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कृषि बिल: सड़क पर उतरे किसान, कई राज्यों में चक्का जाम
संसद के दोनों सदनों से पारित कृषि विधेयकों के ख़िलाफ़ आज किसान संगठन देशभर में चक्का जाम कर रहे हैं. सरकार ने इन विधेयकों को किसान हितैषी बताते हुए दावा किया है कि इनसे किसानों की आय बढ़ेगी और बाज़ार उनके उत्पादों के लिए खुलेगा.
लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि ये विधेयक कृषि क्षेत्र को कार्पोरेट के हाथों में सौंपने की कोशिशों का हिस्सा हैं.
पंजाब के किसानों ने तो गुरुवार से ही तीन दिन का रेल रोको आंदोलन शुरु किया था, लेकिन शुक्रवार को किसानों को देश-व्यापी विरोध प्रदर्शन जारी है.
विपक्ष के कई बड़े नेताओं के अलावा कई कलाकार और खिलाड़ी भी किसानों के समर्थन में सामने आए हैं.
इन विधेयकों के ख़िलाफ़ सबसे व्यापक प्रदर्शन पंजाब और हरियाणा में हो रहे हैं.
बादल गांव तक पहुंचने वाली सड़कें बंद
बठिंडा में किसानों और दूसरें संगठनों ने बादल गांव जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए.
मोदी सरकार में मंत्री रहीं हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफ़े के बाद भी लोगों का ग़ुस्सा उनके प्रति कम होता नहीं दिख रहा है.
किसानों के पक्ष में कई यूनियन सामने आए हैं, इसमें पूर्व सरकारी अधिकारियों का यूनियन भी शामिल है.
दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन
भारतीय किसान यूनियन ने दिल्ली-नोएडा सीमा पर धरना दिया और सड़के जाम की. नोएडा पुलिस के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि रुट डायवर्ट किए गए हैं.
ट्रैक्टर पर तेजस्वी यादव
पटना से बीबीसी सहयोगी सीटू तिवारी के अनुसार बिहार में भी कृषि बिल के विरोध की खबरें सुबह से आने लगी. प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कृषि बिल के विरोध में पटना की सड़कों पर ट्रैक्टर चलाया तो उनके भाई तेज प्रताप ट्रैक्टर के ऊपर फावड़ा लेकर बैठे.
इस प्रदर्शन के दौरान तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर हमलावर रूख़ अपनाते हुए कहा, "नीतीश कुमार ने एक बार फिर यू टर्न मारा है. बिहार सरकार की नीतियों के चलते ही बिहार का किसान ग़रीब होता चला गया और पलायन को मजबूर हो गया." उन्होंने बिल का वापस लेने की माँग की.
जन अधिकार पार्टी के अध्यक्ष पप्पू यादव ने अपने समर्थकों के साथ पटना के डाकबंग्ला चौराहे को जाम कर दिया.
इस बीच उनके कुछ कार्यकर्ताओं ने बिहार बीजेपी के दफ़्तर के सामने भी प्रदर्शन किया और केन्द्र और राज्य सरकार विरोधी नारे लगाए. जिसके बाद पार्टी दफ़्तर में मौजूद कार्यकर्ताओं ने उन्हें भगाया और कुछ कार्यकर्ताओं की पिटाई भी कर दी. वामपंथी पार्टियों और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी बिल के विरोध में बिहार में जगह जगह प्रदर्शन किया.
इसके अलावा ऑल इंडिया किसान समन्वय समिति की बिहार इकाई जिसमें 30 संगठन शामिल हैं, ने मधुबनी समेत कई स्टेशन पर रेल रोक कर अपना विरोध ज़ाहिर किया. बिहार इकाई के नेता अशोक प्रसाद सिंह ने कहा, "किसान भारत की रीढ़ हैं, और उन पर किसी तरह का हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा."
यूपी में पराली जलाकर प्रदर्शन
लखनऊ से बीबीसी सहयोगी समीरात्मज मिश्र के अनुसार यूपी के कई ज़िलों में सुबह से ही जगह-जगह प्रदर्शन शुरू हो गए.
किसानों ने लखनऊ में फ़ैज़ाबाद राजमार्ग को जाम करने की कोशिश की. उन्होंने पराली जलाकर और केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ नारेबाज़ी करके विधेयकों का विरोध किया. बाराबंकी में भी किसानों ने हाईवे जाम करके पराली जलाई. लखनऊ के अहिमामऊ में प्रदर्शन कर रहे कुछ किसानों को गिरफ़्तार किया गया.
किसानों के समर्थन में समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेता सड़कों पर दिखे. मेरठ, बाग़पत, मुज़फ़्फ़रनगर जैसे कई ज़िलों में किसान ट्रैक्टरों पर बैठकर आए और रास्तों को जाम कर दिया. किसानों ने पहले ही चक्का जाम का एलान किया था इसलिए प्रशासन ने क़ानून-व्यवस्था को लेकर पुख़्ता इंतज़ाम किए थे.
बाराबंकी में भारतीय किसान मज़दूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने पटेल तिराहा जाम कर प्रदर्शन किया जिससे वहां से गुज़रने वाले लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा. जबकि रायबरेली में किसानों ने शहीद स्मारक पर धरना दिया और उसके बाद कई जगहों पर प्रदर्शन किए.
कृषि बिल का विरोध करते हुए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने शांतिपूर्ण चक्का जाम होने की बात कही है.
राकेश टिकैत ने कहा, "कहीं भी एंबुलेंस और आपातकालीन वाहनों को नहीं रोका जा रहा है और ऐसा न करने की किसानों को सख़्त हिदायत दी गई है. किसानों से यह भी आग्रह किया गया है कि वो मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखें."
हालांकि मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का शायद ही कहीं ध्यान रखा जा रहा है. जहां से भी वीडियो और तस्वीरें आ रही हैं, मास्क का इस्तेमाल बहुत कम ही लोग करते दिख रहे हैं.
राजस्थान-पश्चिम बंगाल में सामान्य प्रदर्शन
जयपुर में बीबीसी के सहयोगी मोहर सिंह मीणा के मुताबिक़ राजस्थान में भारत बंद का असर और किसानों का प्रदर्शन सामान्य रहा. अधिकतर जगहों से प्रदर्शन या आंदोलन की ख़बरें नहीं मिलीं.हालांकि पंजाब सीमा से सटे श्रीगंगानगर ज़िले में ख़ासा असर देखने को मिला. यहां बड़ी संख्या में किसान सड़कों पर उतरे और नारेबाज़ी की.
अलवर में मशाल रैली निकाल कर किसानों ने विरोध दर्ज कराया.सीकर में माकपा के प्रदेशाध्यक्ष अमरा राम के नेतृत्व में प्रदर्शन किया गया. हालांकि यहां कम ही लोग एकजुट हुए. जयपुर में पुलिस कमिश्नरेट के पास किसान नेता रामपाल जाट के नेतृत्व में दर्जन भर लोग शांतिपूर्ण धरने पर बैठे.
कोलकाता में बीबीसी के सहयोगी प्रभाकर मणि तिवारी के मुताबिक़ कृषि विधेयकों के ख़िलाफ़ किसानों के देशव्यापी बंद का पश्चिम बंगाल के शहरी इलाक़ों में कोई ख़ास असर नज़र नहीं आया. लेकिन धान का कटोरा कहे जाने वाले बर्धमान ज़िले और आसपास के ग्रामीण इलाक़ों में ऑल इंडिया कृषक खेत मज़दूर संगठन (एआईकेकेएमएस) और माकपा के किसान संगठन ऑल इंडिया किसान सभा (एआईकेएस) के बैनर तले किसानों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया और हाईवे पर वाहनों की आवाजाही रोकी.
कई जगहों पर कृषि विधेयक की प्रतियां जलाई गईं. प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ नारे भी लगाए.एआईकेएस के एक नेता मनोरंजन माइती ने कहा, "केंद्र ने किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था. लेकिन अब नए विधेयकों के ज़रिए वह किसानों को कंगाल बनाने पर तुली है."
उन्होंने कहा कि बिना किसी चर्चा के विधेयकों को पारित कर सरकार ने लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं का अपमान किया है.कोलकाता में भी सत्तारुढ़ तृणमूल कांग्रेस ने विधेयकों के ख़िलाफ़ एक रैली आयोजित की और केंद्र सरकार और भाजपा की जमकर खिंचाई की. वाम संगठनों ने भी एक प्रतिवाद जुलूस आयोजित करने का फ़ैसला किया है. माकपा नेता सुजन चक्रवर्ती कहते हैं, "नए विधेयक से किसान बर्बाद हो जाएंगे."
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