क्या छत्तीसगढ़ में बीजेपी से हिंदुत्व का एजेंडा छीनने की कोशिश कर रही कांग्रेस?

    • Author, आलोक प्रकाश पुतुल
    • पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी के लिए

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी की सरकार क्या भाजपा से हिन्दुत्व का मुद्दा छीनने की कोशिश कर रही है? राज्य में सरकार द्वारा राम वन गमन पथ को लेकर निकाली गई रथयात्रा की वजह से ये सवाल पूछा जा रहा है.

राम के नाम पर निकाली गई यह सरकारी रथ यात्रा 19 ज़िलों से होती हुई गुरुवार को रायपुर के चंदखुरी स्थित कौशल्या माता मंदिर पहुंची, जहाँ छत्तीसगढ़ सरकार का पूरा मंत्रिमंडल, एक बस में सवार होकर मंदिर में पूजा अर्चना के लिए पहुँचा.

हालाँकि आदिवासी इलाकों में राज्य सरकार की इस 'श्रीराम वन गमन पथ पर्यटन रथ यात्रा' को भारी विरोध का सामना करना पड़ा है.

आदिवासी संगठनों ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार आदिवासियों का हिंदूकरण कर रही है. वहीं, विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी ने उनका एजेंडा चुरा लिया है.

भाजपा ने कहा 'हमारा कार्यक्रम', कांग्रेस ने कहा दुष्प्रचार

भाजपा के प्रवक्ता और पूर्व मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह उनकी पार्टी का कार्यक्रम था, जिसकी कार्ययोजना भाजपा शासन काल में बनी थी.

आदिवासी नेता केदार कश्यप ने बीबीसी से कहा, "हमारी सरकार ने जब अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बनाने के अपने संकल्प को पूरा किया तो अब छत्तीसगढ़ की कांग्रेस पार्टी की सरकार, भगवान राम के नाम पर राजनीति कर रही है."

हालांकि, कांग्रेस पार्टी ने इसका खंडन किया है.

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक मोहन मरकाम ने बीबीसी से कहा, "भारतीय जनता पार्टी ने 15 सालों तक छत्तीसगढ़ में राज किया लेकिन उनके नेताओं ने माता कौशल्या के मंदिर में कभी दर्शन करने की ज़रुरत नहीं समझी. अब जब भगवान राम के ननिहाल छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार राम वन गमन पथ का निर्माण कर रही है तो भारतीय जनता पार्टी दुष्प्रचार कर रही है."

उन्होंने कहा कि भगवान राम छत्तीसगढ़ के जिन इलाकों से गुजरे हैं, उस पथ को संवारने के लिए कांग्रेस पार्टी की सरकार प्रतिबद्ध है.

क्या है राम वन गमन पथ

छत्तीसगढ़ में यह मान्यता रही है कि यह इलाक़ा भगवान राम का ननिहाल है और भगवान राम ने वनवास के दौरान लंबा वक़्त इस इलाक़े में गुजारा था.

दिसंबर 2018 में कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद से ही भगवान राम से कथित रुप से जुड़े छत्तीसगढ़ के स्थलों की पहचान कर उन्हें विकसित करने की योजना की सुगबुगाहट शुरु हो गई थी.

साल भर के भीतर ही इस दिशा में काम शुरू हो गया और राज्य सरकार ने कैबिनेट की बैठक में राम वन गमन पथ को विकसित करने का फ़ैसला लिया. सरकार का दावा था कि भगवान राम ने छत्तीसगढ़ में वनगमन के दौरान लगभग 75 स्थलों का भ्रमण किया था, जिसमें से 51 स्थल ऐसे हैं, जहां उन्होंने भ्रमण के दौरान रुककर कुछ समय व्यतीत किया था.

राम वन गमन स्थलों में से प्रथम चरण में पर्यटन की दृष्टि से विकास हेतु 8 स्थलों का चयन किया गया. रायपुर जिले के चंदखुरी के कौशल्या माता के मंदिर परिसर के जीर्णाोद्धार एवं सौंदर्यीकरण से इसकी शुरुआत की गई.

इस सरकारी योजना में 2260 किलोमीटर राम वन गमन पथ निर्माण का काम भी शुरु किया गया.

सोमवार को राज्य के दो अलग-अलग हिस्सों से 'श्रीराम वनगमन पथ पर्यटन रथ यात्रा' निकाली गई. राज्य के उत्तरी इलाक़े कोरिया ज़िले के सीतामढ़ी-हरचौका से यह रथयात्रा और मोटरसाइकिल रैली आसानी से शुरू हो गई लेकिन राज्य के दक्षिणी हिस्से बस्तर के सुकमा जिले के रामाराम में विवाद शुरु हो गया.

सुकमा के रामाराम में पिछले 600 सालों से भी अधिक समय से मेला लगता रहा है. यहां आदिवासियों की आराध्य देवी चिटमिट्टीन की पूजा-अर्चना भी होती है.

सोमवार को जब रथयात्रा और मोटरसाइकिल रैली की शुरुआत से पहले इसी रामाराम की मिट्टी लेने के लिये अधिकारी और नेता पहुंचे तो स्थानीय आदिवासियों ने भारी विरोध किया. उनका कहना था कि इस स्थान का भगवान राम से कोई लेना-देना नहीं है.

आदिवासियों के भारी विरोध के कारण रथयात्रा को बिना मिट्टी के ही गांव से रवाना होना पड़ा.

आदिवासियों का विरोध

कांकेर में तो सैकड़ों की संख्या में युवा आदिवासियों ने एनएच 30 को जाम कर दिया. कई घंटों के प्रदर्शन के बाद बड़ी मुश्किल से रथ यात्रा वहाँ से आगे निकल पाई. कोंडागांव में भी आदिवासी कई घंटों तक सड़कों पर उतरे रहे.

सर्व आदिवासी समाज के युवा प्रभाग अध्यक्ष जगत मरकाम कहते हैं, "हमारे देवताओं को ख़ारिज कर के राम को स्थापित करने की कोशिश हो रही है. सरकार संविधान की धारा 244 के अनुच्छेद 13-3 का, पेसा क़ानून 1996 का खुलेआम उल्लंघन कर रही है. सरकार अनुसूचित क्षेत्र में आदिवासियों के ख़िलाफ़ काम कर रही है."

कांकेर में सड़कों पर जब आदिवासी नौजवान उतरे तो ये ज़िला प्रशासन के लिए चुनौती बन गया. रथ यात्रा के अलावा सरकारी अधिकारी भी इस भीड़ के निशाने पर थे.

भीड़ में शामिल लोकेश कुमार सोरी ने कहा, "अधिकारी अनपढ़ हैं और उन्हें पता ही नहीं है कि अधिसूचित क्षेत्र में संविधान ने हम आदिवासियों के लिए किस तरह की व्यवस्था दी है. वे हमारे अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकते तो कम से कम छीनें तो नहीं."

राम वन गमन पथ रथ का रास्ता रोकने, चक्काजाम करने के मामले में पूर्व सांसद सोहन पोटाई समेत कई कांग्रेसी नेताओं के खिलाफ धारा 341, 147 के तहत अपराध भी दर्ज किया गया.

सर्व आदिवासी समाज के नेता और अधिवक्ता लक्ष्मीनारायण गोटा का कहना है कि राज्य सरकार बस्तर के अंदर राम वन गमन पथ निर्माण के नाम पर आदिवासियों की रूढ़ी प्रथा को भंग करना चाहते हैं. उन्होंने कहा, "इस परियोजना से सीधा लाभ किसी को नहीं दिख रहा है. हां, सांस्कृतिक टकराव की संभावना ज्यादा नजर आ रही है. इसलिए श्रीराम वन गमन पथ परियोजना को निरस्त किया जाना चाहिए."

कांग्रेस में भी विरोध के स्वर

केंद्र में मंत्री रहे और वरिष्ठ कांग्रेस नेता, अरविंद नेताम ने बताया कि आदिवासी समाज ने एक बड़ी बैठक बुलाई थी और फ़ैसला किया था कि राम वन गमन पथ जैसी आदिवासी विरोधी योजनाओं का विरोध किया जाएगा. आदिवासियों ने स्थानीय कांग्रेस विधायक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया, कांकेर में पुतले जलाये गये.

नेताम कहते हैं, "कांग्रेस पार्टी भाजपा और संघ के एजेंडे पर काम कर रही है. आदिवासियों को हिंदु बनाने का एजेंडा अब तक भाजपा और संघ का रहा है. कांग्रेस को इस तरह राम वन गमन पथ बनाने की ज़रूरत क्यों पड़ी, यह मेरी समझ से परे हैं. मुझे याद नहीं आता कि कांग्रेस पार्टी ने इस मुद्दे पर कभी कोई बैठक की हो या आदिवासियों से ही चर्चा की हो."

नेताम कहते हैं कि वे इस मामले में अपने समाज के साथ खड़े हैं.

'राम राजनीति नहीं आस्था का प्रश्न'

लेकिन, राज्य में कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष और विधायक मोहन मरकाम का कहना है कि संगठन और सरकार की भूमिका अलग-अलग है. आदिवासी समाज से जुड़े मोहन मरकाम का कहते हैं कि राम वन गमन पथ पर अगर सरकार ने फ़ैसला लिया है तो संगठन उसके साथ है.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "अलग-अलग लोगों की आस्था अलग-अलग देवी देवताओं में होती है. हमें सबका सम्मान करना चाहिए. भाजपा की तरह हमारे लिये राम राजनीति का विषय नहीं हैं, यह आस्था का प्रश्न है."

लेकिन, सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष बीपीएस नेताम किसी की आस्था को किसी और पर थोपे जाने के ख़िलाफ़ हैं.

वे कहते हैं, "80 लाख से अधिक आदिवासी छत्तीसगढ़ में हैं और हम हिंदू नहीं हैं. हम तो जनगणना में अलग धर्म कोड की मांग कर रहे हैं. हम छत्तीसगढ़ सरकार को भी झारखंड की तर्ज़ पर केंद्र सरकार को इस बारे में पत्र लिखने के लिए कहने वाले हैं."

लेकिन ,बस्तर के ही आदिवासी नेता और पिछली सरकार में छत्तीसगढ़ के शिक्षा मंत्री रह चुके केदार कश्यप का कहना है कि आदिवासी हिंदू हैं और वे संघ और भाजपा की स्थापना के पहले से राम की पूजा करते रहे हैं.

केदार कश्यप कहते हैं "छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ बनाने की पूरी कार्ययोजना हमारी सरकार ने तैयार की थी और उसे केंद्र सरकार को भी भेजा था. अब कांग्रेस हमारी ही कार्ययोजना को अपना बता कर पेश कर रही है. यह हैरान करने वाली बात है कि जो कांग्रेस पार्टी अब तक राम के होने पर सवाल खड़े करती थी, वह अब राम वन गमन पथ बना रही है. लेकिन जनता सब जानती है."

कांकेर के विरोध प्रदर्शन में शामिल नौजवान मंगल सोरी का कहना है कि कांग्रेस की कथित सॉफ्ट हिंदुत्व की यह रीति-नीति उसे नुकसान ही पहुंचाएगी.

मंगल कहते हैं, "कांग्रेस को लगता है कि राम वन गमन पथ बना कर वह लोगों को लुभा लेगी तो यह उसकी ग़लतफ़हमी है. यह पथ तो उनके ही काम आयेगा, जो पथ संचालन करते हैं. कांग्रेस उनके लिए ही रास्ता तैयार कर रही है."

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