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बाबरी मस्जिद फ़ैसलाः क्या कह रहे हैं अयोध्या के मुसलमान
अयोध्या में गिराई गई बाबरी मस्जिद केस में लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी 32 अभियुक्तों को बरी कर दिया गया है.
इस मुक़दमे की अहमियत का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि बीजेपी के मार्गदर्शक मंडल के प्रमुख नेता लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री उमा भारती समेत कुल 32 लोग इस केस में अभियुक्त थे.
पिछले साल नवंबर में अयोध्या में हिंदू पक्ष को राम मंदिर निर्माण का हक़ देते हुए जस्टिस गोगोई की अध्यक्षता वाली पाँच जजों की संविधान पीठ ने कहा था कि 70 साल पहले 450 साल पुरानी बाबरी मस्जिद में मुसलमानों को इबादत करने से ग़लत तरीक़े से रोका गया था और 27 साल पहले बाबरी मस्जिद ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से गिराई गई.
बीबीसी हिंदी के सहयोगी समीरात्मज मिश्र ने अयोध्या में मुस्लिम तबके के कुछ लोगों से बात की और उनसे जानना चाहा कि वे इस फ़ैसले को लेकर क्या सोचते हैं.
रिज़वान नाम के एक शख़्स ने कहा, "जब बाबरी मस्जिद गिराई गई उस वक़्त मैं छोटा था. मेरी उम्र लगभग 8 साल थी मेरी इसलिए ज़्यादा जानकारी नहीं है. इस फै़सले से हम सब मायूस हैं. इन हालातों में अब कौन अदालतों में जाएगा."
अयोध्या के ही शाहिद उस दौर का हाल बताते हैं. वे कहते हैं कि क़रीब 10 लाख लोग अयोध्या में इकट्ठा थे. वे कहते हैं, "कारसेवकों को भड़काया जा रहा था और इसके चलते यह सब हुआ."
शाहिद कहते हैं, "लगभग 10 लाख लोग थे. कारसेवकों को भड़काया गया तो उन्होंने यह सब किया. हम लोग किसी तरह से जान बचाकर भागे."
"अयोध्या में बहुत मुसलमान और हिंदू हैं. इतने बड़े विवाद के बावजूद यहाँ के स्थानीय लोग इस सब दंगे फसाद में नहीं शामिल हुए. लोग अमनपसंद थे."
यह पूछने पर कि क्या समुदायों के बीच में इस घटना से कोई फ़र्क आया?
अख़लाक बताते हैं, "लोगों ने बीच में समझौते की कोशिश की. इस फै़सले से लग रहा है कि बाबरी मस्जिद को किसी ने नहीं गिराया, लेकिन यह किसी भूकंप से गिर गई. हम लोगों को ऐसी उम्मीद नहीं थी कि ऐसा फै़सला आएगा."
उमा भारती ने एक चिट्ठी लिखी थी कि अगर सज़ा होती है तो ज़मानत के लिए नहीं कहेंगी. हालांकि, ज़्यादातर लोगों ने कहा था कि उन्हें ज़बरन फँसाया गया था. योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कांग्रेस ने लोगों को फँसाया है, इस पर मुसलमानों का क्या सोचना है?
इस पर एक शख़्स ने कहा, "ये कोई बेहतर बात नहीं है. सच्चाई को छुपाया नहीं जा सकता है. अगर इसी तरह से फै़सले होंगे तो कौन भरोसा करेगा."
वहीं अख़लाक कहते हैं कि इस तरह के फै़सले होंगे तो कोर्ट कौन जाएगा. जिसकी लाठी, उसकी भैंस वाला सिस्टम चल रहा है.
वे कहते हैं, "भले ही कोर्ट का फै़सला है, लेकिन सीबीआई ने मुक़दमा चलाया. रायबरेली में ही बरी कर दिया गया था. ये ही लोग क्यों गर्व से कहते थे कि मैंने तोड़ी है मस्जिद, आज क्या हो गया?"
"हमें लग रहा था कि कुछ को छोड़ दिया जाएगा, लेकिन कुछ लोगों को सज़ा भी होगी."
शाहिद कहते हैं- हम एक बार गवाही देने लखनऊ गए थे. केवल एक बार गए थे. यही पूछा गया था कि आपके बाबा को कैसे मारा गया था, क्या हुआ था.
रिज़वान कहते हैं कि अब कहने के लिए कुछ नहीं बचा है, अब कुछ लोग कह रहे हैं कि इसे अदालत में चुनौती देंगे. हम लोगों को ज़्यादा उम्मीद नहीं है. लेकिन बड़े लोग अब तय करेंगे कि क्या करना है.
अब तो लगता है कि चुप रहने में ज़्यादा फ़ायदा है. कोई नहीं बोलना चाहता है.
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