सुप्रीम कोर्ट ने सिविल सेवा की परीक्षा को स्थगित करने से इनकार किया - आज की बड़ी ख़बरें

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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यूपीएसी सिविल सेवा की प्रिलिमनरी परीक्षा को टालने से इनकार कर दिया.
ये परीक्षा चार अक्टूबर को होनी है. जिसे कोरोना महामारी और देश के कई हिस्सों में बाढ़ की वजह से स्थगित करने की अपील की गई थी.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, जस्टिस एएम खानविलकर, बीआर गवई और कृष्ण मुरारी की पीठ ने केंद्र से कहा कि वो उन छात्रों को एक और मौक़ा देने पर विचार करे, जो महामारी की वजह से परीक्षा के लिए अपने लास्ट अटेम्प्ट में नहीं जा पाए थे.
कोर्ट ने यूपीएससी सिविल सेवा की 2020 और 2021 की परीक्षा को एक साथ कराने की अपील पर विचार करने से भी इनकार कर दिया और कहा कि इससे बाद में दिक़्क़तें आएंगी.
पीठ दो से तीन महीने के लिए सिविल सेवा परीक्षा को स्थगित करने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी.
संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने ये कहते हुए अपील का विरोध किया था कि सभी ज़रूरी सावधानियां बरती जा रही हैं और परीक्षा कराने के लिए सभी तैयारियां की गई हैं.

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कृषि क़ानून पर महाराष्ट्र सरकार ने अपना फ़ैसला वापस लिया
महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने कृषि क़ानून लागू करने के अगस्त के आदेश को वापस ले लिया है. माना जा रहा है कि कांग्रेस के दबाव में ये फ़ैसला लिया गया है.
मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र विकास अघाड़ी सरकार हाल में संसद से पारित हुए विवादित कृषि क़ानूनों को लेकर दुविधा में थी.
दरअसल केंद्र ने जून में तीन कृषि क़ानूनों पर अध्यादेश जारी किए थे. इन विधेयकों को बाद में संसद ने पारित कर दिया और राष्ट्रपति ने इन पर दस्तखत भी कर दिए हैं.
बिल पास होने के बाद उप मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजीत पवार ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार राज्य में कृषि क़ानूनों को लागू नहीं करेगी. राजस्व मंत्री और प्रदेश में कांग्रेस के प्रमुख बालासाहेब थोराट ने भी दावा किया था कि तीनों सत्तारूढ़ पार्टियां विधेयकों के ख़िलाफ़ हैं और इस मसले पर एक समन्वय समिति की बैठक में चर्चा की जाएगी.
हालांकि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने अब तक सार्वजनिक तौर पर इस मामले में टिप्पणी नहीं की थी. उनकी सरकार ने अगस्त में एक सर्कुलर जारी कर स्थानीय प्रशासन को क़ानून से पहले के अध्यादेश को लागू करने का निर्देश दिया था.
मंगलवार को शिवसेना सांसद संजय राउत ने कहा था कि क़ानूनों को लागू करने पर सरकार फ़ैसला लेगी. उन्होंने कहा था, "हमने संसद में विधेयकों का विरोध किया है और मैं कांग्रेस-एनसीपी नेताओं की ओर से व्यक्त की गई भावनाओं से पूरी तरह सहमत हूं. मुख्यमंत्री ठाकरे कैबिनेट के सहयोगियों से चर्चा कर रहे हैं और जल्द ही वो घोषणा करेंगे."
इसके बाद ही बुधवार को ये ख़बर आ रही है कि महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने कृषि क़ानून लागू करने के अगस्त के आदेश को वापस ले लिया है.

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ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का भारत ने किया सफल परीक्षण
भारत ने बुधवार को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल का सफल परीक्षण किया. इस मिसाइल की मारक क्षमता 400 किलोमीटर से भी अधिक है.
डीआरडीओ के चेयरमैन डॉ जी सतीश रेड्डी ने सफल परीक्षण के लिए वैज्ञानिकों की टीम को बधाई दी.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी वैज्ञानिकों को बधाई दी और कहा कि ये उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत की प्रतिबद्धता को बल देगी.
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ब्रह्मोस मिसाइल डीआरडीओ की PJ-10 परियोजना का हिस्सा है जिसके तहत मिसाइल को स्वदेशी बूस्टर के साथ लॉन्च किया गया.
मिसाइल को ओडिशा से लॉन्च किया गया. ये मिसाइल के एक्सटेंडेड रेंज वर्जन का दूसरा परीक्षण है, जिसमें स्वदेशी एयरफ्रेम और बूस्टर लगा है.
ब्रह्मोस एक रैमजेट सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है जिसे सबमरीन, शिप, फाइटर जेट या ज़मीन से लॉन्च किया जा सकता है.
इस मिसाइल को डीआरडीओ और रूस की एनपीओएम संस्था ने मिलकर बनाया है.

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पायल घोष की एफ़आईआर के बाद अनुराग कश्यप को पुलिस का समन
मुंबई पुलिस ने फ़िल्म डायरेक्टर अनुराग कश्यप को अभिनेत्री पायल घोष की एफ़आईआर के बाद यौन उत्पीड़न मामले में समन भेजा है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ मुंबई पुलिस ने अनुराग कश्यप को सुबह 11 बजे वर्सोवा पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने को कहा है. एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (I) (बलात्कार) समेत कई अन्य धाराओं के तहत मामले की जाँच कर रही है.
इससे पहले पायल घोष ने कहा था कि अगर कश्यप के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई तो वो भूख हड़ताल शुरू करेंगी.
पायल ने आरोप लगाया था कि एफ़आईआर दर्ज होने के बावजूद अनुराग कश्यप को गिरफ़्तार नहीं किया गया क्योंकि वो 'प्रभावशाली व्यक्ति' हैं.
अभिनेत्री पायल घोष ने दो हफ़्ते पहले फ़िल्मकार अनुराग कश्यप पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगया था.
पायल घोष ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पीएमो इंडिया को टैग करते हुए लिखा था, ''अनुराग कश्यप ने मेरे साथ ज़बरदस्ती की. नरेंद्र मोदी जी आपसे अनुरोध है कि इनके ख़िलाफ़ कार्रवाई कीजिए और देश को पता चले कि हक़ीक़त क्या है. मुझे पता है कि यह कहना मेरे लिए नुक़सानदेह है और मेरी सुरक्षा ख़तरे में है. कृपया मदद कीजिए.''
पायल घोष के इस ट्वीट पर राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने पूरे मामले को लेकर जानकारी मांगी थी. वहीं, अनुराग कश्यप ने इन सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है.

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भारत सरकार ने बदले के लिए ख़ाते फ़्रीज़ किए: एमनेस्टी
मानवाधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था एमनेस्टी इंटरनेशनल का कहना है कि उसे भारत में अपना काम रोकने के लिए मजबूर किया गया.
संस्थान ने एक बयान जारी करके कहा कि भारत सरकार ने मानवाधिकारों के लिए किए गए उसके काम का बदला लेने के इरादे से उसके बैंक अकाउंट फ़्रीज़ कर दिए हैं.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि इन सबके बावजूद वो स्थानीय स्तर पर मानवाधिकारों की रक्षा करना जारी रखेगा.
15 अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं ने भारत सरकार की एमनेस्टी इंटरनेशनल पर कार्रवाई की निंदा की है.
भारतीय प्रवर्तन निदेशालय ने सीबीआई की ओर से पिछले साल दर्ज एक एफ़आईआर के बाद अलग से जाँच शुरू की थी. एमनेस्टी पर विदेशी चंदा लेने के बारे में बने क़ानून एफ़सीआरए के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था.

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सरकार की आलोचना करती रही है एमनेस्टी इंडिया
एमनेस्टी ने पिछले महीने एक रिपोर्ट में कहा था कि फ़रवरी में दिल्ली में हुए दंगों में मानवाधिकारों का उल्लंघन हुआ था.
इस साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को ख़त्म किए जाने के एक साल पूरा होने पर एमनेस्टी ने हिरासत में रखे गए सभी नेताओं, कार्यकर्ताओं और पत्रकारों को रिहा किए जाने और सामान्य इंटरनेट सेवा बहाल करने की माँग की थी.
एमनेस्टी इंडिया बार-बार ये कहते हुए सरकार की आलोचना करती रही है कि भारत में असंतोष का दमन किया जा रहा है.
भारत में पिछले कई सालों से विदेशी चंदा लेने को लेकर बने नियमों को सख़्त किया जाता रहा है और हज़ारों ग़ैर-सरकारी संगठनों पर विदेशों से चंदा लेने पर पाबंदी लगाई गई है.
मौजूदा मोदी सरकार ने पहले कहा था कि एमनेस्टी के ख़िलाफ़ विदेशी चंदा लेने के क़ानून का उल्लंघन करने के संदेह में जाँच की जा रही है.

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विदेशी फ़ंडिंग रोकने की मोदी सरकार की कोशिश
हाल ही में राज्यसभा में फ़ॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट 2020 यानी FCRA बिल को पास किया गया है. नए बिल में अब ग़ैर-सरकारी संस्थाओं यानी एनजीओ के प्रशासनिक कार्यों में 50 फ़ीसद विदेशी फ़ंड की जगह बस 20 फ़ीसद फ़ंड ही इस्तेमाल हो सकेगा.
यानी इसमें 30% की कटौती कर दी गई है. अब एक एनजीओ मिलने वाले ग्रांट को अन्य एनजीओ से शेयर भी नहीं कर सकेगी और एनजीओ को मिलने वाले विदेशी फ़ंड स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया, नई दिल्ली की ब्रांच में ही रिसीव किए जाएंगे.
सरकार ने ये कहकर इस बिल को सदन में पेश किया था कि विदेशों से मिलने वाले फ़ंड को रेगुलेट करना चाहिए ताकि ये फ़ंड किसी भी सूरत में देश विरोधी गतिविधियों में इस्तमाल ना हों सके.
इस क़ानून के पीछे सरकार का मक़सद विदेशी चंदा लेने पर पाबंदी, विदेशी चंदे के ट्रांसफर और एफसीआरए एकाउंट खोलने को लेकर स्पष्ट नियम और आधार नंबर देने अनिवार्यता की व्यवस्था लागू करना है.

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वेनेज़ुएला ने कहा, विदेशी प्रतिबंधों ने कम की 99 फ़ीसदी आय
अमरीकी प्रतिबंधों के विरोध में वेनेज़ुएला की नेशनल असेंबली में इसी महीने "एंटीब्लॉकेड लॉ" पेश किया गया.
इससे पहले वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलास मादुरो ने कहा है कि अमरीकी प्रतिबंधों के कारण बीते छह सालों में उनके देश की विदेशी मुद्रा आय में 99 फीसदी की कमी आई है.
निकोलास मादुरो ने कहा कि तेल के निर्यात से उनके देश को सालाना 56 अरब विदेशी मुद्रा मिलती है लेकिन बीते साल ये निर्यात आधा करोड़ का भी नहीं था.
ये पहली बार है जब वेनेज़ुएला के गंभीर आर्थिक संकट की बात को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया है.
वेनेज़ुएला की तेल इंडस्ट्री पर लगाए प्रतिबंधों को पार कर निर्यात बढ़ाने से जुड़े एक कार्यक्रम की घोषणा के दौरान मादुरो ने ये बात कही.
इससे पहले 27 सितंबर को मादुरो ने "एंटीब्लॉकेड लॉ" के बारे में जानकारी देते हुए कहा था कि इस क़ानून का मसौदा तैयार कर लिया गया है जिसे 29 सितंबर को नेशनल असेंबली में पेश किया जाएगा.
इधर सोमवार को वेनेज़ुएला के उप राष्ट्रपति डेल्सी रोडरिगेज़ ने अमरीकी प्रतिबंधों से जुड़ी एक रिपोर्ट यूएस "क्रिमिनल ब्लॉकेड अगेन्स्ट वेनेज़ुएला" के बारे सोशल मीडिया पर कहा कि ये रिपोर्ट सरकारी वेबसाइट पर मौजूद है ताकि इस पर नागरिक अपनी राय दे सकें.

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एक अक्टूबर से धान खरीद शुरू करेगी यूपी सरकार
उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा है कि राज्य में एक अटूक्बर से धान की खरीद शुरू होगी.
राज्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई एक कैबिनेट बैठक में ये अहम फ़ैसला लिया गया है.
एक बयान में मुख्यमंत्री ने कहा है कि वो ये सुनिश्चित करेंगे कि इसमें किसानों को किसी तरह की कोई मुश्किल न हो.
साल 2020-21 के लिए सामान्य क्वालिटी के धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,868 प्रति क्विंटल रखा गया है, जबकि ए-ग्रेड के धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,888 प्रति क्विंटल निर्धारित है.
इसके लिए पूरे राज्य में 4,000 खरीद केंद्र बनाए जाएंगे. सरकार का कहना है कि साल 2020-21 के लिए सरकार 55 लाख मिट्रिक टन धान खरीदेगी.
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