संसद की नई इमारत के निर्माण पर रोक लेकिन शिलान्यास की इजाज़त

सुप्रीम कोर्ट ने नई संसद बनाने की योजना पर अपना कड़ा ऐतराज़ जताया है.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को प्रस्तावित जगह पर भूमिपूजन की इजाज़त दे दी है.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को इस बात का भरोसा दिया है कि इससे संबंधित याचिकाओं पर जब तक सुप्रीम कोर्ट अपना फ़ैसला नहीं दे देती तब तक सरकार किसी भी तरह के निर्माण या तोड़-फोड़ के काम को अंजाम नहीं देगी.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जस्टिस एएम खनवीकलर की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच के सामने कहा कि सिर्फ़ शिलान्यास का कार्यक्रम होगा और अभी इस पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य या किसी भी तरह की तोड़-फोड़ नहीं होगी. पेड़ों को भी नहीं गिराया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने इस पर कहा कि अगर आप पेपरवर्क करते हैं या फिर शिलान्यास करते हैं तो हमें कोई आपत्ति नहीं है लेकिन इस पर किसी भी तरह का निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसी उम्मीद नहीं थी कि केंद्र सरकार निर्माण कार्य को लेकर इस तरह से आक्रामक रैवया अपनाएगी.

इस नई संसद को बनाने का प्रस्ताव पिछले साल सितंबर में रखा गया था. इसमें 900 से लेकर 1200 सांसदों को बैठने का बंदोबस्त किया गया था. अगस्त, 2022 में जब देश अपना 75वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा होगा तब तक इसके निर्माण कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने पाँच दिसंबर को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 दिसंबर को इस नई इमारत की नींव रखेंगे और इसे 2022 तक पूरा कर लिया जाएगा. इसमें अनुमान के मुताबिक़ क़रीब 971 करोड़ रुपये की लागत लगेगी.

उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे प्रोजेक्ट का निर्माण क्षेत्र 64,500 वर्ग मीटर होगा. यह मौजूदा संसद भवन से 17,000 वर्ग मीटर अधिक होगा.

इसके अलावा उन्होंने कहा कि नई इमारत में लोक सभा कक्ष भूतल में होगा, जिसमें 888 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी जबकि राज्य सभा में 384 सदस्यों के बैठने की व्यवस्था होगी. संयुक्त बैठक के दौरान 1272 सदस्य इसमें बैठ सकेंगे.

इस निर्माण कार्य से जुड़ी कई याचिकाएँ कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए कोर्ट में दाख़िल की गई है. इसमें इस प्रोजेक्ट से जुड़ी पर्यावरण संबंधी चिंताएँ भी शामिल हैं.

क्या है संसद भवन निर्माण की नई योजना

इसे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का नाम दिया गया है. इसके तहत राष्ट्रपति भवन से लेकर इंडिया गेट के बीच कई इमारतों के निर्माण की योजना बनाई गई है. संसद की नई इमारत तिकोना होगी हालांकि पुराने संसद भवन का इस्तेमाल भी किया जाएगा.

मौजूदा संसद की इमारत 93 साल पुरानी है. इस पूरे प्रोजेक्ट के पूरा होने की समय सीमा 2024 तक रखी गई है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस पूरे प्रोजेक्ट पर क़रीब 20 हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च होने का अनुमान लगाया है. इसके तहत नया केंद्रीय सचिवालय भी तैयार किया जाएगा जिसमें क़रीब 10 इमारते होंगी.

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