कोरोना लॉकडाउन: एकांत में रहने वाले संन्यासी हमें क्या सिखा सकते हैं?

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- Author, हेपज़ीबा एंडरसन
- पदनाम, बीबीसी वर्कलाइफ़
आप लंबे समय से अकेले हैं? अपना काम ख़ुद कर रहे हैं? आपके बेतरतीब बालों को सैलून की ज़रूरत पड़ गई है?
लॉकडाउन में या आइसोलेशन में रह रहे लोग अपनी तुलना संन्यासियों के जीवन से कर सकते हैं.
कोविड-19 वैश्विक महामारी में मोबाइल और इंटरनेट ने संपर्क के तमाम रास्ते मुहैया करा रखे हैं, फिर भी हमारे घरों में पहाड़ पर बनी कुटिया जैसे एकांत का अहसास हो सकता है.
बेशक़ एक बड़ा अंतर मौजूद है. लॉकडाउन किया गया है, जबकि संन्यासियों ने ख़ुद अपने लिए एकांत का जीवन चुना था.
विकासवादी जीव विज्ञान हमें सिखाता है कि हम सामाजिक प्राणी हैं. ज़िंदा रहने और आगे बढ़ने के लिए हम रिश्ते और समुदाय बनाना जानते हैं.
ऐतिहासिक सबूत हैं कि इंसान में दूसरी आकांक्षा भी मौजूद रही है जो एकाकी जीवन की ओर ले जाती है.
हम वास्तविक और काल्पनिक दोनों तरह के संन्यासियों के आकर्षण में बंधे रहते हैं. कवयित्री एमिली डिकिन्सन, अरबपति हॉवर्ड ह्यूग्स और डॉ. स्यूस ग्रिंच इसके उदाहरण हैं.
18वीं सदी के ब्रिटेन में, ज़मींदारों ने कुछ छोटे मंदिर बनवाए थे जहां पैसे देकर कुछ लोगों को भिक्षुओं के वेष में रखा जाता था.

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रेगिस्तान के संन्यासी
अंग्रेजी का hermit शब्द 12वीं सदी का है. यह ग्रीक शब्द erēmia से निकला है जिसका अर्थ होता है रेगिस्तान. इस अर्थ से इसकी धार्मिक पृष्ठभूमि का पता चलता है.
पॉल ऑफ़ थेब्स को पहला ईसाई संन्यासी माना जाता है. वह 13 साल की उम्र में एक उत्पीड़न केंद्र से भाग निकले थे.
मिस्र के रेगिस्तान में वह 100 साल तक एकांत में रहे. 314 ईस्वी में 113 साल की उम्र में उनका निधन हुआ.
पॉल ऑफ़ थेब्स एक गुफा में रहते थे. माना जाता है कि एक कौआ उनके लिए रोटी लाता था. खजूर के पत्तों से वह अपना शरीर ढंकते थे.
उनके आख़िरी दिनों में डेजर्ट फ़ादर्स मूवमेंट शुरू करने वाले भिक्षु एंथनी दि ग्रेट उनसे मिले थे. एंथनी ने हजारों लोगों को भिक्षुओं का जीवन जीने के लिए प्रेरित किया था.
दूसरे धर्मों के अपने संन्यासी हैं. हिंदू दार्शनिकों, ताओवादी कवियों और यहूदी रहस्यवादियों को समाज से दूर रहकर अपने विश्वास के प्रति पूरी तरह समर्पित होने के लिए जाना जाता है.
महिला संन्यासिनें भी हुई हैं. मिस्र की सेंट मैरी शारीरिक भूखों के प्रायश्चित के लिए नितांत एकांत में रहती थीं.
चौथी और पांचवी सदी में पवित्र महिलाएं मठों में रहती थीं. फिर भी संन्यासियों के बारे में हमारे मन में बनी छवियां लैंगिंक धारणाओं से अछूती नहीं रहीं.
बौद्ध धर्म की प्रारंभिक महिला भिक्षुणियां संघ में अपवाद की तरह होती थीं. टैरो कार्ड की गड्डी के हर्मिट कार्ड की तरह उनकी तस्वीर पुरुष के रूप में बनाई जाती है.
साहित्य में जो महिलाएं एकांत का जीवन चुनती हैं उनको अक्सर दया की पात्र या बदनीयत दिखाया जाता है.
चार्ल्स डिकेन्स के उपन्यास की पात्र मिस हविशम या चार्लोट ब्रोंटे की "मैडवूमेन इन दि एटिक" की तुलना डेनियल डेफो की "रॉबिन्सन क्रूसो" से करके देखें.
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एकांत का समय नहीं
क्रूसो ने ख़ुद से एकांत नहीं चुना, फिर भी वह इसके मिसाल बन गए. कैरेबियाई द्वीप पर फंसे होने के दौरान उन्होंने विश्वास करना सीखा. दिल तोड़ने वाली घटनाओं के बावजूद उन्होंने कभी ख़ुद को अकेला महसूस नहीं किया.
क्रूसो ने हमेशा ख़ुद को व्यस्त रखा. वह अपना घर बनाने में लगे रहे, फसल उगाते रहे और जंगली बकरियों को पालतू बनाने में व्यस्त रहे.
डेफो के उपन्यास के दिग्गज पात्र को एक और फायदा था. उनके बारे में तब लिखा गया था जब हम अकेलेपन की आज की अवधारणा को नहीं जानते थे.
वास्तव में, अकेलेपन का ज़िक्र अंग्रेजी साहित्य में 1800 ईस्वी से पहले शायद ही कभी दिखता है.
इसकी एक वजह तंग जीवनशैली है जिसमें लोगों को जाने के लिए मज़बूर किया गया. आज जिस तरह कई लोग अकेले जीवन गुजारते हैं, ऐसा उन दिनों नहीं सुना जाता था.
अकेले रहना एकाकीपन का पर्याय नहीं है. अगर हम दोनों शब्दों में भ्रमित होते हैं तो शायद इसलिए कि हम जिस समाज में रहते हैं उसमें किसी को अकेला छोड़ देना सज़ा के तौर पर देखा जाता है.
फिर भी भीड़-भाड़ वाली पार्टी में अनजान चेहरों के बीच फंसे लोग जानते हैं कि अकेला महसूस करना और अकेला होने में अंतर है.
ख़ुद में रहना वास्तव में शांति दे सकता है. किशोरों पर हुए एक अध्ययन में पाया गया कि जब वे अकेले रहते हैं तो ख़ुद के बारे में बेफिक्र रहते हैं.
अपने साथ समय बिताएंगे तो ख़ुद को जानेंगे कि आप कौन हैं. समाज के बारे में संन्यासी चाहे जितने असंतुष्ट हों, लेकिन वे ख़ुद से संतुष्ट होते हैं.
जैसा कि अमरीकी दार्शनिक हेनरी डेविड थोरो ने माना है, "मुझे कभी भी ऐसा साथी नहीं मिला जो एकांत से बढ़िया हो."

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आधुनिक संन्यासी
थोरो का एकाकी जीवन बहुत बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है. कनेक्टिकट में तालाब किनारे वह रात्रिभोज की मेज़बानी करते थे. उनकी मां कपड़े साफ कर दिया करती थीं. फिर भी थोरो ने संन्यासी जीवन के लिए प्रेरित करने वाले कई काम किए.
प्रकृति के करीब जाने के लिए वह दो साल, दो महीने और दो दिनों के लिए एकांत में चले गए. मठ के भिक्षुओं की तरह उन्होंने एकदम सादा जीवन बिताया और अपने काम में लगे रहे.
एकांत में रहने के पर्याप्त रचनात्मक फायदे हैं. ग्रीक दार्शनिक प्लेटो को पहला एकांतवासी कवि माना जाता है. उन्होंने कहा था कि सोचने के लिए उनको एकांत की ज़रूरत होती है.
1935 के अपने निबंध 'The Case for Hermits' में अंग्रेजी लेखक जीके चेस्टर्टन ने लिखा है, "यदि पुरुषों को एकांत न मिले तो वे पागल हो जाते हैं."
वर्जीनिया वूल्फ ने अपने निजी कमरे की कल्पना की और कवि विलियम वर्ड्सवर्थ ने एकांत को "आनंद" घोषित किया था.
एकाकी जीवन के प्रति सबसे ज़्दादा रुझान इस 21वीं सदी में ही हुआ. कोविड-19 वैश्विक महामारी के शहरों में फैलने से पहले से ही पार्टियों से दूर घर में रहने में खुशी की तलाश शुरू हो गई थी.
जापान में शारीरिक और सामाजिक संपर्कों से दूर रहने वाले हिकिकोमोरी लोगों की तादाद बढ़ रही है.
यकीनन, तकनीक ने पूरी दुनिया को हमारे सोफे तक ला दिया है. डिलीवरू और नेटफ्लिक्स के होने से हमें अपने घरों से बाहर निकलने की ज़रूरत कम पड़ रही है.
इसका मतलब यह है कि सबसे ज़्यादा प्रतिबद्ध संन्यासी का जीवन भी पहले जैसा नहीं है.
माउरो मोरांडी इटली के रॉबिन्सन क्रूसो के रूप में मशहूर हैं. 80 साल की उम्र में वह सर्डीनिया तट से दूर बुडेली द्वीप पर अकेले रहते हैं. उनका अधिकांश समय पढ़ने, चिंतन करने और लकड़ियां इकट्ठा करने में बीतता है.
पिछले 30 साल में बुडेली द्वीप पर रह रहे मोरांडी अब इंस्टाग्राम हैं. उनको 47 हज़ार लोग फॉलो करते हैं जिनके लिए वे अपनी तस्वीरें अपलोड करते रहते हैं.

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कुछ रचनात्मक कीजिए
ग्रीक शब्द erēmia की जड़ें erēmos में है जिसका अर्थ है उजाड़ या निर्जन. हालांकि एकांत में एक तरह का खालीपन भी घेर सकता है लेकिन इसमें शांति भी तलाशी जा सकती है.
चेस्टर्टन ने अपने निबंध में लिखा है- "समाज में लोग अपने दोस्तों के साथ झगड़ते हैं, लेकिन एकांत में होने पर वे उनको माफ़ कर देते हैं." उन सद्भावनाओं को दोबारा अपने अंदर भर लें.
आज की बात करें तो हम फोन उठाकर बातें कर सकते हैं. याद रखें कि अकेले होने का मतलब अकेलापन महसूस करना नहीं है, ख़ासकर तब जबकि अलग-अलग रहने का फ़ैसला सबने सामूहिक तौर पर किया है.
संन्यासी जीवन के गहरे अर्थ पर ध्यान लगाते हैं लेकिन परंपरागत रूप से वे ऐसे आवास चुनते हैं जहां शरीर और आत्मा को साथ रखना रोज़ की चुनौती हो.
अपनी देखभाल के रोज़ाना के काम में क्रूसो ख़ास तौर पर बहुत मेहनत करते थे. अगर आपके पास पालतू बनाने के लिए जंगली बकरियां नहीं हैं तो अपनी खिड़की पर कुछ बीज बोने की कोशिश करें.
संन्यासी विश्वास के बल पर टिके रहते हैं- किसी देवता पर न हो तो अलौकिक शक्ति पर विश्वास होता है.
यदि अपने भीतर की पुरानी लालसाओं और महत्वाकांक्षाओं की गूंज आप तभी सुन पाते हैं जब जीवन शांत हो तो अब यह पता लगाने का समय है कि क्या आप इतने साहसी हैं कि अपना इंटरनेट कनेक्शन बंद कर दें.
आख़िर में, इतिहास की दुर्लभ स्त्री संन्यासियों में से एक नॉर्विच की ईसाई रहस्यवादी जूलियन- जो बचपन में प्लेग की शिकार हुईं और वयस्क होने पर गंभीर बीमारी से बच गईं- उनके शब्द हम सब आस्तिकों, अज्ञेयवादियों और नास्तिकों पर लागू होते हैं.
"सब अच्छा होगा, सब अच्छी तरह से होगा और सभी चीज़ें अच्छी तरह से होंगी."
(बीबीसी वर्कलाइफ़ का अंग्रेज़ी में छपा मूल लेख पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए.)

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