती रहेगी, लेकिन बात उतनी भर नहीं थी."
चंदू और 20 साल की हसीना में बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ और एक दिन हसीना ने बताया कि वह उससे प्यार करती है.
चंदू ने उसे हसीना को सुंदरी के बारे में बताया तो हसीना ने उसे सुझाव दिया कि जो उसके पास पहले रहने के लिए आ जाए, उसके साथ रह जाना.
चंदू का कहना है कि वे अपने इस रिश्ते को सुंदरी से छिपाना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने सुंदरी को इस बारे में साफ़-साफ़ बता दिया.
चंदू बताते हैं कि उन्होंने सुंदरी और हसीना की मुलाक़ात करवाई और फिर महीनों तक तीनों सेलफ़ोन पर आपस में बात करते रहे.
लिव इन और शादी
कुछ दिनों बाद हसीना बघेल अपना गांव छोड़ कर चंदू के साथ रहने के लिए आ गईं.
छत्तीसगढ़ की कई जनजातियों में यह बहुत ही सामान्य बात है और कुछ सामान्य रस्मों के साथ, बिना विवाह के ही युवक या युवती एक-दूसरे के घर में रहने लग जाते हैं.
हसीना के आने की ख़बर जब इंदरमाल की सुंदरी कश्यप को मिली तो वो भी चंदू के घर पहुंच गईं. लेकिन सुंदरी के परिजन इसके लिए तैयार नहीं थे कि सुंदरी, चंदू और हसीना के साथ रहे. वे सुंदरी को अपने साथ गांव ले कर लौट गये.
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चंदू बताते हैं, "फिर एक दिन सुंदरी अपने गांव से भाग कर मेरे घर आ गई और हम तीनों साथ रहने लगे."
चंदू बताते हैं कि साथ रहते लगभग एक साल हो गये, तब जाकर समाज के लोगों ने शादी करने के लिए कहा.
सुंदरी और हसीना इस बात के लिए तैयार थीं कि वे चंदू से शादी करके साथ-साथ ही रहेंगी.
विवाह के लिए जो कार्ड छपवाया गया, उसमें दोनों दुल्हनों के नाम शामिल किए गये. गांव में धूमधाम के साथ शादी हुई और दोनों दुल्हनों के साथ विवाह की सारी रस्में पूरी की गईं. इस विवाह में हसीना के परिजन तो शामिल हुए लेकिन सुंदरी के रिश्तेदार नहीं आये.
सुंदरी कहती हैं, "मैं इस शादी से ख़ुश हूं. हम दोनों साथ-साथ घर का काम करते हैं. हसीना के साथ किसी बात पर विवाद नहीं होता."
सुंदरी और हसीना जब ख़ुद बाज़ार जाती हैं तो अपनी पसंद के कपड़े ख़रीदती हैं लेकिन जब चंदू को उपहार देना होता है तो वे कोशिश करते हैं कि दोनों पत्नियों के लिए एक जैसी साड़ी ख़रीदी जाये.
सुंदरी, हसीना और चंदू को भरोसा है कि आने वाले दिनों में भी उनके बीच किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. वे खेती-बाड़ी कर के अपना गुज़ारा कर लेंगे.
क्या कहता है क़ानून
सर्व आदिवासी समाज के नेता प्रकाश ठाकुर का कहना है कि तीनों लोग बालिग हैं और मुरिया आदिवासी समाज के हैं. समाज में बहुपत्नी प्रथा पर रोक नहीं है. ऐसे में आदिवासी समाज भी इस विवाह से ख़ुश है.
हाईकोर्ट की अधिवक्ता प्रियंका शुक्ला का कहना है कि हिन्दू विवाह अधिनियम,न1955 जैसे कई क़ानून अनुसूचित जनजाति के नागरिकों पर लागू ही नहीं होते. हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 2(2) को देखें तो उन्हें अपनी रूढ़ियों और मान्यताओं के कारण इस अधिनियम से छूट मिली हुई है.
वो बताती हैं कि सरकारी गजट में प्रकाशन की स्थिति में यह बहस का विषय हो सकता है.
प्रियंका सूरजमणि स्टेला कुजूर बनाम दुर्गा चरण हांसदा मामले का हवाला देती हुई बताती हैं कि दोनों पक्ष आदिवासी समाज के थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि वे संथाल समाज के रीति-रिवाज से ही संचालित होंगे और उन्हें बहुविवाह के लिए भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 494 के अंतर्गत दोषी नहीं क़रार दिया जा सकता.
प्रियंका शुक्ला कहती हैं, "अनुसूचित जनजाति के नागरिक अपनी रुढ़ियों से ही संचालित होंगे और उन पर हिन्दू विवाह अधिनियम लागू ही नहीं होता. ऐसे में चंदू, सुंदरी और हसीना के विवाह को ग़ैरक़ानूनी नहीं ठहराया जा सकता."
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