अनलॉक 5: दशहरा, दिवाली से पहले क्या-क्या खुलने के हैं आसार

दिल्ली+कोरोना

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    • Author, सर्वप्रिया सांगवान
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

भारत में कोरोना महामारी को देखते हुए 24 मार्च को जो लॉकडाउन शुरू हुआ था उसे अब धीरे-धीरे कई चरणों में खोला जा रहा है ताकि आर्थिक गतिविधियां पटरी पर वापस आ सकें. अब तक केंद्र सरकार दिशानिर्देशों के साथ ऐसे चार चरणों में लॉकडाउन खोल चुकी है.

ऐसी उम्मीद है कि जल्द ही पांचवे चरण के लिए सरकार दिशानिर्देश जारी करेगी.

अब तक मॉल, सैलून, रेस्तरां, जिम जैसी सार्वजनिक जगहों को पिछले चरणों में खोला जा चुका है.

अभी तक सिनेमा हॉल, स्विमिंग पूल, एंटरटेनमेंट पार्क नहीं खुले हैं. सार्वजनिक समारोह को लेकर भी इजाज़त नहीं दी गई है. कॉलेज नहीं खोले गए हैं और स्कूलों के भी आंशिक रूप से खोले जाने की ही अनुमति दी गई है.

तो ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल उठ रहे हैं कि पांचवे चरण में क्या-क्या खोला जा सकता है?

जिम

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इमेज कैप्शन, अब तक कई सार्वजनिक स्थान जैसे मॉल, सैलून, रेस्तरां, जिम को पिछले चरणों में खोला जा चुका है

क्या खुलेंगे सिनेमा हॉल?

मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया ने पहले भी कई बार सरकार से सिनेमा हॉल खोलने की अपील की है.

अनलॉक 3 में भी सिनेमा हॉल खोलने की इजाज़त नहीं दी गई थी.

तब 20 जुलाई को एसोसिएशन ने एक बयान जारी किया था कि लाखों लोगों का रोज़गार उन पर लगे लॉकडाउन से प्रभावित हो रहा है.

एसोसिएशन ने बयान में कहा था कि सभी एहतियाती कदमों को लेकर उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय और सूचना मंत्रालय को भी अपना प्रेजेंटेशन दिया था.

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अनलॉक 4 में भी सिनेमा हॉल के दरवाज़े नहीं खोले गए तो एसोसिएशन ने अख़बारों में विज्ञापन दिए कि कैसे सिनेमा हॉल सुरक्षित हैं. उन्होंने बताया कि 85 देश सिनेमा हॉल खोल चुके हैं.

महाराष्ट्र के एसोसिएशन के अध्यक्ष नितिन दत्तार ने एक बार फिर उम्मीद जताई है कि इस चरण में सिनेमा हॉल लोगों के लिए खोल दिए जाएंगे.

सिनेमा हॉल

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इमेज कैप्शन, देशभर में सिनेमा हॉल पिछले 6 महीने से बंद पड़े हैं

उन्होंने कहा, "अभी तक 1000 करोड़ का नुक़सान हमारी इंडस्ट्री को हो चुका है. केंद्र सरकार अगर परमिशन दे भी दे तो देखना होगा कि राज्य सरकार खोलेगी या नहीं. कई राज्यों ने तो मंदिर खोल दिए, रेस्तरां खोल दिए. लेकिन यहां महाराष्ट्र में तो मंदिर, रेस्तरां और मेट्रो भी नहीं खुले. हमने सरकार से बोला था कि हमें एडवांस में बताइए कि कब से थिएटर खोल सकेंगे क्योंकि हमें सब तैयारियां भी करनी पड़ेंगी."

केंद्र सरकार ने तो नहीं लेकिन पश्चिम बंगाल की सरकार ने एक अक्तूबर से सिनेमा हॉल खोलने की अनुमति दे दी है लेकिन 50 लोगों से ज़्यादा लोगों का इकट्ठा होना मना है.

अभी किसी और राज्य ने यह फ़ैसला नहीं किया है. हालांकि मनोरंजन राज्य सूची का विषय है और सिनेमा हॉल उसी के तहत आते हैं.

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हालांकि केंद्र सरकार 21 सितंबर से ओपन थियेटर खोलने की इजाज़त दे चुकी है लेकिन उसी दिशा निर्देश में ये भी कहा गया है कि 100 से ज़्यादा लोग कहीं भी किसी भी उद्देश्य से इकट्ठा नहीं हो सकते हैं.

लॉकडाउन में कैसा होगा त्योहारों का सीज़न

तभी ये सवाल उठता है कि इस 100 लोगों की 'कैप' के बावजूद किस तरह से त्योहार सार्वजनिक रूप से मनाए जा सकेंगे.

अक्तूबर-नवंबर के महीनों में देशभर में कई ख़ास त्योहार आते हैं जो काफ़ी धूमधाम से मनाए जाते हैं.

दिल्ली में दशहरा के मौक़े पर भव्य रामलीला का आयोजन होता है. लवकुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने बताया कि इस साल भी रामलीला का आयोजन किया जाएगा.

उन्होंने कहा, "21 सितंबर से ओपन थिएटर की इजाज़त केंद्र सरकार दे ही चुकी है, महामारी के साथ जो सावधानियां बरतने की ज़रूरत है, वो तो करेंगे ही. सोशल डिस्टेंसिंग के साथ, कम से कम दर्शकों के साथ, चैनलों पर लाइव दिखाने का इंतज़ाम भी हम कर रहे हैं."

वहीं, दिल्ली सरकार का भी अब तक यही स्टैंड है कि सार्वजनिक समारोह में 50 से ज़्यादा लोग शामिल नहीं हो सकते.

तो शायद इस बार रामलीला का आयोजन अपने असल रंग में ना हो पाए.

वैसे उत्तर प्रदेश के अयोध्या में पहली बार रामलीला का भव्य आयोजन किया जाएगा जो 17 से 25 अक्तूबर तक चलेगा जिसमें अभिनेता रवि किशन, मनोज तिवारी और विंदु दारा सिंह भूमिका निभाएंगे.

रामलीला

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इमेज कैप्शन, पहली बार अयोध्या में सरयू घाट पर नौ दिन के लिए रामलील का आयोजन किया जाएगा जिसमें सांसद मनोज तिवारी अंगद का रोल निभाएंगे.

वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने दुर्गा पूजा के त्योहार के लिए पंडाल लगाने की इजाज़त दे दी है.

लेकिन कुछ दिशानिर्देश भी जारी किए हैं जैसे पंडाल चारों तरफ़ से खुले होने चाहिए. मास्क लगाना अनिवार्य होगा और पंडाल में कई जगह सेनिटाइज़र रखे होने चाहिए.

साथ ही राज्य सरकार ने सभी दुर्गा पूजा समितियों को 50 हज़ार रुपये देने का भी एलान किया है.

लेकिन इसके साथ ही 100 लोगों की सीमा का पालन कैसे सुनिश्चित किया जा सकेगा, ये देखने वाली बात होगी.

दुर्गा पूजा

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इमेज कैप्शन, कोलकाता में दुर्गा पूजा की तैयारियों में एक मूर्तिकार. कोरोना महामारी के देखते हुए इस बार मूर्तियों के कम ऑर्डर मिल रहे हैं

वहीं नवरात्र का त्योहार गुजरात में ख़ूब धूमधाम से मनाया जाता है. जगह-जगह समितियां बड़े मैदानों में गरबे का आयोजन करती हैं.

लेकिन गुजरात सरकार ने नवरात्रि महोत्सव को नहीं मनाने का फ़ैसला किया है.

अहमदाबाद में एक इवेंट कंपनी चलाने वाले सलमान ने कहा कि पिछले कई महीने से पूरे गुजरात में इवेंट इंडस्ट्री को बहुत नुक़सान झेलना पड़ा है.

उन्होंने बताया, "लॉकडाउन की वजह से हमें तो नुक़सान हुआ ही, हमारे पीछे-पीछे लाइट, डेकोरेशन और बाकी वेंडर्स का रोज़गार भी प्रभावित हुआ है. हमने कई बार सरकार से अपील की कि वो नवरात्रि के लिए कम से कम सोसाइटी वालों को ही छोटे-छोटे आयोजन करने की अनुमति दे दे तो भी हमारे लिए कुछ बेहतर होगा. लेकिन अभी तो ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा. कोरोना की स्थिति ही ऐसी है कि सरकार पर दबाव नहीं डाल सकते."

हो सकता है कि त्योहारों के सीज़न को देखते हुए केंद्र सरकार सार्वजनिक आयोजनों में थोड़ी ढील दे. लेकिन साथ ही आख़िरी फ़ैसला राज्य सरकारों के हाथ छोड़ सकती है.

क्या स्कूल पूरी तरह खोले जाएंगे?

ऑनलाइल क्लास

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इमेज कैप्शन, हैदराबाद की एक स्कूल टीचर बच्चों की ऑनलाइन क्लास लेते हुए

21 सितंबर से केंद्र सरकार ने नौवीं से बारहवीं कक्षा तक के लिए स्कूल खोलने की इजाज़त दे दी थी. लेकिन अंतिम फ़ैसला राज्य सरकारों के हाथ छोड़ा.

इसी वजह से हरियाणा, कर्नाटक, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में स्कूल खुले लेकिन दिल्ली, पश्चिम बंगाल ने स्कूल खोलने से मना कर दिया.

हालांकि स्कूल खोलने को लेकर अभिभावक क्या सोचते हैं, इस पर ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल कहते हैं, "अभिभावक बिल्कुल नहीं चाहते अपने बच्चों को महामारी के बीच स्कूल भेजना. तनाव में बच्चे कैसे पढ़ पाएंगे. बार-बार कितना ध्यान रखा जा सकेगा. स्कूलों के लिए मुमकिन नहीं है कि वे महामारी को देखते हुए सभी प्रक्रिया का पालन कर सकें."

लेकिन जैसे धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था खोली जा रही है, त्योहार मनाने के लिए भी व्यवस्था की जा रही है तो स्कूल क्यों ना धीरे-धीरे खोले जाएं.

इसका जवाब वे देते हैं कि रोज़गार मजबूरी है, स्कूल खोलना मजबूरी नहीं है. स्कूल तब तक ऐसे ही चलाए जा सकते हैं जब तक महामारी है.

इसी बात पर सुमित वोहरा भी सहमति जताते हैं कि अभिभावक अभी बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं है. सुमित एक स्कूल एडमिशन संबंधित वेबसाइट 'एडमिशन नर्सरी' चलाते हैं.

उन्होंने बताया, "हमने एक सर्वे किया था जिसमें ढाई हज़ार से ज़्यादा पैरेंट्स ने हिस्सा लिया और 97 फ़ीसदी लोगों ने कहा कि वे अभी बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते. कई स्कूल भी नहीं चाहते कि स्कूल खुलें क्योंकि फ़िलहाल बहुत दिक्कत होगी. पर जैसे दिल्ली में सिर्फ़ ट्यूशन फ़ीस ही ली जा सकती है तो कई स्कूल चाहते भी हैं कि स्कूल खुलेंगे तो पूरी फीस ले पाएंगे.

वे कहते हैं, "हरियाणा में 21 सितंबर से आंशिक रूप से स्कूल खुले लेकिन आप खुद देख लीजिए अख़बारों में छपा है कि सिर्फ़ तीन फ़ीसदी बच्चे ही स्कूलों में गए."

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