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बाबरी विध्वंस की साजिश हुई थी, लेकिन लालकृष्ण आडवाणी उसमें शामिल नहीं थे: सुधींद्र कुलकर्णी
लालकृष्ण आडवाणी के क़रीबी सलाहकार रहे सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा है कि उनका मानना है बाबरी विध्वंस मामले में साजिश ज़रूर हुई थी, लेकिन उसमें लालकृष्ण आडवाणी शामिल नहीं थे.
सीबीआई कोर्ट के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि लालकृष्ण आडवाणी ने राम जन्मभूमि मुहीम का नेतृत्व ज़रूर किया था, लेकिन वो सांप्रदायिक सोच से प्रेरित नहीं थे.
उन्होंने कहा, "सभी लोगों को तो बरी कर दिया है, तो सवाल उठता है कि आख़िर ये किसने किया, कैसे किया. क्या केवल अचानक घटना हो गई. मेरा मानना है कि इसमें बिल्कुल कुछ साजिश थी, पूर्व नियोजित योजना के तहत ये हुआ है. लेकिन उस योजना में कौन शामिल था, योजना कैसे बनाई गई, इसकी सच्चाई सीबीआई द्वारा बाहर नहीं लाई गई. अब सवाल उठता है कि क्या लालकृष्ण आडवाणी इस साजिश में शामिल थे, मेरा मानना है कि लालकृष्ण आडवाणी जी इसमें शामिल नहीं थे."
सुधींद्र कुलकर्णी के मुताबिक़ वो 1996 से लाल कृष्ण आडवाणी के नज़दीकी रहे और 2012 तक बीजेपी में रहे. वो कहते हैं, "लाल कृष्ण आडवाणी का मानना था कि मुसलमानों को अपनी खुशी से अपना दावा छोड़ देना चाहिए, क्योंकि पूरे देश में अनेक मस्जिदें हैं और अयोध्या में भी है. लेकिन राम जन्मभूमि पर राम मंदिर होना चाहिए ये मांग धार्मिक आस्था का विषय है, ये लगभग सभी हिंदुओं की भावना है. ये उनका मानना था."
उनका कहना है, "जिस दिन 6 दिसंबर को ये घटना हुई आडवाणी इतने व्यथित और पीड़ित थे कि उसी दिन उन्होंने लिखित बयान दिया कि ये मेरी ज़िंदगी का सबसे दुखद दिन है. इसलिए मेरा मानना है कि इस साजिश में लालकृष्ण आडवाणी नहीं थे."
सुधींद्र कुलकर्णी ने कहा कि 6 दिंबर 1992 के दिन जो दुर्घटना हुई वो बहुत ही निंदनीय घटना थी और आज भी है और ये पूरा घटनाक्रम राष्ट्रीय एकता के लिए क ख़तरा था और है.
विशेष अदालत का फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के प्रतिकूल- कांग्रेस
प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस ने बाबरी मस्जिद विध्वंस केस की सुनवाई करने वाली विशेष अदालत के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट के निर्णय और संविधान की परिपाटी से परे क़रार दिया है.
कांग्रेस महासचिव और मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक बयान जारी कर कहा, "सुप्रीम कोर्ट की पाँच न्यायाधीशों की खंडपीठ के नौ नवंबर, 2019 के निर्णय के मुताबिक़ बाबरी मस्जिद को गिराया जाना एक ग़ैर-क़ानूनी अपराध था. पर विशेष अदालत ने सब दोषियों को बरी कर दिया. विशेष अदालत का निर्णय साफ़ तौर से सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के भी प्रतिकूल है."
सुरजेवाला ने आगे कहा, "पूरा देश जानता है कि भाजपा-आरएएस और उनके नेताओं ने राजनीतिक फ़ायदे के लिए देश व समाज के सांप्रदायिक सौहार्द को तोड़ने का एक घिनौना षडयंत्र किया था. उस समय की उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार सांप्रदायिक सौहार्द को भंग करने की इस साज़िश में शामिल थी."
"यहाँ तक कि उस समय झूठा शपथ पत्र देकर सुप्रीम कोर्ट तक को बरगलाया गया. इन सब पहलुओं, तथ्यों व साक्ष्यों को परखने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट ने मस्जिद को गिराया जाना ग़ैर-क़ानूनी अपराध ठहराया था."
सुरजेवाला ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील करने की माँग करते हुए कहा, "संविधान, सामाजिक सौहार्द और भाईचारे में विश्वास करने वाला हर व्यक्ति उम्मीद और अपेक्षा करता है कि विशेष अदालत के इस तर्कविहीन निर्णय के विरुद्ध प्रांतीय व केंद्रीय सरकारें उच्च अदालत में अपील दायर करेंगी तथा बग़ैर किसी पक्षपात व पूर्वाग्रह के देश के संविधान और क़ानून की अनुपालना करेंगी. यही संविधान और क़ानून की सच्ची परिपाटी है."
मुरली मनोहर जोशी ने क्या कहा
छह दिसंबर 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में लखनऊ की सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी 32 अभियुक्तों को बरी कर दिया है.
अदालत ने कहा है कि बाबरी मस्जिद का गिराया जाना पूर्व-नियोजित नहीं था.
इस मामले में पूर्व उप-प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह भी कुल 32 अभियुक्तों में शामिल थे.
बुधवार को इस पर फ़ैसला सुनाते हुए विशेष न्यायाधीश एसके यादव ने कहा कि इन नेताओं ने भीड़ को रोकने का प्रयास किया था लेकिन अराजक तत्वों ने इस काम को अंजाम दिया.
इस मामले में बरी हुए बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी ने वकीलों की प्रशंसा करते हुए कहा कि वो इसके लिए उन्हें बधाई देते हैं.
उन्होंने कहा, "राम मंदिर आंदोलन अपनी अस्मिता और पहचान को सामने रखने का था जो आज पूरा हुआ है, मंदिर निर्माण भी शुरू हो चुका है. मैं अब यह कहूँगा कि जय सिया राम, सबको सन्मति दे भगवान."
आरएसएस ने किया फ़ैसले का स्वागत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है. आरएसएस ने ट्वीट किया, "सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा विवादास्पद ढाँचे के विध्वंस मामले में आरोपित सभी दोषियों को ससम्मान बरी करने के निर्णय का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ स्वागत करता है."
बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अभियुक्त रहे उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बेटे और एटा से सांसद राजवीर सिंह उर्फ़ राजू भैया ने मिठाई बाँटते हुए तस्वीरें ट्वीट की हैं.
उन्होंने लिखा, "आज दिनांक 30 सितंबर 2020 को बाबरी विध्वंस मामले में माननीय बाबू कल्याण सिंह जी समेत सभी श्री राम भक्तों को कोर्ट से बरी किए जाने की ख़ुशी में मिठाई वितरित करते हुए."
केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने भी एक वीडियो ट्वीट करके इस फ़ैसले का स्वागत किया है.
वहीं, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने ट्वीट किया है कि 'वहां कोई मस्जिद नहीं थी, नए भारत में इंसाफ़.'
योगी आदित्यनाथ ने कहा, माफ़ी माँगे सीबीआई
फ़ैसले के बाद इस मामले में अभियुक्त रहे और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने पत्रकारों से बात की. उन्होंने कहा, "बहुत समय बाद एक अच्छा समाचार मिला है. आज के अवसर के लिए जय श्रीराम. स्पेशल कोर्ट का आज का जो निर्णय हुआ है वो अत्यंत महत्वपूर्ण है और हम सबके लिए ख़ुशी का दिन है."
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी ट्वीट करके इस फ़ैसले का स्वागत किया है. साथ ही उन्होंने तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त होने का आरोप लगाया है.
उन्होंने ट्वीट किया, "सत्यमेव जयते! CBI की विशेष अदालत के निर्णय का स्वागत है. तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित हो पूज्य संतों, बीजेपी नेताओं, विहिप पदाधिकारियों, समाजसेवियों को झूठे मुकदमों में फँसाकर बदनाम किया गया. इस षड्यंत्र के लिए इन्हें जनता से माफ़ी मांगनी चाहिए."
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता बिप्लब कुमार देब ने भी इस फ़ैसले का स्वागत किया.
उन्होंने ट्वीट किया, "सत्यमेव जयते! माननीय न्यायालय ने माना है कि बाबरी ढांचा गिराने की घटना पूर्व नियोजित नहीं थी बल्कि अचानक हुई. भारतीय न्यायपालिका ने एक बार पुनः सिद्ध कर दिया है कि सत्य परेशान हो सकता है, किंतु पराजित नहीं. न्यायालय के फ़ैसले का स्वागत करता हूं."
कांग्रेस नेता डॉक्टर रागिनी नायक ने फ़ैसले पर ट्वीट किया.
उन्होंने लिखा, "हर हक़ीकत मजाज़ हो जाए.. बाबरी मस्जिद अपने आप उड़न-छू हो गयी. कहीं कारसेवकों का जमावड़ा नहीं हुआ. भड़काऊ भाषण नहीं दिये गए. रथ-यात्रा नहीं निकाली गयी. संघी ख़ामख़ा श्रेय लेते रहे, हिंसा और विध्वंस काल्पनिक था और वो सब मूर्ख जो न्याय की उम्मीद लिये बैठे थे." इक़बाल अंसारी ने फ़ैसले का किया स्वागत
फ़ैसला आते ही सबसे पहले बीजेपी नेता और बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ट्वीट किया.
उन्होंने फ़ैसले का स्वागत करते हुए लिखा, "जय श्रीराम. आडवाणी जी सहित सभी अभियुक्त दोष मुक्त. बाबरी ढांचा गिराने में कोई पूर्व नियोजित षड्यंत्र नहीं था."
इस फ़ैसले पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ट्वीट किया. उन्होंने फ़ैसले का स्वागत करते हुए लिखा, "लखनऊ की विशेष अदालत द्वारा बाबरी मस्जिद विध्वंस केस में श्री लालकृष्ण आडवाणी, श्री कल्याण सिंह, डा. मुरली मनोहर जोशी, उमाजी समेत 32 लोगों के किसी भी षड्यंत्र में शामिल न होने के निर्णय का मैं स्वागत करता हूँ. इस निर्णय से यह साबित हुआ है कि देर से ही सही मगर न्याय की जीत हुई है."
बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इक़बाल अंसारी ने सीबीआई अदालत के फ़ैसले का स्वागत करते हुए कहा था कि इस फ़ैसले को तभी आ जाना चाहिए था जिस दिन राम जन्मभूमि का फ़ैसला आया था.
उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला सबूतों के आधार पर आया है इस विवाद को और नहीं बढ़ाया जाना चाहिए.
'सार्वजनिक अपराध के लिए किसी को सज़ा नहीं'
सीपीआई (एमएल) की पोलित ब्यूरो सदस्य ने ट्वीट किया, "इस फ़ैसले की आहट तो बहुत पहले से सुनाई पड़ गई थी: बाबरी मस्जिद विध्वंस की साज़िश केस के सभी आरोपी बरी. उच्चतम न्यायालय द्वारा न्याय का विध्वंस."
फ़ैसले के बाद पत्रकार सबा नक़वी ने ट्वीट किया कि इसके लिए सिर्फ़ बीजेपी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए.
उन्होंने ट्वीट किया, "अयोध्या आपराधिक मामले में सभी बरी. ऐसी घटना के लिए कोई सज़ा नहीं जिसने बहुत सारे लोगों की जान ली. इसके लिए अकेले बीजेपी को दोष क्यों दें जब कांग्रेस के शासन में मुक़दमा चलाया जा सकता था."
इसके बाद सबा नक़वी ने अगला ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा, "नया भारत: समकालीन इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक अपराध के लिए किसी को दंडित नहीं किया जाएगा."
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