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उमर ख़ालिद: दिल्ली दंगों में गिरफ़्तारी के बाद दस दिनों की पुलिस रिमांड पर
दिल्ली में इसी साल फ़रवरी में हुए दंगों के मामले में गिरफ़्तार किये गए जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र उमर ख़ालिद को दस दिनों के पुलिस रिमांड पर भेजा गया है. आज यानी सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए ख़ालिद की पेशी हुई थी, जिसके बाद उन्हें रिमांड पर भेज दिया गया.
इस मामले में दिल्ली पुलिस ने दस दिनों के रिमांड की माँग की थी.
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के मामले में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र नेता और संस्था 'यूनाइटेड अगेंस्ट हेट' के सह-संस्थापक उमर ख़ालिद को रविवार रात दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ़्तार किया था.
ख़ालिद के पिता सैय्यद क़ासिम रसूल इलियास ने बताया कि "स्पेशल सेल ने उनके बेटे को रात 11 बजे गिरफ़्तार किया. पुलिस ख़ालिद से दोपहर 1 बजे से पूछताछ कर रही थी. 11 घंटे चली पूछताछ के बाद पुलिस ने ख़ालिद को दंगों के मामले में 'साज़िशकर्ता' के तौर पर गिरफ़्तार कर लिया."
33 वर्षीय उमर ख़ालिद के पिता का मानना है कि 'उनके बेटे को इस केस में फँसाया जा रहा है.'
संस्था 'यूनाइटेड अगेंस्ट हेट' के अनुसार, उमर ख़ालिद को मामले की मूल एफ़आईआर 59 में यूएपीए यानी ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम की धाराओं के तहत गिरफ़्तार किया गया है.
संस्था ने कहा है कि दिल्ली पुलिस सीएए के ख़िलाफ़ हुए प्रदर्शनों का अपराधीकरण करने की कोशिश कर रही है, लेकिन सीएए और यूएपीए जैसे क्रूर क़ानूनों के ख़िलाफ़ लड़ाई जारी रहेगी. साथ ही संस्था ने माँग की है कि दिल्ली पुलिस हर तरह से उमर ख़ालिद की सुरक्षा सुनिश्चित करे.
इस बीच कलाकारों, इतिहासकारों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक बयान जारी कर उमर ख़ालिद की गिरफ़्तारी की निंदा की है और उनके फ़ौरन रिहाई की माँग की है.
इतिहासकार रामचंद्र गुहा, कलाकार टीएम कृष्णा, लेखक अरुणधति रॉय, प्रशांत भूषण, पी साईनाथ, बृंदा करात, हर्ष मंदर, फ़राह नक़वी समेत क़रीब तीन दर्जन लोगों ने उमर ख़ालिद को एक बहादुर नौजवान क़रार दिया जिसने भारत के संवैधानिक मूल्यों की बात की है. उन्होंने दिल्ली पुलिस से भी विचहंट (यानी जानबूझक निशाना बनाना) बंद करने की अपील की.
उमर के समर्थन में उतरे लोग
उमर ख़ालिद की गिरफ्तारी की ख़बर आते ही कई लोग उनके समर्थन में उतर आए और गिरफ्तारी का विरोध करने लगे.
कुछ देर में ही हज़ारों ट्वीट्स के साथ #standWithUmarKhalid ट्विटर पर सबसे ऊपर ट्रेंड करने लगा.
साथ ही अपूर्वानंद और हर्ष मंदर जैसी 12 हस्तियों ने एक साथ बयान जारी कर उमर ख़ालिद की गिरफ्तारी की निंदा की और उमर को उन साहसी युवा आवाज़ों में से एक बताया जो "देश के संवैधानिक मूल्यों के लिए बोलती हैं."
इस साझा बयान में कहा गया, "शांतिपूर्ण एंटी-सीएए प्रदर्शनों को निशाना बनाकर की गई दुर्भावनापूर्ण जांच के तहत उमर ख़ालिद को गिरफ्तार किया गया है. उनके ख़िलाफ़ यूएपीए, राजद्रोह और षड्यंत्र सहित कई आरोपों के तहत मामला दर्ज किया गया है. गहरे दुख के साथ हमें ये कहने में कोई संदेह नहीं है कि ये जांच राष्ट्रीय राजधानी में फरवरी 2020 में हुई हिंसा के बारे में नहीं है, बल्कि असंवैधानिक सीएए के ख़िलाफ़ देश भर में पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीक़े से हुए प्रदर्शनों को लेकर है. उमर ख़ालिद उन हज़ारों आवाज़ों में से एक हैं जिन्होंने ख़ास तौर पर शांतिपूर्ण, अहिंसक और लोकतांत्रिक तरीक़ों को ध्यान में रखते हुए देश भर में हुए सीएए-विरोधी प्रदर्शनों में संविधान के पक्ष में बात की."
इस बयान में ये भी कहा गया, "दिल्ली पुलिस की ओर से हिंसा की साजिश के कई संगीन मामलों में उमर ख़ालिद को फंसाने की बार-बार की गई कोशिशें उनकी असहमति की आवाज़ को दबाने का एक बड़ा प्रयास है. ये बहुत महत्वपूर्ण है कि गिरफ्तार किए गए 20 लोगों में से 19 की उम्र 31 साल से कम है. जिनमें से 17 पर कठोर यूएपीए क़ानून की धाराएं लगाई गई हैं और दिल्ली हिंसा की साजिश रचने के आरोप में कैद कर लिया गया है, जबकि जिन्होंने सच में हिंसा भड़काई और उसमें शामिल रहे, उन्हें छुआ तक नहीं गया है. कैद किए गए लोगों में पांच महिलाएं और एक को छोड़कर सभी छात्र हैं. हम उमर ख़ालिद और अन्य युवा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हैं."
दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में सीएए के खिलाफ़ शुरू हुए प्रदर्शनों का अंत दंगों की शक़्ल में हुआ था.
23 फ़रवरी से 26 फ़रवरी 2020 के बीच हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई.
13 जुलाई को हाईकोर्ट में दायर दिल्ली पुलिस के हलफ़नामे के मुताबिक, मारे गए लोगों में से 40 मुसलमान और 13 हिंदू थे.
FIR-59: जिसके तहत हुई उमर ख़ालिद की गिरफ्तारी
इस मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच का कहना है कि दंगों के पीछे एक गहरी साज़िश थी. ये एफ़आईआर इसी कथित साज़िश के बारे में है.
दंगों की ये ऐसी एफ़आईआर है जिसमें अनलॉफ़ुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट यानी यूएपीए की धाराएं लगाई गई हैं. इस एफ़आईआर में उन छात्र नेताओं के नाम शामिल हैं जो दिल्ली में सीएए के खिलाफ़ प्रदर्शनों में आगे-आगे दिख रहे थे.
मूल एफ़आईआर 59 में सबसे पहला नाम जेएनयू के छात्र रहे 'यूनाइटेड अगेंस्ट हेट' के सह-संस्थापक उमर ख़ालिद का है.
6 मार्च 2020 को दर्ज हुई इस मूल एफ़आईआर में सिर्फ़ दो लोगों- जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर ख़ालिद और पॉपुलर फ़्रंट ऑफ़ इंडिया (पीएफ़आई) से जुड़े दानिश के नाम हैं. पीएफ़आई खुद को समाजसेवी संस्था बताती है लेकिन उस पर केरल में जबरन धर्म परिवर्तन और मुसलमानों के बीच कट्टरपंथ को बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा है.
एफ़आईआर के मुताबिक उमर ख़ालिद ने अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान दंगों की साज़िश रची और दानिश ने दंगों के लिए लोगों की भीड़ जुटाई.
एफ़आईआर संख्या 59 में अबतक पिंजरा तोड़ की सदस्य देवंगाना कलिता, नताशा नरवाल, कांग्रेस से पूर्व पार्षद रह चुकी इशरत जहां, यूनाइटेड अगेंस्ट हेट के सदस्य खालिद सैफी, शरजील इमाम समेत कई लोग न्यायिक हिरासत में है.
इस मामले में सफ़ूरा ज़रगर, मोहम्मद दानिश, परवेज़ और इलियास इस समय ज़मानत पर रिहा हैं.
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