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यूपी: धर्म परिवर्तन अध्यादेश लागू होते ही बरेली में दर्ज हो गई एफ़आईआर, क्या है पूरा मामला
- Author, समीरात्मज मिश्र,
- पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी के लिए
योगी सरकार के नए क़ानून 'उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश-2020' को पिछले हफ़्ते कैबिनेट ने मंज़ूरी दी और शुक्रवार को राज्यपाल की स्वीकृति के बाद ये अध्यादेश अमल में आ गया.
अध्यादेश को लागू हुए अभी कुछ घंटे ही बीते थे कि बरेली ज़िले के देवरनियां थाने में इस क़ानून के तहत पहला मामला भी दर्ज कर लिया गया.
देवरनियां क्षेत्र के ही शरीफ़नगर गांव के रहने वाले एक किसान टीकाराम ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि उनके पड़ोस का ही रहने वाला एक युवक उनकी बेटी को परेशान करता है और धर्म परिवर्तन का दबाव बना रहा है.
पुलिस ने टीकाराम की शिकायत पर शनिवार को एफ़आईआर दर्ज कर ली.
नए क़ानून के तहत लगाई गई धारा को पुलिस ने कंप्यूटराइज़्ड एफ़आईआर में अपने हाथ से लिख दिया क्योंकि यह धारा अभी कंप्यूटर के फ़ॉर्मेट में फ़ीड नहीं की गई है.
पहले भी शिकायत हुई थी
बरेली ज़िले के एसपी देहात संसार सिंह ने बीबीसी को बताया कि यह मामला नया नहीं है बल्कि लड़की के परिजनों ने इस बारे में पहले भी शिकायत की थी लेकिन तब इस संबंध में क़ानून नहीं बना था. अब जबकि क़ानून बन गया है तो पुलिस ने अभियोग पंजीकृत कर लिया है.
संसार सिंह बताते हैं, "अभियुक्त एक साल पहले भी लड़की को भगा ले गया था. तब भी उसके ऊपर केस दर्ज किया गया था. लेकिन तब दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया था. शनिवार को पीड़ित लड़की के परिजनों की ओर से शिकायत की गई कि लड़का धर्म परिवर्तन और शादी के लिए दबाव बना रहा है. नए अध्यादेश के तहत उसके ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज कर लिया गया है. लड़का फ़रार है लेकिन जल्द ही उसकी गिरफ़्तारी कर ली जाएगी."
एसपी देहात संसार सिंह के मुताबिक़, कंप्यूटराइज़्ड एफ़आईआर में विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा नहीं दिख रही है क्योंकि अभी यह धारा कंप्यूटर में अपलोड नहीं की गई है. लेकिन एफ़आईआर में आईपीसी की धारा 504 और 506 के अलावा उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2020 की धारा 3/5 को एफ़आईआर में पेन से लिख दिया गया है.
पीड़ित लड़की के पिता टीकाराम बताते हैं कि शरीफ़नगर गांव के रहने वाले रफ़ीक़ अहमद के बेटे ओवैस अहमद ने उनकी बेटी के साथ पहले जान-पहचान बढ़ाई और बाद में उस पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने लगा.
बीबीसी से बातचीत में टीकाराम कहते हैं, "लड़की ने और हम लोगों ने भी कई बार उसके प्रस्ताव को ठुकरा दिया था लेकिन वह मानने को राज़ी नहीं है और लगातार इसके लिए दबाव बना रहा है और धमका रहा है. इसीलिए हमने देवरनियां थाने में एफ़आईआर दर्ज कराई है."
बचपन से है दोस्ती
स्थानीय लोगों के मुताबिक़ दोनों ही पक्ष एक ही गांव के रहने वाले हैं और ओवैस उस लड़की को बचपन से ही जानता है और दोनों के बीच में दोस्ती भी थी. ओवैस के परिजनों से बात नहीं हो पाई लेकिन उनकी एक बहन क़ुरैशा का कहना है कि उनके भाई को इस मामले में जबरन फँसाया जा रहा है जबकि वो निर्दोष है.
क़ुरैशा कहती हैं, "ये दोनों ही जब छोटे थे तो साथ पढ़ते थे. बाद में लड़की ने पढ़ाई छोड़ दी. पिछले साल वो घर वालों से नाराज़ होकर ख़ुद ही कहीं चली गई थी. भाई मेरा घर पर ही था लेकिन लड़की के परिवार वालों ने इल्ज़ाम लगा दिया कि ओवैस ही उसे लेकर गया है. पुलिस में भी शिकायत की. बाद में लड़की ने ख़ुद ही मना कर दिया कि उसे ओवैस लेकर गया था. अब ये फिर से उसके ख़िलाफ़ पता नहीं क्यों रिपोर्ट लिखा दी गई है."
लेकिन लड़की के परिजनों का आरोप है कि ओवैस अहमद बहला-फुसलाकर प्रलोभन और दबाव में लेकर लड़की पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बना रहा है. लड़की के पिता टीकाराम कहते हैं कि लड़की के ऐसा न करने पर ओवैस उन्हें और परिवार को जान से मारने की धमकी देता है और गाली-गलौज करता है. लेकिन एक साल पहले जब पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी तब समझौता क्यों कर लिया था, इस सवाल के जवाब में टीकाराम कुछ नहीं कहते.
बरेली के एसपी देहात संसार सिंह के मुताबिक़, एक साल पहले लड़की के परिजनों ने ओवैस के ख़िलाफ़ अपहरण का केस दर्ज कराया था लेकिन जब लड़की मिल गई और उसने ख़ुद ही इस आरोप से इनकार कर दिया तो केस ख़त्म कर दिया गया.
लड़की के परिवार को रिश्ते से ऐतराज़
स्थानीय पत्रकार मानवीर सिंह बताते हैं, "दोनों के बीच काफ़ी दिनों से दोस्ती है लेकिन लड़की के परिजनों को इस बात पर ऐतराज़ था. दोनों एक साथ पढ़े थे और दोनों के घरों की दूरी मुश्किल से सौ मीटर होगी. ओवैस पर जब एफ़आईआर दर्ज कराई गई थी तब भी लड़की ने उसे वापस ले लिया था. परिवार वाले कह रहे हैं कि समाज में बदनामी के डर से मुक़दमा वापस ले लिया था नहीं तो उसकी कहीं शादी न होती. अब लड़की की शादी हो चुकी है लेकिन लड़की इस बारे में ख़ुद कोई बात नहीं कर रही है."
वहीं, शरीफ़नगर गांव के ही कुछ लोगों का कहना है कि एक साल तक इस मामले में कुछ भी नहीं हुआ, दोनों के बीच जो विवाद था वो ख़त्म हो गया था, अब अचानक अध्यादेश लागू होने के तत्काल बाद एफ़आईआर दर्ज होने से सभी लोग हैरान हैं.
गांव के ही रहने वाले निर्भय कहते हैं कि ओवैस तो पिछले कई साल से गांव में रहता भी नहीं है. उनके मुताबिक़, "ओवैस दिल्ली में अपने भाई की दुकान में उसके साथ ही काम करता है. उसकी कबाड़ी की दुकान है. गांव कभी-कभी आता-जाता है लेकिन ज़्यादातर वहीं रहता है."
पुलिस पूरे मामले की तफ़्तीश कर रही है और अभियुक्त ओवैस की गिरफ़्तारी की कोशिश कर रही है.
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