भारत-चीन सीमा विवाद के बाद पहली बार मोदी-जिनपिंग होंगे आमने-सामने - प्रेस रिव्यू

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मंगलवार को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन के वर्चुअल सम्मेलन में हिस्सा लेंगे.
मई में पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल पर तनाव शुरू होने के बाद ये पहली बार है जब दोनों नेता आमने-सामने होंगे. इस सम्मेलन की अध्यक्षता रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कर रहे हैं.
अख़बार इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार इस महीने मोदी छह सम्मेलनों में हिस्सा लेने वाले हैं. एससीओ सम्मेलन के बाद नवंबर के मध्य में मोदी वियतनाम द्वारा आयोजित ईस्ट एशिया और आसियान सम्मेलन में हिस्सा लेंगे.
17 नवंबर को मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की अध्यक्षता में ब्रिक्स सम्मेलन में शिरकत करेंगे जिसके बाद 21-22 नवंबर को वो सऊदी अरब द्वारा आयोजित जी-10 देशों के सम्मेलन में शामिल होंगे.
महीने के आख़िर में 30 नवंबर को शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइज़ेशन के सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष मोदी की अध्यक्षता में होने वाली एक बैठक में हिस्सा लेंगे.
अख़बार कहता है कि चीन के आक्रामक रवैये के बीच इन सम्मेलनों के ज़रिए भारत को ख़ुद विश्व के सप्लाई चेन में एक अहम सदस्य के तौर पर पेश करने का मौक़ा मिलेगा.
कोरोना महामारी के दौर में ये सभी सम्मेलन ऑनलाइन आयोजित किए जाएंगे.
इसी ख़बर के बारे में इंडियन एक्सप्रेस लिखता है कि बीते छह सालों में मोदी और शी जिनपिंग की 18 बार मुलाक़ातें हुई हैं. आख़िरी बार दोनों की मुलाक़ात सऊदी अरब द्वारा आयोजित जी-20 देशों के सम्मेलन में हुई थी.
अख़बार लिखता है कि सीमा पर तनाव को लेकर दोनों देशों का कड़ा रुख़ रहा है और ऐसे में इस बात की कम ही संभावना है कि दोनों नेताओं के बीच सीमा को लेकर कोई बात हो.
सामान्य तौर पर आयोजित किए गए सम्मेलनों में नेता सम्मेलन से अलग मुलाक़ात करते हैं और अलग-अलग मुद्दों पर बात करते हैं, लेकिन वर्चुअल बैठकों में ये संभावना लगभग न के बराबर होती है.
अख़बार के अनुसार साल 2017 में तीन महीने लंबा चला डोकलाम विवाद सितंबर 2017 में शियामेन में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन से पहले सुलझ गया था. साल 2014 का चूमर सीमा विवाद भी उस वक्त सुलझा था जब चीनी राष्ट्रपति अहमदाबाद के दौरे पर रहे थे. इस दौरान मोदी ने उनसे बात की थी.
लेकिन इस बार सैन्य कमांडरों के बीच आठ दौर की बातचीत, राजनयिकों के बीच छह दौर की बातचीत और दोनों देशों के रक्षा मंत्री, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और विदेश मंत्रियों के बीच फेस-टू-फेस एक बार बातचीत हुई है, लेकिन अब तक डिसइन्गेजमेंट और डीएस्केलेशन का संकेत नहीं दिखे है.

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चीन से बात कर सकते हैं तो पाकिस्तान से क्यों नहीं - महबूबा मुफ़्ती
14 महीनों तक हिरासत में रहने के बाद रिहा हुईं पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने सोमवार को पहली बार जम्मू का दौरा किया.
अख़बार हिंदुस्तान टाइम्स में छपी एक ख़बर के अनुसार जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को हटाने के केंद्र सरकार के फ़ैसले पर उन्होंने कहा कि सरकार के "एकतरफा और ग़ैर-क़ानूनी" फ़ैसले के कारण युवा हथियार उठाने के लिए बाध्य हुए.
उन्होंने कहा कि कश्मीर में चरमपंथ बढ़ रहा है और इस इलाक़े में शांति बहाल करने के लिए पाकिस्तान और जम्मू कश्मीर के नेताओं से बातचीत की जानी चाहिए.
अख़बार के अनुसार उन्होंने कहा कि "युवा बंदूक उठा रहे हैं क्योंकि बीजेपी ने उनकी आवाज़ों को दबा दिया है, लोगों के पास अब कोई और रास्ता नहीं बचा है. उनके पास दो ही रास्ते मौजूद हैं, या तो वो जेल जाएं या फिर हथियार उठाएं और वो हथियार उठा रहे हैं."
महबूबा मुफ़्ती ने केंद्र सरकार से पाकिस्तान के साथ बातचीत करने की अपील की और कहा कि "अगर चीन से बातचीत की जा सकती है तो पाकिस्तान से क्यों नहीं. हम चीन से हमारी ज़मीन लौटाने के लिए कह रहे हैं और वो अपनी जगह से नहीं हिल रहे. हम पाकिस्तान से क्यों बातचीत नहीं कर सकते."
उन्होंने कहा कि कश्मीर मुद्दे को हल करने का वही रास्ता हो सकता है जो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सुझाया था. उन्होंने कहा हमें उनके साथ बातचीत की शुरूआत करनी चाहिए.

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ख़तरनाक हुआ वायु प्रदूषण, पटाखों पर 30 नवंबर तक बैन
नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली एनसीआर में नवंबर की नौ-दस की आधी रात से लेकर 30 नवंबर की आधी रात तक सभी प्रकार से पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है.
अख़बार जनसत्ता के अनुसार एनजीटी ने कहा है कि पटाखे खुशियां मनाने के लिए होते हैं की मौत को दावत देने के लिए.
अख़बार लिखता है कि एनजीटी से अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की खंडपीठ ने कहा है कि ये पाबंदी देश के हर उस शहर और कस्बे में लागू होगी जहां बीते साल नवंबर के महीने एयर क्वालिटी ख़राब दर्ज किया गया था.
एनजीटी का ये भी कहना है कि जिन शहरों में एयर क्वालिटी 'मीडियम' ख़राब थी वहां ग्रीन पटाखों की बिक्री को इजाज़त दी जा सकती है लेकिन दिवाली, छठ, क्रिसमस या नए साल के मौक़े पर पटाखे चलाने के लिए शाम को दो घंटों का सीमित वक्त तय किया जा सकता है. ये फ़ैसला राज्य सरकारें ले सकती हैं.
अख़बार कहता है कि इससे पहले एनजीटी ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वायु प्रदूषण के स्रोतों पर नियंत्रण करने के लिए कहा था. एनजीटी का कहना है कि वायु प्रदूषण के साथ कोविड-19 का ख़तरा बढ़ सकता है.
अख़बार लिखता है कि पश्चिम बंगाल, राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के बाद अब मुंबई में भी पटाखे जलाने पर रोक लगा दी गई है. दिल्ली एनसीआऱ समेत देश के कई शहरों में प्रदूषण का स्तर गहराता जा रहा है.
सोमवार को दिल्ली से लेकर आगरा और देश के 21 शहरों की हवा ख़तरनाक स्तर पर पहुंच गई थी. दिल्ली में सोमवार को धुंध की मोटी परत छाई रही और लोगों ने आंख में जलन और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की.
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