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बिहार चुनाव- तेजस्वी यादव ने कहा, RJD शुरू से ही A टू Z की पार्टी है
- Author, प्रदीप कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
बिहार चुनाव प्रचार के लिए गुरूवार आख़िरी दिन है. सत्तारूढ़ गठबंधन को तगड़ी चुनौती दे रहे महागठबंधन के नेता तेजस्वी यादव आख़िरी समय में कोई कसर नहीं रखना चाहते हैं लिहाज़ा आख़िरी दिन भी 17 चुनावी सभाएं कर रहे हैं. इसके साथ उनके बिहार चुनाव को लेकर चुनावी सभाओं की संख्या 230 के पार पहुँच जाएगी. इतनी सभा किसी दूसरे नेता ने बिहार में नहीं की है.
बुधवार को मधेपुरा के सागर सेवा सदन में तेजस्वी यादव से जब मुलाक़ात हुई तो रात के 11 बजने वाले थे. इससे पहले वे 16-17 सभाओं को संबोधित कर चुके थे और शाम छह बजे के बाद से ही स्थानीय कार्यकर्ताओं को संबोधित करने और मुलाक़ातों का सिलसिला जारी था. कहा जाता है कि रोम पोप और मधेपुरा गोप का. लेकिन यहां भी महागठबंधन और एनडीए के बीच मुक़ाबला बराबरी का दिख रहा है.
तेजस्वी यादव अपने कार्यकर्ताओं से अपील करते हैं कि सामाजिक न्याय और मंडल कमीशन देने वाले बीपी मंडल के इलाक़े में लालू प्रसाद यादव ने जो विश्वविद्यालय और रेलवे कारख़ाना दिया है, उसको याद रखते हुए लोगों को बूथ तक लाइए. भेंट मुलाक़ात में कोई नाराज़ नहीं रह जाए इसका ख्याल भी रख रहे हैं. सुबह आठ बजे से लेकर रात 11 बजे तक जनसभाओं और जनसंपर्क से कितनी थकान महसूस हो रही है, पूछने पर तेजस्वी यादव ने कहा, 'जनसभाओं की भीड़ और लोगों में बदलाव की चाहत को देखकर थकान ग़ायब हो जाती है.'
तेजस्वी यादव से हुई विस्तृत बातचीत के प्रमुख अंश-
आपको क्या रिस्पॉन्स मिल रहा है और क्या उम्मीद है आपको?
लोगों में काफ़ी उत्साह है. हमलोगों ने जो अजेंडा रखा है, कमाई, पढ़ाई, दवाई और सिंचाई. यही चुनाव के मुद्दे हैं. हमने इसे लोगों के सामने रखा है. भ्रष्टाचार भी बड़ा मुद्दा है. लोगों में नीतीश कुमार को लेकर आक्रोश नहीं है, नफ़रत है, क्योंकि 15 साल से उनकी सरकार है. लोगों को कुछ मिला नहीं है. लोगों को पलायन करना पड़ रहा था, यही सब लेकर हमलोग महागठबंधन के साथ चुनाव मैदान में हैं.
इस चुनाव का एजेंडा 10 लाख रोज़गार बन गया है, ये आइडिया लोगों से मिला है या आपके आइडिया ने लोगों को एकजुट कर दिया है, जिसे आप आंदोलन कह रहे हैं.
हमलोगों ने चुनाव में कभी बेरोज़गारी को मुद्दा बनते नहीं देखा है. लेकिन बिहार में कोरोना काल के चलते और उससे पहले बेरोज़गारी दर सबसे ज़्यादा है. 46 फ़ीसद से ज़्यादा बेरोज़गारी दर है. आप जब लोगों के बीच में रहते हो तो लोगों की समस्याओं के बारे में पता चलता है. हमलोगों ने पहले भी लोगों के मुद्दे उठाए थे. कोरोना काल से बेरोज़गारी हटाओ यात्रा पर हमलोग निकले थे. लोगों की मूलभूत ज़रूरतों, रोटी, कपड़ा और मकान के मुद्दे उठाए थे. 15 साल शासन करने वाले लोगों के पास कोई उपलब्धि नहीं है.
आप 15 साल की बात कर रहे हैं तो एनडीए गठबंधन आपके पिताजी के जंगलराज को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहा है, प्रधानमंत्री मोदी अपनी सभाओं में लालू-राबड़ी राज के दौर की याद दिला रहे हैं. इसपर आप क्या कहेंगे, और आप अगर सरकार में आ जाते हैं तो लॉ एंड ऑर्डर को कैसे सँभालेंगे.
जंगलराज को मुद्दा बनाने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि बीते 15 साल में उन्होंने क्या किया है? वे इतिहास के बासी पन्नों का ज़िक्र कर रहे हैं. हमें तो भविष्य की चिंता है. वे क्या कहते हैं, इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है. हक़ीक़त क्या है, इस पर बात हो सकती है. सरकारी एजेंसियों के आँकड़ों की बात कर सकते हैं. आप एनसीआरबी के हमारे दौर के 15 साल के आँकड़ों को देख लीजिए, फिर इनके 15 साल के आँकड़ों को देखिए. इस पर बात कीजिए. वैसे उस समय में तो हम थे नहीं लेकिन जिन 18 महीनों में, मैं सरकार में रहा, उस दौरान के आँकड़े देख लीजिए और उसके बाद के 18 महीने का देख सकते हैं. क्राइम का ग्राफ़ बढ़ा है. कम नहीं हुआ है.
इन वादों पर विपक्ष का कहना है कि इसे पूरा नहीं किया जा सकता, आप वादे कर रहे हैं लेकिन आपको भी मालूम है कि इसे पूरा करना संभव नहीं है.
नीतीश कुमार जी थक चुके हैं, उनसे बिहार संभल नहीं रहा है. बिहार के कुल बजट दो लाख 13 हज़ार करोड़ का 40 प्रतिशत पैसा ख़र्च नहीं कर पाते हैं. 80 हज़ार करोड़ रूपया तो है ही, राइट टू एजुकेशन का 24-25 हज़ार करोड़ रूपये बचा रह जाता है. कुल एक लाख पाँच हज़ार करोड़ रूपया तो है ही. नीतीश कुमार जी 500 करोड़ रूपये का विज्ञापन देते हैं, इसका पैसा है लेकिन लोगों को नौकरियाँ देने का पैसा नहीं है. 30 हज़ार करोड़ का घोटाला हो जाता है, 60-60 घोटाले, इसका पैसा है. राष्ट्रीय मानक के मुताबिक़ पद बढ़ाइएगा ना. दूसरे विभागों का जीर्णोद्धार हो जाएगा. कॉलेज स्कूल में शिक्षक होंगे. अस्पताल में चिकित्सक और नर्स हों, मणिपुर में प्रति एक लाख आबादी पर एक हज़ार से ज़्यादा पुलिस बल मौजूद है, बिहार में केवल 77 पुलिस बल, इसको तो बढ़ाना होगा.
आपने एक तरह से पार्टी का मेकओवर करने की कोशिश की है, अपनी सभाओं में आप ख़ुद को'ए टू जेड' पार्टी कह रहे हैं, यह क्या है?
कुछ लोगों की ग़लतफ़हमी थी की आरजेडी फ़लां जाति या धर्म की पार्टी थी लेकिन शुरू से आरजेडी ए टू जेड की पार्टी है. चाहे वो सवर्ण जाति हों या पिछड़े हों या दलित हों, महादलित हों, अल्पसंख्यक हों. विपक्ष की ओर से यह फैलाया गया था ताकि हम कमज़ोर हों. लेकिन हम समाज के हर तबक़े को एकसाथ लेकर चलेंगे, इसलिए यह ए टू जेड पार्टी है.
एक आख़िरी सवाल, चुनावी सभाओं का दोहरा शतक तो बन गया है, नतीजे के दिनक्या कुछ होगा, शतक पूरा होगा.
हमारा पूरा विश्वास है कि हमारी स्पष्ट बहुमत की सरकार बनने जा रही है. जनता का प्यार और आशीर्वाद मिलेगा. पहले दो चरण में नीतीश सरकार की विदाई तय हो चुकी है, तीसरे चरण में भी हमलोग क्लीन स्वीप करेंगे.
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