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गुप्तेश्वर पांडेः लोगों से बात कर तय करूँगा कि आगे क्या करना है
बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक गुप्तेश्वर पांडे ने कहा है कि अभी उन्होंने राजनीति में आने के बारे में कोई फ़ैसला नहीं किया है.
गुप्तेश्वर पांडे के नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद कहा जा रहा था शायद उन्होंने ऐसा बिहार विधानसभा चुनाव में विधायक का चुनाव लड़ने के लिए वीआरएस लिया है. बिहार के बक्सर से गुप्तेश्वर पांडे के चुनाव लड़ने की बात कही जा रही है. यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें बीजेपी ने टिकट देने का आश्वासन दिया है.
लेकिन बुधवार को एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा, "मैंने ना कोई राजनीतिक पार्टी ज्वाइन की है, ना मैं कोई राजनेता हूँ, ज्वाइन करूँगा तो आप सबको बताकर ज्वाइन करूँगा."
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव में उनके मैदान में उतरने के सवाल पर उन्होंने कहा कि 'अभी मैं चुनाव लड़ूँगा यही मैंने कहाँ कहा है'.
उन्होंने कहा,"मैं जिन लोगों से मैं जुड़ा हूँ, लाखों लोगों से, उनसे बात करने के बाद मैं तय करुँगा कि वे मेरी सेवा किस रूप में चाहते हैं. "
उन्होंने साथ ही कहा,"सोसायटी में काम करने का तरीका केवल राजनीति ज्वाइन करना नहीं है, बिना राजनीति ज्वाइन किए हुए भी समाज में सेवा की जा सकती है."
इससे पहले बिहार सरकार ने डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे का स्वैच्छिक रिटायरमेंट आवेदन स्वीकार कर लिया.
होमगार्ड के डीजीपी एसके सिंघल को बिहार डीजीपी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है.
गुप्तेश्वर पांडे डीजीपी रहते हुए राजनीतिक बयान देने के कारण सुर्खियों में रहते थे. हाल के दिनों में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में भी अपनी टिप्पणियों के कारण विवादों में आए थे.
पूरे मामले में वो मुंबई पुलिस को लेकर हमलावर दिखे थे. अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती पर अपनी एक टिप्पणी को लेकर विवाद में आ गए थे. गुप्तेश्वर पांडे ने कहा था कि रिया चक्रवर्ती की इतनी 'औक़ात' नहीं है को वो नीतीश कुमार पर टिप्पणी करें.
2009 के लोकसभा चुनाव से पहले भी पांडे ने वीआरएस के लिए आवेदन किया था लेकिन उन्हें बक्सर से चुनाव टिकट नहीं मिला था इसलिए अपना आवेदन वापस ले लिया था.
1987 बैच के आईपीएस ऑफिसर गुप्तेशवर पांडे का बिहार के डीजीपी के रूप में 22 सितंबर आख़िरी वर्किंग डे रहा. 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले गुप्तेश्वर पांडे को नीतीश कुमार की सरकार ने बिहार का डीजीपी बनाया था.
गुप्तेश्वर पांडे का पैतृक गाँव बिहार के बक्सर ज़िले में ही है. इन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से संस्कृत में ग्रैजुएशन किया था और यूपीएससी की परीक्षा में भी संस्कृत को ही अपना विषय चुना था.
पहली कोशिश में ही इन्होंने यूपीएससी की परीक्षा निकाल ली थी और इनकम टैक्स अधिकारी के तौर पर नियुक्ति हुई थी. पांडे दूसरी कोशिश में आईपीएस निकालने में कामयाब रहे थे.
पांडे नक्सल प्रभावित ज़िले औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, बेगूसराय और नालंदा के एसपी रहे. बाद में मूंगेर और मुज़फ़्फ़पुर ज़ोन के डीआईजी बने. आगे चलकर मुज़फ़्फ़रपुर ज़ोन के आईजी बने और फिर बिहार पुलिस (ट्रेनिंग) के डीजी. नीतीश कुमार के शराबबंदी कैंपेन में गुप्तेश्वर पांडे काफ़ी सक्रिय रहे थे.
गुप्तेश्वर पाँडे और नवरुणा अपहरण मामला
2014 में गुप्तेश्वर पांडे और बिहार पुलिस के दो कर्मियों के ख़िलाफ़ सीबीआई ने नवरुणा केस में जांच की थी. 2012 में मुज़फ़्फ़रपुर से अपने घर से 12 साल की लड़की नवरुणा चक्रवर्ती को अगवा कर लिया गया था.
तब पांडे मुज़फ़्फ़रपुर के आईजी थे. उस वक़्त नवरुणा आठवीं क्लास में पढ़ती थी. नवरुणा के परिवार वालों का आरोप था कि यह अपहरण भूमाफ़ियाओं ने अंजाम दिया था क्योंकि वो उनके घर की ज़मीन पर कब्जा चाहते थे.
बिहार के डीजीपी बनने पर नवरुणा के पिता अतुल्य चक्रवर्ती ने कहा था, ''मैंने अपनी बेटी के अपहरण के मामले में गुप्तेश्वर पांडे को अभियुक्त बनाया था और अब वो बिहार के डीजीपी बन गए हैं. अब हमारे लिए कोई उम्मीद नहीं बची है.''
नवरुणा के अगवा होने के एक महीने बाद घर के पास ही नाले में एक कंकाल मिला था. डीएनए टेस्ट में पता चला था कि वो कंकाल नवरुणा का ही था. लेकिन परिवार वालों ने अपनी बेटी के वापस लौटने की उम्मीद नहीं छोड़ी थी. सीबीआई के पास पाँच सालों से यह मामला है लेकिन अब भी केस बंद नहीं हुआ है.
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