अयोध्या के बाद मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि का मामला पहुंचा अदालत- प्रेस रिव्यू

श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा

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पिछले साल अयोध्या में राम जन्मभूमि ज़मीन विवाद मामले में फ़ैसला आया और अब मथुरा में भी ऐसा ही ज़मीन विवाद अदालत पहुंचा है.

श्रीकृष्ण जन्मस्थान की 13.37 एकड़ ज़मीन पर मालिकाना हक़ को लेकर अधिवक्ताओं ने सिविल जज सीनियर डिवीज़न की अदालत में याचिका दाख़िल की.

द इंडियन एक्सप्रेस की इस रिपोर्ट के मुताबिक़ इस केस में भगवान श्रीकृष्ण को वादी बनाया गया है.

याचिका में कहा गया है कि मुसलमानों की मदद से शाही ईदगाह ट्रस्ट ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर क़ब्ज़ा कर लिया और उनके स्थान पर एक ढांचे का निर्माण कर दिया. भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण का जन्मस्थान उसी ढांचे के नीचे स्थित है.

इससे पहले मथुरा के सिविल जज की अदालत में एक और वाद दाख़िल हुआ था जिसे श्रीकृष्ण जन्म सेवा संस्थान और ट्रस्ट के बीच समझौते के आधार पर बंद कर दिया गया था.

साल 1973 को इस संबंध में कोर्ट ने एक फ़ैसला दिया था. अभी के केस में अदालत के उस फ़ैसले को रद्द करने की मांग की गई है.

इसके साथ ही यह भी मांग की गई है कि विवादित स्‍थल को बाल श्रीकृष्‍ण का जन्‍मस्‍थान घोषित किया जाए.

सर्दियों के लिए एलएसी पर ख़ास तैयारी कर रही है भारतीय सेना

सेना

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द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय सेना सर्दियों में एलएसी पर सैनिकों की तैनाती की तैयारी कर रही है क्योंकि बातचीत के ज़रिए तनाव के कम होने की उम्मीदें धूमिल हो रही हैं.

भारत और चीन दोनों के लगभग 50-50 हज़ार सैनिक इस क्षेत्र में तैनात हैं. टैंकों, तोपखाने और वायुसेना की भी तैनाती है. सैन्य सूत्रों ने अख़बार को बताया है कि दोनों देश एक दूसरे की तैनाती के हिसाब से अपनी तैनाती की योजना बनाएंगे.

लद्दाख की सर्दियां बेहद सख़्त और ख़तरनाक होती हैं. ऐसे में दोनों ही देश ऊंचाइयों से कुछ नीचे आ सकते हैं और इस क्षेत्र में तैनात सैनिकों की संख्या कम भी कर सकते हैं.

एक शीर्ष अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, "हम परिस्थितियों पर नज़र रखे हुए हैं. हमें देखना होगा कि पीएलए क्षेत्र में अपने कितने सैनिकों की तैनाती रखती है. पीएलए सर्दियों में भी कुछ अहम जगहों पर सैनिक तैनात रख सकती है."

नियंत्रण रेखा पर भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने हैं और कुछ जगहों पर तो दोनों के बीच बस चंद सौ मीटर का ही फ़ासला है.

जून में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें बीस भारतीय सैनिक मारे गए थे. दोनों देशों के बीच तब से ही तनाव बढ़ा हुआ है.

सड़क हादसे में मौत का सामाजिक आर्थिक नुकसान 91 लाख

सड़क दुर्घटना

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द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में सड़क हादसे में होने वाली प्रत्येक मौत का सामाजिक आर्थिक नुकसान 91 लाख रुपए के बराबर होता है जबकि गंभीर रूप से घायल होने पर यही 3.6 लाख रुपए के बराबर होता है. ये बात सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से कराए गए एक शोध में पता चली है.

भारत में साल 2018 में 1.51 लाख लोग सड़क हादसों में मारे गए थे जिनका अर्थव्यवस्था पर क़रीब 1.47 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ. इसी साल हादसों में 4.69 लाख लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे.

इस शोध में सड़क हादसों की वजह से अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान का अनुमान लगाया गया है. इससे पहले साल 1999 में इसी तरह का शोध किया गया था.

पिता-पुत्र की हिरासत में मौत पर पुलिसकर्मियों पर आरोपतय

पुलिस हिरासत में पिता पुत्र की मौत के बाद तमिलनाड में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे

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तमिलनाडु में पुलिस हिरासत में पिता-पुत्र की मौत के मामले में निलंबित नौ पुलिसकर्मियों पर सीबीआई ने आरोप तय किए हैं.

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, अभियुक्त फ़िलहाल न्यायकि हिरासत में हैं और मदुरै जेल में बंद हैं.

सत्तनकुलम पुलिस स्टेशन के इन नौ पुलिसकर्मियों पर सीबीआई ने चार्जशीट दायर कर दी है. इसी थाने में व्यापारी पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी.

आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने पिता-पुत्र की बेरहमी से पिटाई की थी. तमिलनाडु में इस घटना पर व्यापक प्रदर्शन हुए थे. चार्जशीट में अभियुक्तों पर क़त्ल की धाराएं भी लगाई गई हैं.

ब्राह्मण विरोधी पोस्ट करने पर हुई दलित वकील की हत्याः पुलिस

गुजरात के कच्छ में हुई एक दलित अधिवक्ता की हत्या के सिलसिले में पुलिस ने मुंबई के मलाड वेस्ट इलाक़े से एक स्टेशनरी की दुकान पर काम करने वाले व्यक्ति को गिरफ़्तार किया है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने कहा है कि अधिवक्ता की हत्या सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट की वजह से हुई है.

मृतक देवीजी माहेश्वरी बामसेफ़ और इंडियन लीगल प्रोफ़ेशनल्स एसोसिएशन से जुड़े हुए थे. पुलिस का कहना है कि अभियुक्त की मृतक से ब्राह्मणवाद के मुद्दे पर बहस हुई थी.

क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के मुताबिक माहेश्वरी ने कई बार ब्राह्मणवाद के ख़िलाफ़ पोस्ट लिखी थीं और अभियुक्त ने उन्हें इसे लेकर चेताया था और ऐसी पोस्ट न लिखने के लिए कहा था.

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