अमित शाह ने मेरे घर पर खाना खाया पर बात नहीं की: बाउल गायक बासुदेब दास

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- Author, प्रभाकर मणि तिवारी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए, कोलकाता से
पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में 200 से ज़्यादा सीटें जीत कर सत्ता हासिल करने का दावा करने वाली बीजेपी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं.
अमित शाह के बंगाल दौरे से लौटते ही बिष्णुपुर के बीजेपी सांसद सौमित्र ख़ाँ की पत्नी सुजाता मंडल खाँ ने अपने दांपत्य को दाँव पर लगाते हुए टीएमसी का दामन थाम लिया.
इससे पहले आसनसोल नगर निगम के अध्यक्ष और ज़िला टीएमसी प्रमुख जितेंद्र तिवारी बीजेपी में शामिल होने का एलान करने के बाद रातों-रात अपनी बात से पलटते हुए टीएमसी में लौट आए थे.
उसके बाद अब बीजेपी को ताज़ा झटका लगा है बीरभूम ज़िले में शांतिनिकेतन के बाउल कलाकार बासुदेब दास बाउल से.

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बीते रविवार को अमित शाह के बीरभूम दौरे के समय अपने घर उनको और बीजेपी के कई बड़े नेताओं को दोपहर का खाना खिलाकर और बाउल गीत सुना कर बासुदेब ने पूरे देश में सुर्खियां बटोरी थीं.
लेकिन अब शाह के लौटते ही उन्होंने बीजेपी की आलोचना करते हुए 29 दिसंबर को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की रैली में शामिल होने का एलान कर दिया है.
इस मुद्दे पर टीएमसी और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी लगातार तेज़ हो रहा है.
बासुदेब के अचानक पाला बदलने के बाद बीजेपी नेताओं को सफ़ाई नहीं सूझ रही है. वो टीएमसी पर उनकी बाहें मरोड़ने का आरोप लगा रहे हैं.
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ख़ुद राशन का चावल खाते हैं, अमित शाह के लिए महँगा चावल लाए
ख़ुद राशन का चावल खाकर गुजारा करने वाले बासुदेब ने अमित शाह और दूसरे नेताओं को बंगाल में पैदा होने वाले बेहतरीन किस्म के मनीकाटी चावल खरीदे थे. लेकिन विडंबना यह रही कि शाह को भोजन कराने के बावजूद वो उनसे बात तक नहीं कर सके, समस्याएं बताना तो दूर की बात है.
बीरभूम ज़िला टीएमसी प्रमुख अणुब्रत मंडल की मौजूदगी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बासुदेब ने कहा, "मैं गृहमंत्री को बाउल कलाकारों की स्थिति के बारे में बताकर उनके जीवन की बेहतरी के लिए कुछ करने की अपील करना चाहता था.''
''मैंने यह सोचा था कि अपनी एम.ए. पास बेटी की पढ़ाई में सहायता का अनुरोध करूंगा. मुझे लगा था, इतने बड़े नेता हैं,ज़रूर मदद करेंगे. लेकिन उन्होंने कोई बात ही नहीं की. उनके दौरे के बाद बीजेपी के किसी भी नेता ने मुझसे संपर्क नहीं किया है."
दास ने कहा है कि वो ममता बनर्जी की रैली में हिस्सा लेंगे.
वो कहते हैं, "दीदी यहाँ आ रही हैं और उन्होंने हमको न्योता दिया है. हम कलाकार किसी पार्टी के नहीं होते. जो भी सम्मान के साथ बुलाएगा, हम चले जाएँगे."

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लेकिन आपको कैसे पता चला कि केंद्रीय गृहमंत्री आपके ही घर भोजन करेंगे?
इसके जवाब में बासुदेब बताते हैं, "कुछ युवक मोटरसाइकल से घर आए थे. उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी को भोजन कराना होगा. मैं पहले डर गया था. लेकिन बाद में सोचा कि अतिथि की सेवा तो हमारी परंपरा रही है. इसलिए मैंने हामी भर दी.''
''मैंने अपनी जेब से पैसे ख़र्च करके तमाम चीजें खरीदी थीं लेकिन अमित शाह भोजन के बाद एक भी शब्द बोले बिना बगल के दरवाज़े से निकल गए. उसके बाद मैंने ममता दीदी को पत्र लिख कर कहा कि मैं आपकी पदयात्रा के दौरान बाउल गीत गाना चाहता हूं."
क्या अमित शाह के लंच के लिए बीजेपी ने उनको किसी तरह की मदद दी थी?
इस सवाल पर बासुदेब बताते हैं कि बीजेपी ने उनकी कोई मदद नहीं की है और उन्होंने अपने पैसों से ही खाने-पीने का सामान खरीदा था.

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मदद के लिए आगे आई टीएमसी, बीजेपी ने बताया 'ढोंग'
टीएमसी के जिला अध्यक्ष अणुब्रत मंडल ने दास को राज्य सरकार की ओर से आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिया है. उन्होंने साथ ही उनकी बेटी की आगे की पढ़ाई सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है.
मंडल कहते हैं, "बासुदेब के घर शाह का भोजना करना एक नौटंकी थी. बीजेपी ऐसी नौटंकियों में माहिर है. हमने दास की बेटी की आगे की पढ़ाई का पूरा ख़र्च उठाने का फैसला किया है. बीजेपी ने बासुदेब को भले उस दिन के बाद भुला दिया हो, हम साल के 365 दिन उनके साथ हैं."
बासुदेब के मुद्दे पर बढ़ते विवाद के बीच बीजेपी ने टीएमसी की खिंचाई करते हुए सवाल किया है कि है क्या पार्टी को 10 साल तक बासुदेब के परिवार की याद नहीं आई थी?
बीजेपी नेता अनुपम हाजरा कहते हैं, "अब अमित शाह के उनके घर भोजन करते ही टीएमसी ने उनकी मदद का फ़ैसला किया है. बीजेपी की वजह से किसी का तो भला हुआ. लेकिन यही बासुदेब अगले साल बीजेपी के सत्ता में आने के बाद हक़ीक़त सामने लाएंगे.''
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'टीएमसी की ज़ुबान बोल रहे हैं बासुदेब'
बीजेपी के बीरभूम जिला अध्यक्ष श्यामापद मंडल कहते हैं, "यह आरोप पूरी तरह निराधार और राजनीति से प्रेरित है. मैंने सोमवार को भी बासुदेब से बात की थी. लेकिन उन्होंने तब भी कोई नाराज़गी नहीं जताई थी.''
''अब जो बातें वह कह रहे हैं उनमें ज़ुबान तो उनकी है लेकिन शब्द टीएमसी के हैं. उन पर यह सब कहने के लिए दबाव डाला जा रहा है. यह टीएमसी की गंदी राजनीति का नमूना है."
विवाद बढ़ने के बाद प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी इस मुद्दे बयान दिया है.
घोष कहते हैं, "यह सब लंबे समय से चल रहा है. टीएमसी सहायता के नाम पर लोगों को धमका रही है. झाड़ग्राम में लोधा और शबर समुदाय के लोग भुखमरी के शिकार हैं. लेकिन वहां आज तक कोई मुठ्ठी भर चावल लेकर नहीं पहुंचा है."
दिलीप घोष ने कहा, ''सहायता माँगने वालों पर लाठियाँ भाँजी जा रही है. लेकिन ऐसे नाटक से अब लोगों को ज्यादा दिनों तक नहीं डराया जा सकता.''
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